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महिला उत्पीड़न निवारण कक्ष खुलवाने के लिए कुलपति का फूंका पुतला
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 08 Jul 2017 07:10 PM IST
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एमडीएस कॉलेज के बाहर वीसी का पुतला फूंकने की तैयारी में छात्र
- फोटो : amar ujala
विश्वविद्यालय और कॉलेजों में महिला उत्पीड़न रोकथाम कमेटियों के गठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना कई जगह नहीं हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इस तरह की कमेटियां बनाने के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों की पालना नहीं किए जाने के विरोध में एनएसयूआई ने अजमेर में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलपति का पुतला जलाया।
एनएसयूआई के जितेन्द्र गुर्जर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी काॅलेज और विश्वविद्यालय को महिला उत्पीड़न निवारण कमेटी का गठन करने और इसके कार्यालय को रोजाना खोलने के आदेश दिए हैं, लेकिन एमडीएस यूनिवर्सिटी प्रबंधन इन आदेशों की पालना नहीं कर रहा।
पिछले लंबे समय से काॅलेज में निवारण कक्ष पर ताला जड़ा हुआ है और कमेटी का भी कोई अता पता नहीं है। इसके चलते गत 27 जून को भी कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपकर इसे खुलवाने की मांग की गई थी, लेकिन मांग नहीं माने जाने पर कुलपति कैलाशचंद सोडाणी का पुतला फूंककर रोष जताया गया है। संगठन का कहना है कि यदि जल्द से जल्द कक्ष खोलने की मांग नहीं मानी गई तो वो जल्द विश्वविद्यालय बंद जैसे कदम उठाए जाएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इस तरह की कमेटियां बनाने के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों की पालना नहीं किए जाने के विरोध में एनएसयूआई ने अजमेर में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलपति का पुतला जलाया।
एनएसयूआई के जितेन्द्र गुर्जर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी काॅलेज और विश्वविद्यालय को महिला उत्पीड़न निवारण कमेटी का गठन करने और इसके कार्यालय को रोजाना खोलने के आदेश दिए हैं, लेकिन एमडीएस यूनिवर्सिटी प्रबंधन इन आदेशों की पालना नहीं कर रहा।
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पिछले लंबे समय से काॅलेज में निवारण कक्ष पर ताला जड़ा हुआ है और कमेटी का भी कोई अता पता नहीं है। इसके चलते गत 27 जून को भी कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपकर इसे खुलवाने की मांग की गई थी, लेकिन मांग नहीं माने जाने पर कुलपति कैलाशचंद सोडाणी का पुतला फूंककर रोष जताया गया है। संगठन का कहना है कि यदि जल्द से जल्द कक्ष खोलने की मांग नहीं मानी गई तो वो जल्द विश्वविद्यालय बंद जैसे कदम उठाए जाएंगे।
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