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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   आतंकवादियों से ज्यादा अपनी गोली से गईं जवानों की जानें

आतंकवादियों से ज्यादा अपनी गोली से गईं जवानों की जानें

Fri, 06 Jun 2014 05:32 AM IST
Jammu
Jammu Updated Fri, 06 Jun 2014 05:32 AM IST
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जम्मू/श्रीनगर। आतंकवाद पीड़ित रियासत में देश की सीमाओं और अंदरूनी सुरक्षा की जिम्मेादरी संभाल रहे जवानों पर भी मानसिक तनाव भारी पड़ता है। इसकी पुष्टि जवानों द्वारा खुदकुशी कर जान देने अथवा साथी जवानों पर हमले किए जाने की घटनाओं से होती है।
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आरटीआई के तहत मिली जानकारी से यह खुलासा हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि इस साल मई महीने तक रियासत में तैनात सेना अथवा अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के 24 जवानों ने आत्महत्या करके अथवा साथियों के हमलों में जान गंवाई है। इनमें सीआरपीएफ, बीएसएफ के जवान भी शामिल हैं। जबकि इसकी तुलना में आतंकी वारदात में 15 जवान शहीद हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अफसरों का कहना है कि सुरक्षा बलों में तनाव कम करने को कई कदम उठाए गए हैं। योग शिविर लगाए जाते हैं और इसकेे अलावा मनोरंजन के साधन भी उपलब्ध करवाए जाते हैं। लेकिन, इसके बावजूद ऐसी घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो देश के अन्य राज्यों के मुकाबले जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी का निर्वाह करना मानसिक रूप से ज्यादा तनावपूर्ण होता है। अफसरों का दबाव, परिवार से दूरी और कर्तव्य के पालन में समन्वय नहीं बना पाने के कारण अकसर जवान आत्महत्या कर बैठते हैं या फिर तनाव में साथियों पर हमले कर देते हैं। इसका सीधा और नकारात्मक असर अन्य जवानों के मनोबल पर भी पड़ता है।
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