{"_id":"696a82c8487eb27c9609acac","slug":"world-book-fair-2026-yashwant-vyas-launched-novel-chehre-ke-andar-ka-akash-translated-by-arjun-nirala-2026-01-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुस्तक मेला: वरिष्ठ पत्रकार यशवंत व्यास ने किया 'चेहरे के अंदर का आकाश' का विमोचन, कहा- भावों का सटीक अनुवाद","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पुस्तक मेला: वरिष्ठ पत्रकार यशवंत व्यास ने किया 'चेहरे के अंदर का आकाश' का विमोचन, कहा- भावों का सटीक अनुवाद
Fri, 16 Jan 2026 11:56 PM IST
लव गौर
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Fri, 16 Jan 2026 11:56 PM IST
सार
विश्व पुस्तक मेला 2026: वरिष्ठ पत्रकार और लेखक यशवंत व्यास ने नेपाली से हिंदी में अनुदित उपन्यास ‘चेहरे के अंदर का आकाश’ का विमोचन किया। यह कृति मूल रूप से नेपाली भाषा में डॉ. इंदु प्रभा देवी द्वारा लिखी गई है, जिसका भावानुवाद वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अर्जुन निराला ने किया है।
विज्ञापन
उपन्यास 'चेहरे के अंदर का आकाश' का विमोचन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विश्व पुस्तक मेला 2026 के साहित्यिक मंच पर शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण क्षण तब साक्षी बना, जब वरिष्ठ पत्रकार और लेखक यशवंत व्यास ने नेपाली से हिंदी में अनुदित उपन्यास ‘चेहरे के अंदर का आकाश’ का विमोचन किया। यह कृति मूल रूप से नेपाली भाषा में डॉ. इंदु प्रभा देवी द्वारा लिखी गई है, जिसका भावानुवाद वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अर्जुन निराला ने किया है। पुस्तक का प्रकाशन आधार प्रकाशन द्वारा किया गया है। इस मौके पर देश के विभिन्न प्रांतों के कई वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मौजूद रहे।
भावों का सटीक अनुवाद: यशवंत व्यास
विमोचन अवसर पर यशवंत व्यास ने कहा कि अनुवाद केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं होता, बल्कि वह मूल रचना की आत्मा को दूसरी भाषा में जीवित रखने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि डॉ. इंदु प्रभा देवी जिन संवेदनाओं, विचारों और अनुभवों को व्यक्त करना चाहती थीं, अर्जुन निराला ने उन्हें उसी भाव के साथ हिंदी में प्रस्तुत किया है। यह अनुवाद सहज, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है। उन्होंने मूल लेखिका, अनुवादक और प्रकाशक देश निर्मोही को इस साहित्यिक प्रयास के लिए बधाई दी।
नेपाली और पूर्वोत्तर साहित्य को मिलेगी पहचान
यशवंत व्यास ने उम्मीद जताई कि इस तरह की कृतियां नेपाली और पूर्वोत्तर भारत में रचे जा रहे साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक होंगी। उन्होंने साहित्यिक अनुवाद पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भाषाई विविधता को समझने और जोड़ने के लिए अनुवाद का कार्य और अधिक व्यापक स्तर पर किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
अनुवाद को बढ़ावा देता आधार प्रकाशन
इस अवसर पर आधार प्रकाशन के देश निर्मोही ने कहा कि नेपाली और पूर्वोत्तर भाषाओं में लिखा जा रहा साहित्य विचार, संवेदना और अनुभव की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने कहा कि इस साहित्य को हिंदी पाठकों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है और आधार प्रकाशन भविष्य में भी ऐसे अनुवाद कार्यों को प्रोत्साहित करता रहेगा।
उपन्यास स्वयं बोलेगा: लेखिका
लेखिका डॉ. इंदु प्रभा देवी ने कहा कि ‘चेहरे के अंदर का आकाश’ क्यों लिखा गया और इसमें किस तरह की छवियों को उकेरने का प्रयास किया गया है, इसका उत्तर उपन्यास स्वयं देता है। उन्होंने बताया कि यह कृति एक उच्च शिक्षित युवा के जीवन की कथा है, जिसे उन्होंने लॉकडाउन के लंबे और आत्ममंथन भरे समय में लिखा।
आधुनिक चेतना और सहअस्तित्व की कथा
‘चेहरे के अंदर का आकाश’ शिक्षित पात्रों की जीवनशैली के माध्यम से आधुनिक चेतना को अभिव्यक्त करता है। उत्तर-पूर्वांचल भारत के भाव-परिवेश में रचा गया यह उपन्यास राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय युगबोध को समेटे हुए है। विभिन्न जातियों और पृष्ठभूमियों से आए पात्र सहअस्तित्व और सामूहिक जीवन के आदर्श को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे यह कृति समकालीन समाज का एक संवेदनशील साहित्यिक दस्तावेज बन जाती है।
