गंगा के बीच
सिक्के तलाशते
बेचारे बच्चे।
गंदगी बही
बीच धारा गंगा में
शहर हंसा।
रात रोयी जो
गंगा के तट पर
पावनता थी।
गंगा किनारे
जो जमा हुआ दिखा
बलगम था।
सूखता रहा
तना बरगद का
चौराहे पर।
सूखता हुआ
पेड़ पीपल दिखा
घर के आगे।
- दिनेश चाैहान
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