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एक वार्डन का ऐसा खौफ, जाने से पहले ही छात्र उतर आए विरोध में

Thu, 06 Apr 2017 01:59 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 06 Apr 2017 01:59 PM IST
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The case did not stop even after the change of warden in Rajasthan University
राजस्थान यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रावासों में एक वार्डन का ऐसा खौफ है कि वो जहां भी जाते हैं, छात्रों में अजीब सा डर पैदा हो जाता है। शायद यही वजह है कि पिछले पन्द्रह-बीस दिनों से इस वार्डन को हटाने को लेकर विवि के छात्रावासों के छात्र एक के बाद एक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पहले जहां अरावली छात्रावास के छात्रों ने वार्डन को लेकर विरोध किया, वहीं अब जेसीबोस हॉस्टल के छात्र विरोध में उतर आए हैं।
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मामला हॉस्टल वार्डन एसएस चौहान से जुड़ा है। चौहान पिछले कुछ समय से अरावली छात्रावास के वार्डन थे। अरावली छात्रावास के छात्रों ने उनके ऊपर कई तरह की अनियमितताओं के आरोप लगाए और विवि प्रशासन से उन्होंने हटाने की मांग की। दस दिन तक छात्र लगातार विरोध में करते रहे। कुलपति सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया गया। विवि ने इतने लंबे विरोध के बाद कदम उठाते हुए वार्डन को बदल दिया। एसएस चौहान को हटाकर उनका कार्यभार जेसी बोस के वार्डन करतार सिंह को दे दिया गया।
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एसएस चौहान को करतार सिंह की जगह जेसीबोस लगाने की बात की गई। बस इसे दो दिन ही बीते थे कि जेसीबोस हॉस्टल के छात्र विरोध में उतर आए। वे अपने पुराने वार्डन करतार सिंह को ही हॉस्टल वार्डन बनाए रखने की मांग करने लगे। दो दिन से छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। बुधवार को किए गए प्रदर्शन के बाद विवि प्रशासन ने देर शाम तक कार्रवाई का आश्वासन दिया था। लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया तो छात्र गुरुवार सुबह फिर से प्रदर्शन पर उतर गए।
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परदे के पीछे की कहानी कुछ और बताई जा रही है। विवि के सूत्रों की मानें तो इस मामले में विवि छात्रावास में पास आउट होने के बाद भी अवैध रूप से रहने वाले छात्रों की भूमिका बताई जा रही है। कहा जाता है कि चौहान इस तरह की छात्रों पर कार्रवाई करते हैं। अरावली से भी उनकी इसी कार्रवाई से परेशान छात्रों ने विरोध किया। जेसीबोस के छात्रों में भी कुछ इसी तरह का मामला माना जा रहा है।
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