{"_id":"58b80c634f1c1b0574831f64","slug":"rajasthan-university-will-publish-a-special-annual-magazine","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रकाशित करेगी खास एनुअल मैगजीन","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रकाशित करेगी खास एनुअल मैगजीन
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 03 Mar 2017 11:33 AM IST
विज्ञापन
राजस्थान यूनिवर्सिटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और पीजी के स्टूडेंट्स की क्रिएटिव प्रतिभा को बढ़ाने के लिए वार्षिक पत्रिका का प्रकाशन किया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए सृजनात्मक लेखन की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से ज्योतिर्गमय नाम की एक वार्षिक पत्रिका प्रकाशित की जाएगी। इस पत्रिका में शिक्षकों एवं विधार्थियों के स्वरचित ललित निबंध, कविता, कहानी, व्यंग, यात्रा वृतांत, शब्द चित्र, एकांकी जैसी सामग्री का प्रकाशन किया जाएगा।
विवि जनसम्पर्क प्रकोष्ठ के अनुसार कुलपति राजेश्वर सिंह ने इसे लेकर विचार रखे थे। इस संबंध में कुलपति ने एक संपादक मण्डल का गठन किया है। इतिहास विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. के.जी. शर्मा को इस पत्रिका के प्रकाशन का संयोजन दायित्व सौंपा है। संपादक मण्डल में समाज विज्ञान, विधि, वाणिज्य, कला एवं विज्ञान संकाय के अधिष्ठाताओं को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
अंग्रेजी विभाग की प्रो. मिनि नन्दा, हिन्दी विभाग के प्रोफेसर अनिल जैन व उर्दू विभाग के एच.आर.खान को संपादक मण्डल में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। राजस्थान विवि की इस वार्षिक पत्रिका ज्योतिर्गमय के लिए 20 मार्च तक विवि के विभागाध्यक्षों, केंद्र निदेशकों व स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन कर रहे छात्रों से उनकी स्वरचित व मौलिक रचनाऐं आमंत्रित कि गई हैं। विवि अपनी इस वार्षिक पत्रिका को प्रकाशन के बाद विवि की वेवसाइट पर भी जारी करेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विवि जनसम्पर्क प्रकोष्ठ के अनुसार कुलपति राजेश्वर सिंह ने इसे लेकर विचार रखे थे। इस संबंध में कुलपति ने एक संपादक मण्डल का गठन किया है। इतिहास विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. के.जी. शर्मा को इस पत्रिका के प्रकाशन का संयोजन दायित्व सौंपा है। संपादक मण्डल में समाज विज्ञान, विधि, वाणिज्य, कला एवं विज्ञान संकाय के अधिष्ठाताओं को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
विज्ञापन
अंग्रेजी विभाग की प्रो. मिनि नन्दा, हिन्दी विभाग के प्रोफेसर अनिल जैन व उर्दू विभाग के एच.आर.खान को संपादक मण्डल में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। राजस्थान विवि की इस वार्षिक पत्रिका ज्योतिर्गमय के लिए 20 मार्च तक विवि के विभागाध्यक्षों, केंद्र निदेशकों व स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन कर रहे छात्रों से उनकी स्वरचित व मौलिक रचनाऐं आमंत्रित कि गई हैं। विवि अपनी इस वार्षिक पत्रिका को प्रकाशन के बाद विवि की वेवसाइट पर भी जारी करेगा।
विज्ञापन