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पीसीएस 2015 में मेरठ के छह होनहारों का जलवा

Sat, 05 Mar 2016 12:18 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 05 Mar 2016 12:18 PM IST
सार

  • नियमित पढ़ाई से हासिल की सफलता
  • 6 सफल अभ्यर्थियों में से 2 किसान
  • कांस्टेबल से सेवा योजन अधिकारी तक

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six students of meerut got success in pcs exam
पीसीएस परीक्षा परिणाम

विस्तार

पीसीएस 2015 में मेरठ के छह होनहारों ने सफलता हासिल की है। कड़ी मेहनत, परिवार के सपोर्ट और दृड़ इच्छाशक्ति के बल पर होनहारों ने खुद को साबित किया है। किसी ने नौकरी के साथ नियमित पढ़ाई कर सफलता प्राप्त की तो किसी का परिवार कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ा रहा। एक साथ कई-कई जिम्मेदारियां भी सपना पूरा करने में बाधा नहीं बनीं। सफल अभ्यर्थियों में कई का बैक ग्राउंड गांव से है, इनमें दो किसान के बेटे हैं।
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कांस्टेबल से सेवा योजन अधिकारी तक
किला परीक्षितगढ़ के पास स्थित अहमदपुरी गांव निवासी सौदान सिंह का सफर दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल से शुरू हुआ। माछरा इंटर कॉलेज में टीचर बने। इसके बाद लखनऊ सचिवालय में समीक्षा अधिकारी चयनित हुए और अब सेवा योजन अधिकारी बन गए हैं। लगातार मेहनत और प्रयास के बल पर सौदान सिंह ने सफलता की इबारत लिखी है। बकौल सौदान बिना परिवार की सपोर्ट के यह संभव नहीं था। पत्नी रेखा ने घर संभाला और उन्होंने अपने करियर को। सेल्फ स्टडी से वह प्रतियोगिता पास करते गए। सीसीएसयू की लाइब्रेरी में घंटों दिन रात बैठकर पढ़ाई की। वह सफल हुई। सौदान सिंह का कहना है सफलता के लिए लगातार प्रयास जरूरी है।
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लेखाधिकारी से बीएसए तक
नगर निगम में लेखाधिकारी डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी की सफलता की कहानी में कई पड़ाव आ चुके हैं। तीन नौकरी करने के बाद वह अब बीएसए बने हैं। शुरूआत सरकारी डेंटिस्ट के तौर पर की थी। पांच साल नौकरी करने के बाद मथुरा में विकलांग कल्याण अधिकारी बने। 2014 में मेरठ नगर निगम में लेखाधिकारी बन गए। अब बीएसए बन गए हैं। शास्त्रीनगर एफ ब्लॉक निवासी डॉ. मनोज की पत्नी डॉ. रुचि हापुड़ में सरकारी डॉक्टर हैं। एक भाई मेजर और दूसरे पत्रकार हैं। दो बच्चे हैं, बड़ा बेटा नौ साल का है। डॉ. मनोज का कहना है सफलता के लिए औसत बुद्धि, मेहनत, प्लानिंग और टाइम ये चार फैक्टर हैं। स्ट्रेस मैनेजमेंट और प्लानिंग किसी भी प्रतियोगिता में सफलता की कुंजी हैं।
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किसान का बेटा बना असिस्टेंट कमिश्नर
मेरठ जिले के रहावती गांव के किसान टीकाराम के पुत्र प्रदीप कुमार का चयन असिस्टेंट कमिश्नर कामर्शियल टैक्स के पद पर हुआ है। परिवार में जश्न का माहौल है। मां पार्वती देवी गृहणी हैं। प्रदीप के मुताबिक उन्हें चौथे प्रयास में सफलता मिली। वह इस बार ही इंटरव्यू तक पहुंचे थे और सफल हुए। पहले प्रयासों में सफल नहीं होने पर हार नहीं मानी। अपनी गलतियों को खोजकर उन्हें दूर किया। रणनीति तैयार की। सफलता के लिए दृढ़ विश्वास और कठिन परिश्रम जरूरी है। अपनी गलतियों को दूर किए बिना आप आगे नहीं बढ़ सकते।

शिक्षक से अधिकारी तक
जिले के हाजीपुर गांव निवासी देवेंद्र कुमार 12 साल से जनता इंटर कॉलेज खरखौदा में शिक्षक हैं। पिता स्व. रूपचंद्र किसान थे। देवेंद्र का कहना है कॉलेज के बाद वह सीसीएसयू की लाइब्रेरी में बैठकर रेग्युलर स्टडी करते थे। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कामयाबी के लिए उन्होंने कहा सबसे पहले खुद पर भरोसा रखें। दृढ़ निश्चय के साथ गहन अध्ययन करें। क्योंकि बिना गहन अध्ययन के सफलता नहीं मिलने वाली। सफलता का श्रेय मां चमेली देवी, पत्नी संघ सुमित्रा, दोस्त अरुण, सतीश, मोहरचंद आदि को दिया।

बीटेक से असिस्टेंट कमिश्नर
किला परीक्षितगढ़ के पास स्थित बहादरपुर गांव निवासी रणपाल सिंह के पुत्र पंकज निर्वाण असिस्टेंट कमिश्नर उद्योग बने हैं। पंकज ने एनआईटी दुर्गापुर पश्चिम बंगाल से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की। वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर नौकरी करते हुए सिविल की तैयारी में लगे रहे। पंकज के पिता रहावती इंटर कॉलेज के रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं। दो बहनें बीएएमएस डॉक्टर हैं। मां रेखा गृहणी हैं। पंकज का कहना है फेल होने पर दुखी न हों। मेहनत करते रहें। समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो सिविल सर्विस बेहतर कुछ नहीं।


शिवानी बनी असिस्टेंट कमिश्नर कामर्शियल टैक्स
कंकरखेड़ा के अंबेडकर रोड स्थित मॉडल टाउन निवासी दीपक अग्रवाल की पुत्री शिवानी अग्रवाल असिस्टेंट कमिश्नर कामर्शियल टैक्स बनी हैं। दीपक का दौराला में आढ़त का काम है। शिवानी ने 2006 में सोफिया गर्ल्स से 10वीं में टॉप किया था। बहन आशी अग्रवाल लेडी श्रीराम कॉलेज दिल्ली से बीए ऑनर्स कर रही है। शिवानी ने सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया है। उसने सफलता की कुंजी रेग्युलर स्टडी को बताया है। नाना भीम सैन रस्तोगी और मामा राहुल रस्तोगी का विशेष सहयोग रहा। शिवानी की इस सफलता पर परिवार में जश्न का माहौल है। परिजनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।
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