{"_id":"571914d74f1c1b4b048b46f3","slug":"women-worship-in-trimbakeshwar-temple","type":"story","status":"publish","title_hn":"त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महिलाओं ने प्रवेश कर रचा इतिहास, टूटी रोक की परंपरा","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महिलाओं ने प्रवेश कर रचा इतिहास, टूटी रोक की परंपरा
ब्यूरो/अमर उजाला,मुंबई
Updated Thu, 21 Apr 2016 11:28 PM IST
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नासिक के प्रसिद्ध त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक की परंपरा आखिरकार बृहस्पतिवार को टूट ही गई। पुणे की स्वराज संस्था की महिलाओं ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर नया इतिहास रचा।
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स्वराज महिला संगठन की वनिता गुट्टे के नेतृत्व में तीन महिला कार्यकर्ताओं ने पूजन किया। हालांकि परंपरा टूटने से नाराज ग्रामीणों ने दुकानें बंद कर अपना विरोध जताया, लेकिन भारी पुलिस बंदोबस्त के चलते कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
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देश के बारह ज्योतिर्लिंग में शुमार त्र्यंबकेश्वर मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश को लेकर आंदोलन करने वाली वनिता गुट्टे ने इससे पहले तीन बार मंदिर में घुसने की कोशिश की थी, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के चलते गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर पाई थीं।
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बुधवार को स्थिति तब और बिगड़ गई, जब स्थानीय महिलाओं ने स्वराज संस्था की एक महिला को तमाचा जड़ दिया। उसके बाद महिला संगठन ने त्र्यंबकेश्वर के पूर्व नगराध्यक्ष सहित करीब 200 लोगों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कराया।
मंदिर ट्रस्ट और ग्रामीणों पर कानूनी शिकंजा कसने के बाद मंदिर प्रशासन पर दबाव बना। हालांकि इससे पहले त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट ने रोजाना एक घंटे महिलाओं को पूजा-अर्चना के लिए प्रवेश करने देने का फैसला लिया था।
अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत मोहिते ने कहा कि बृहस्पतिवार को बाकायदा ड्रेस कोड में सूती वस्त्र पहनाकर संगठन की तीन महिलाओं ने मंदिर के गर्भगृह में सुबह सात बजे से पहले प्रवेश किया।
गर्भगृह में प्रवेश करने वाली तीनों महिलाओं को पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई। दरअसल, त्र्यंबकेश्वर मंदिर के गर्भगृह में सुबह छह से सात बजे तक ही प्रवेश की अनुमति है। सुबह सात बजे के बाद पूजा के लिए भक्तों के प्रवेश पर रोक लगाई गई।
त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के लिए आंदोलन तब शुरू हुआ जब बांबे हाईकोर्ट ने धार्मिक स्थलों पर पुरुष के साथ ही महिलाओं को भी समान अधिकार दिए जाने का आदेश दिया। इसके बाद शनि शिंगणापुर के शनि मंदिर और कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति मिली।
पुलिस का शुक्रिया किया
त्र्यंबकेश्वर मंदिर में पूजा कर लौटी वनिता गुट्टे ने पत्रकारों से बातचीत में पुलिस को मदद के लिए शुक्रिया कहा। उन्होंने कहा कि अब मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर कोई अड़चन नहीं आनी चाहिए।
हालांकि, महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने से नाराज त्र्यंबकर गांव की सारी दुकानें बंद रही। मंदिर परिसर में भी कोई दुकान नहीं खुली। इससे दर्शन के लिए आने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।