ये भी पढ़ें: एक मंच पर कई उत्सव : नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में मनाया गया भारत की साहित्यिक विविधता का उत्सव
पूर्वोत्तर की रचना को राष्टीय पहचान दिलाना लक्ष्यः निराली
नेपाली भाषा के उपन्यास का हिंदी अनुवाद करने वाले अर्जुन निराला ने कहा, मुझे अनुवाद करना अच्छा लगता है। पूर्वोत्तर में बहुत बेहतरीन साहित्य सृजन का काम हो रहा है। मैं खुद पूर्वोत्तर का रहने वाला हूं। मेरी दिली तमन्ना है कि पूर्वोत्तर में जो बेहतरीन साहित्य रचा जा रहा है, उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाऊं। धीरे-धीरे मैं उसमें सफल भी हो रहा हूं। उल्लेखनीय है कि अर्जुन निराला असम के तिनसुकिया जिले के लखीपथार गांव के मूल निवासी हैं।
अन्य वीडियो
विज्ञापन
भावों का सटीक अनुवाद: यशवंत व्यास
विमोचन अवसर पर यशवंत व्यास ने कहा कि अनुवाद केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं होता, बल्कि वह मूल रचना की आत्मा को दूसरी भाषा में जीवित रखने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि डॉ. इंदु प्रभा देवी जिन संवेदनाओं, विचारों और अनुभवों को व्यक्त करना चाहती थीं, अर्जुन निराला ने उन्हें उसी भाव के साथ हिंदी में प्रस्तुत किया है। यह अनुवाद सहज, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है। उन्होंने मूल लेखिका, अनुवादक और प्रकाशक देश निर्मोही को इस साहित्यिक प्रयास के लिए बधाई दी।
विज्ञापन
नेपाली और पूर्वोत्तर साहित्य को मिलेगी पहचान
यशवंत व्यास ने उम्मीद जताई कि इस तरह की कृतियां नेपाली और पूर्वोत्तर भारत में रचे जा रहे साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक होंगी। उन्होंने साहित्यिक अनुवाद पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भाषाई विविधता को समझने और जोड़ने के लिए अनुवाद का कार्य और अधिक व्यापक स्तर पर किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
अनुवाद को बढ़ावा देता आधार प्रकाशन
इस अवसर पर आधार प्रकाशन के देश निर्मोही ने कहा कि नेपाली और पूर्वोत्तर भाषाओं में लिखा जा रहा साहित्य विचार, संवेदना और अनुभव की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने कहा कि इस साहित्य को हिंदी पाठकों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है और आधार प्रकाशन भविष्य में भी ऐसे अनुवाद कार्यों को प्रोत्साहित करता रहेगा।
उपन्यास स्वयं बोलेगा: लेखिका
लेखिका डॉ. इंदु प्रभा देवी ने कहा कि ‘चेहरे के अंदर का आकाश’ क्यों लिखा गया और इसमें किस तरह की छवियों को उकेरने का प्रयास किया गया है, इसका उत्तर उपन्यास स्वयं देता है। उन्होंने बताया कि यह कृति एक उच्च शिक्षित युवा के जीवन की कथा है, जिसे उन्होंने लॉकडाउन के लंबे और आत्ममंथन भरे समय में लिखा।
आधुनिक चेतना और सहअस्तित्व की कथा
‘चेहरे के अंदर का आकाश’ शिक्षित पात्रों की जीवनशैली के माध्यम से आधुनिक चेतना को अभिव्यक्त करता है। उत्तर-पूर्वांचल भारत के भाव-परिवेश में रचा गया यह उपन्यास राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय युगबोध को समेटे हुए है। विभिन्न जातियों और पृष्ठभूमियों से आए पात्र सहअस्तित्व और सामूहिक जीवन के आदर्श को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे यह कृति समकालीन समाज का एक संवेदनशील साहित्यिक दस्तावेज बन जाती है।
ये भी पढ़ें: एक मंच पर कई उत्सव : नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में मनाया गया भारत की साहित्यिक विविधता का उत्सव
पूर्वोत्तर की रचना को राष्टीय पहचान दिलाना लक्ष्यः निराली
नेपाली भाषा के उपन्यास का हिंदी अनुवाद करने वाले अर्जुन निराला ने कहा, मुझे अनुवाद करना अच्छा लगता है। पूर्वोत्तर में बहुत बेहतरीन साहित्य सृजन का काम हो रहा है। मैं खुद पूर्वोत्तर का रहने वाला हूं। मेरी दिली तमन्ना है कि पूर्वोत्तर में जो बेहतरीन साहित्य रचा जा रहा है, उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाऊं। धीरे-धीरे मैं उसमें सफल भी हो रहा हूं। उल्लेखनीय है कि अर्जुन निराला असम के तिनसुकिया जिले के लखीपथार गांव के मूल निवासी हैं।
अन्य वीडियो