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Manmohan Singh: पूर्व पीएम के आर्थिक सुधारों की दुनिया करती है तारीफ,1991 में पेश किया था युगांतकारी बजट

Fri, 27 Dec 2024 05:19 AM IST
शिव शुक्ला कालीचरण
कालीचरण Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 27 Dec 2024 05:19 AM IST
सार

1991 से 1996 के बीच भारत में हुए आर्थिक सुधारों की दुनिया प्रशंसा करती है। इन आर्थिक सुधारों केल जरिये मनमोहन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया से जोड़ा। इतना ही नहीं उन्होंने देश में लाइसेंस  राज खत्म किया। साथ ही घाटे में चलने वाली सरकारी कंपनियों के लिए अलग नीति भी बनाई।
 

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world is praising the economic reforms of former PM Manmohan Singh, know everything about him
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने दिया बड़ा योगदान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साल था 1991...देश गर्मियों के साथ उच्च महंगाई, भुगतान घाटे और घटते विदेशी मुद्रा भंडार की वजह से आर्थिक संकट से जूझ रहा था। यह वही साल था, जब पीवी नरसिम्हा राव 10वें प्रधानमंत्री बने और वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई डॉ. मनमोहन सिंह को। उस समय देश का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 8.5 फीसदी के आसपास था। बतौर वित्त मंत्री महज एक साल के भीतर डॉ. सिंह इसे 5.9 फीसदी के स्तर पर लाने में कामयाब रहे। उन्होंने ऐसे सुधार कार्यक्रम लागू किए जिनसे देश की डूबती अर्थव्यवस्था ने वह मुकाम हासिल कर लिया कि फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा।

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2004 से 2014 तक लगातार 10 साल प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने 1991 में वित्त मंत्री की कुर्सी संभालने के बाद आर्थिक क्रांति ला दी थी। उन्होंने ही देश में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की और अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोला। 1991 से 1996 के बीच उन्होंने आर्थिक सुधारों की जो रूपरेखा, नीति और ड्राफ्ट तैयार किए, उसकी दुनियाभर में प्रशंसा की जाती है। उस दौर में चुनौतियों से जूझ रही घरेलू अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार से जोड़ने के बाद मनमोहन ने आयात और निर्यात के नियम भी सरल किए। लाइसेंस राज खत्म किया और घाटे में चलने वाली सरकारी कंपनियों के लिए अलग से नीतियां बनाईं।
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आर्थिक सलाहकार और आरबीआई गवर्नर भी रहे
डॉ. सिंह 1971 में वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में भारत सरकार में शामिल हुए। इसके तुरंत बाद 1972 में उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया। 1985 में राजीव गांधी के शासन काल में मनमोहन को योजना आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके अलावा, उन्होंने वित्त मंत्रालय में सचिव, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष के रूप में कई सरकारी पदों पर काम किया।
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पेश किया युगांतकारी बजट
1991 के बजट को युगांतकारी बजट कहा जाता है, जिसे बतौर वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने पेश किया था। यह बजट ऐसे समय में आया, जब देश आर्थिक पतन के रास्ते पर बढ़ रहा था। इस बजट में निर्यात को लेकर कई बड़े कदम उठाए गए थे। सीमा शुल्क को 220 फीसदी से घटाकर 150 फीसदी कर दिया गया। विदेशी कंपनियों को भारत में कारोबार शुरू करने के लिए कई नियमों में बदलाव किया गया। इस बजट ने देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज करने का काम किया।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व
डॉ. सिंह की शैक्षणिक साख पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में फैकल्टी के रूप में बिताए वर्षों में और निखरकर सामने आई। इन वर्षों के दौरान उन्होंने अंकटाड सचिवालय में भी कुछ समय के लिए काम किया। वह 1987-1990 के बीच जिनेवा में दक्षिण आयोग के महासचिव भी रहे। डॉ. सिंह ने कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और विदेशी संस्थानों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने 1993 में साइप्रस में राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक और 1993 में ही वियना में मानवाधिकारों पर हुए विश्व सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था।

विचारक और विद्वान के रूप में ख्याति
देश के 14वें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को एक विचारक और विद्वान के रूप में ख्याति प्राप्त थी। वह अपनी मेहनत और काम के प्रति अकादमिक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते थे। सुलभता और विनम्र व्यवहार के लिए लोग उनका सम्मान करते थे।


पूर्व पीएम को पद्मविभूषण समेत मिले कई सम्मान
मनमोहन सार्वजनिक जीवन में अपने कार्यों के लिए पद्मविभूषण समेत देश-विदेश में कई सम्मानों से नवाजे गए। उन्हें जापानी निहोन केइजाई शिंबुन समेत कई अन्य संगठनों ने भी सम्मानित किया। कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड समेत कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद उपाधियां प्रदान की थीं।

  • 1987 में देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्मविभूषण मिला
  • 1995 में राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस में जवाहरलाल नेहरू ब्रिटिश सेंटनरी अवार्ड
  • 1993 और 1994 में फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर के लिए एशिया मनी अवार्ड
  • 1993 में फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर के लिए यूरो मनी अवार्ड
  • 1956 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज की ओर से द एडम स्मिथ प्राइज
  • 1955 में कैम्ब्रिज के सेंट जॉन्स कॉलेज में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राइट पुरस्कार।
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