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140 छात्राओं के भविष्य पर तलवार, इस लिए नहीं दे पाई प्रैक्टिकल
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 25 May 2017 02:29 PM IST
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छात्रों का विरोध
- फोटो : अमर उजाला
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शाहपुरा के सरकारी कॉलेज में दो दिन में दो सौ से ज्यादा छात्राएं प्रायोगिक परीक्षाएं देने से वंचित रह गई। छात्राओं को प्रैक्टिकल नहीं देने दिया गया, तो उन्होंने पहले कॉलेज प्रशासन से बात की और भी हंगामा शुरू कर दिया। बाद में छात्राओं ने अपना मांग पत्र कॉलेज की उप प्राचार्या अल्का कुमारी को दिया है।
जानकारी के मुताबिक शाहपुरा के बाबा गंगादास राजकीय महाविद्यालय में बुधवार को भूगोल प्रथम वर्ष की करीब 70 छात्राओं के प्रैक्टिकल एग्जाम थे। छात्राओं को ये परीक्षाएं नहीं देने दी गई। इसके बाद गुरुवार को फिर भूगोल तृतीय वर्ष की करीब 140 छात्राओं का प्रैक्टिकल होना था, इन्हें भी प्रैक्टिकल में शामिल नहीं किया गया। छात्राओं ने वजह जाननी चाही तो कहा गया कि प्रायोगिक परीक्षा के लिए जरूरी फीस जमा नहीं करवाई गई, जिसके कारण राजस्थान विवि ने इसकी स्वीकृति नहीं दी गई।
कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में पल्ला झाड़ते हुए छात्राओं की गलती बताते हुए विवि से बात करने के लिए कहा है। इधर छात्राओं ने पहले नारेबाजी की औऱ बाद में कॉलेज प्रशासन के नाम ज्ञापन दिया। उन्होंने ज्ञापन उप प्राचार्य अलका को सौंपा और इसमें मांग की है कि छात्राओं के प्रायोगिक परीक्षा दिलवाए जाने की व्यवस्था की जाए। ऐसा नहीं होने पर छात्राओं के भविष्य अधर में पड़ जाएगा।
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जानकारी के मुताबिक शाहपुरा के बाबा गंगादास राजकीय महाविद्यालय में बुधवार को भूगोल प्रथम वर्ष की करीब 70 छात्राओं के प्रैक्टिकल एग्जाम थे। छात्राओं को ये परीक्षाएं नहीं देने दी गई। इसके बाद गुरुवार को फिर भूगोल तृतीय वर्ष की करीब 140 छात्राओं का प्रैक्टिकल होना था, इन्हें भी प्रैक्टिकल में शामिल नहीं किया गया। छात्राओं ने वजह जाननी चाही तो कहा गया कि प्रायोगिक परीक्षा के लिए जरूरी फीस जमा नहीं करवाई गई, जिसके कारण राजस्थान विवि ने इसकी स्वीकृति नहीं दी गई।
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कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में पल्ला झाड़ते हुए छात्राओं की गलती बताते हुए विवि से बात करने के लिए कहा है। इधर छात्राओं ने पहले नारेबाजी की औऱ बाद में कॉलेज प्रशासन के नाम ज्ञापन दिया। उन्होंने ज्ञापन उप प्राचार्य अलका को सौंपा और इसमें मांग की है कि छात्राओं के प्रायोगिक परीक्षा दिलवाए जाने की व्यवस्था की जाए। ऐसा नहीं होने पर छात्राओं के भविष्य अधर में पड़ जाएगा।
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