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जाकिर नाईक के एनजीओ को अब सीधे नहीं मिलेगा विदेशी चंदा  

Sun, 06 Nov 2016 04:47 AM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
एजेंसी/ नई दिल्ली Updated Sun, 06 Nov 2016 04:47 AM IST
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Zakir Naik's NGO put under 'prior permission' list by Home Ministry
विवादास्पद इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक की संस्था आईआरएफ एजुकेशनल ट्रस्ट को प्राथमिक अनुमति श्रेणी में डाल दिया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि अब इस संस्था को केंद्र सरकार से अनुमति लिए बगैर विदेशी चंदा नहीं मिल सकता है। 
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एक गजट अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने कहा है कि उपलब्ध रिकॉर्डों तथा खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों के आधार पर पाया गया है कि आईआरएफ एजुकेशन ट्रस्ट ने विदेशी सहायता नियम कानून (एफसीआरए) 2010 के कई प्रावधानों का उल्लंघन किया है। अधिसूचना के मुताबिक, लिहाजा सरकार ने एफसीआरए 2010 के अनुच्छेद 11 की उपधारा (3) में मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए तय किया है कि आईआरएफ एजुकेशन ट्रस्ट को अब कोई भी विदेशी सहायता राशि लेने से पहले हर बार केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति लेनी होगी जैसाकि इस अधिनियम के अनुच्छेद 12 के प्रावधानों में उल्लेख किया गया है। 
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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कई तरह की जांच मेुं पाया गया कि नाईक अपने एनजीओ के लिए मिलने वाली सहायता राशि का इस्तेमाल युवाओं को कट्टरपंथ बनाने के लिए करते हैं और उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए भड़काते हैं। इन जांचों के बाद ही यह कदम उठाया गया है। सरकार जाकिर नाईक के एक अन्य एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन का एफसीआरए पंजीकरण भी रद्द करने की प्रक्रिया में है और इस संस्था को अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है। 
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मजे की बात यह है कि नाईक के खिलाफ जब कई कोणों से जांच चल रही थी, उसी बीच सितंबर में उनके आईआरएफ को एफसीआरए के तहत रिन्यू भी कर दिया गया। इस वजह से गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव और चार अन्य अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया गया। सरकार गैरकानूनी गतिविधियां निवारक अधिनियम के तहत आईआरएफ को गैरकानूनी संगठन घोषित करने पर भी विचार कर रही है और इसके लिए केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।


महाराष्ट्र पुलिस से मिले इनपुट पर आधारित मसौदा पत्र के मुताबिक, नाईक ने कई भड़काऊ भाषण दिए हैं और आतंक पर दुष्प्रचार फैलाने में लिप्त रहे हैं। युवाओं को कट्टरपंथ अपनाने तथा उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का प्रलोभन देने के आरोप में नाईक के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस ने आपराधिक मामले भी दर्ज किए हैं। बताया जाता है कि नाईक ने आपत्तिजनक प्रोग्राम्स बनाने के लिए पीस टीवी को भी विदेशी चंदा हस्तांतरित किया है। भारत में बने इस टीवी के कई कार्यक्रम नाईक के नफरत फैलाने वाले भाषणों से जुड़े हैं जिनमें नाईक मुस्लिमों से आतंकवादी बनने की अपील कर रहे हैं। 
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