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विकलांगों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं विज्ञान के प्रयोग
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 03 Mar 2017 11:32 AM IST
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दीपक कालरा
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दआईआईएस यूनिवर्सिटी के इक्वल आपरच्यूनिटी सेल की ओर से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम में साइंस इन सर्विस आफ मेकिंग ए डिफरेंस इन लाईव्स आफ स्पेशली चैलेंज्ड वीमन एंड मेन विषय पर एक गेस्ट लेक्चर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उमंग, जयपुर की डायरेक्टर डा. दीपक कालरा मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद थी।
कालरा ने बताया कि साइंस विकलांगों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। इन्होंने बताया कि साइंस की मदद से जन्म से पहले ही बच्चों में डिसेबिलिटी का पता लगा कर उसका इलाज किया जा सकता है।
उन्होने कहा कि आरएच फैक्टर, जेनेटिक काउंस्लिंग, टीकाकरण, सोनोग्राफी के ज़रिए प्रेग्नेंसी मानिटरिंग, सेफ डिलिवरीज़ आदि तरीकों से बच्चे में विक्लांगता का पता लगाया जा सकता है। लेकिन साथ ही कालरा ने यह भी कहा कि विज्ञान की इतनी तरक्की होने के पश्चात् भी कई देश ऐसे हैं जहां विकलांगता के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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कालरा ने बताया कि साइंस विकलांगों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। इन्होंने बताया कि साइंस की मदद से जन्म से पहले ही बच्चों में डिसेबिलिटी का पता लगा कर उसका इलाज किया जा सकता है।
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उन्होने कहा कि आरएच फैक्टर, जेनेटिक काउंस्लिंग, टीकाकरण, सोनोग्राफी के ज़रिए प्रेग्नेंसी मानिटरिंग, सेफ डिलिवरीज़ आदि तरीकों से बच्चे में विक्लांगता का पता लगाया जा सकता है। लेकिन साथ ही कालरा ने यह भी कहा कि विज्ञान की इतनी तरक्की होने के पश्चात् भी कई देश ऐसे हैं जहां विकलांगता के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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