फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   पहने हुए कपड़ाें के अलावा कुछ भी नहीं बचा

पहने हुए कपड़ाें के अलावा कुछ भी नहीं बचा

Sat, 26 Jul 2014 05:30 AM IST
Jammu
Jammu Updated Sat, 26 Jul 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
जम्मू। मढ़ और दोमाना विधानसभा क्षेत्रों में कुदरत का कहर तबाही के जो जख्म दे गया है उन्हें भरने में बहुत वक्त लगेगा। ग्रामीणों का कहना है कि बादल फटने से आया सैलाब अपने साथ हमारे घर और जमीन ही नहीं बहा ले गया, बल्कि हमें दाने-दाने को मोहताज कर गया। कई दर्जन लोग ऐसे हैं, जिनके पास शरीर पर पहने हुए कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं बचा।
विज्ञापन

मढ़, कंग्रेल, दोमाना, कोट भलवाल, पुरखू, दोमाना, मिश्रीवाला, कंग्रेल, बरन, शामाचक्क, कुुंतवाला, दातरायाल, रठुआ, चौहानेचक्क, तारुचक्क, गाई समेत कई गांवों में सैलाब का पानी तो उतर गया, पर उससे पसरा सन्नाटा टूटने का नाम नहीं ले रहा। ऐसा लगता है मानो तबाही के सैलाब का पानी ग्रामीणों की आंखों में उतर आया है। महिलाएं बात करते-करते रोने लगती हैं। मासूम बच्चों को कुछ समझ ही नहीं आ रहा कि क्या हो गया है। पुरुष उजड़े हुए आशियानों को तिनका-तिनका कर फिर बसाने की मशक्कत में जुटे हैं।
विज्ञापन

पानी ने मढ़वासियों को जो घाव दिए उनका दर्द थमने का नहीं ले रहा है। दूसरे दिन भी लोगों के चेहरों पर बारिश का डर साफ नजर आ रहा था। मढ़ में बन रहे स्टेडियम के साथ लगते नाले के किनारे बसे गुज्जरों ने बाढ़ में तो जैसे-तैसे जान बचा ली पर जिंदगी को पटरी पर लौटने में अभी समय लगेगा। यहां सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 107 मवेशी बह गए। दर-बदर हुए परिवार पुल पर डेरा लगाने को विवश हैं। कुल्लों के साथ उनमें रखा सामान भी बह जाने से इन लोगों को खाने के भी लाले पड़े हुए हैं। हालांकि, स्थानीय लोग मदद कर रहे हैं लेकिन खाना बनाने के लिये बर्तन भी उनके पास नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जैतून बीबी ने बड़ी बेबसी से बताया कि गुज्जर परिवारों की तीन बेटियों के गहने भी पानी अपने साथ बहा ले गया। लीमा, सकीना और निक्को के आभूषण पानी की भेंट चढ़ गए। मोहम्मद किशां, मोहममद गनी, मोहम्मद मिजार, मोहम्मद रशीद और सलीम मोहम्मद का पूरा डेरा ही खत्म हो गया। परिवारों ने पुल से लटक कर, पेड़ पर चढ़कर, झाड़ियां पकड़ कर किसी तरह से अपनी जान बचाई। सलीम मोहम्मद ने अपने दर्द को बयां करते हुये कहा कि परेशानी का आलम यह है कि हमारे पास शरीर पर दो जोड़ी कपड़ों के अतिरिक्त कुछ भी शेष नहीं बचा है। मोहम्मद किशां ने बताया कि रात को अचानक से तीन बजे पानी आ गया। मवेशियों की चीखें सुनाई दे रही थी लेकिन बेबस थे, कुछ नहीं कर पाए। अपने बच्चों को भी बचाना कठिन हो रहा था। पुल नहीं होता तो शायद हम भी नहीं होते।

पानी ने पक्के घरों में रहने वाले स्थानीय लोगों को भी नहीं बख्शा। नालों के साथ लगते कई घरों में घुसकर पानी ने तबाही का कहर बरपाया। मढ़ के ही दातरायाल स्थित एक गौशाला की दीवार टूटने से आधा दर्जन गाय पानी में बह गई। पटियाली चक में नाले पर बने पुल का एक बड़ा हिस्सा पानी में बह जाने के कारण लोगों को नाले में से होते हुये गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार पानी आता है लेकिन कुदरत ने जितना कहर इस बार बरपाया पहले कभी ऐसा कहर देखने को नहीं मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed