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संसद के शीतकालीन सत्र को गर्म रखेंगे सरकार के ये प्रस्तावित विधेयक

Tue, 19 Nov 2019 01:47 PM IST
बीबीसी Published by: अनिल पांडेय Updated Tue, 19 Nov 2019 01:47 PM IST
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Winter Session of Parliament has Begun, a Look at Key Bills Likely to be Discussed in
संसद का शीतकालीन सत्र - फोटो : PTI

संसद का शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा। इस बार सदन में करीब 35 बिल पेश किए जाएंगे जिनमें कुछ पहले से ही चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। जो विधेयक संदन में पेश किए जाएंगे उनमें नागरिकता संशोधन विधेयक, निजता का अधिकार और ई-सिगरेट प्रतिबंध जैसे महत्वपूर्ण विधेयक हैं।

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लेकिन, वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह का कहना है कि चर्चा के केंद्र अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी होने के बाद कश्मीर की स्थिति रहेगी।

वो कहते हैं, ''पिछले सत्र के आखिरी दिनों में अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने का जो प्रस्ताव पास हुआ था उसके बाद से जम्मू-कश्मीर के स्थानीय नेताओं को नजरबंद कर दिया गया था। इनमें तीन पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती शामिल हैं। सर्वदलीय बैठक में ये मांग हुई है कि फारूख अब्दुल्ला सदन में मौजूद रहें, तो ये मुद्दा भी बड़ा होगा। विपक्ष अर्थव्यवस्था की सुस्ती को लेकर हमलावर हो सकता है।''
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''एक मुद्दा गांधी परिवार से एसपीजी सुरक्षा हटाने को लेकर भी उठ सकता है। देखना होगा कि इस पर कांग्रेस को दूसरे दल समर्थन देते हैं या नहीं।''

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नागरिकता संशोधन विधेयक

  • इनमें से सबसे महत्वूपर्ण है नागरिकता संशोधन विधेयक जो साल 2016 में लाया गया था।
  • इसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास विचार के लिए भेजा गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट सात जनवरी, 2019 को सौंपी थी।
  • इसके बाद बिल को आठ जनवरी 2019 को लोकसभा में पेश किया गया, जहां ये पास हो गया था लेकिन राज्यसभा में रुक गया था।
  • इसके बाद लोकसभा चुनाव हुए और संसद भंग हो गई। अब फिर से इसे लोकसभा में पेश किया जाएगा।
  • नागरिकता संशोधन विधेयक नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव के लिए लाया गया था।

ये विधेयक बिना वैध दस्तावेज के पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। एक तरह से तीन मुस्लिम बहुल देशों के गैर-मुस्लिम प्रवासियों के लिए भारत की नागरिकता पाना आसान बनाया गया है।


नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत नागरिकता के लिए एक शर्त यह थी कि आवेदक 12 महीने से भारत में रह रहा हो और साथ ही पिछले 14 सालों में 11 साल भारत में गुजारे हों।

संशोधित विधेयक में दूसरी शर्त में बदलाव किया गया है। इसके तहत भारत में उनके निवास काल को 11 साल से घटाकर छह साल कर दिया गया है यानी प्रवासी छह साल बाद भी भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।

अवैध प्रवासी वो होते हैं जो पासपोर्ट या वीजा जैसे वैध दस्तावेजों के बिना किसी देश में प्रवेश करते हैं। दूसरे वो जो वैध दस्तावेजों के साथ आते हैं लेकिन तय अवधि से ज्यादा रहने लगते हैं। वैध प्रवासियों को क़ानून के तहत जेल भेजा जाता है या उनके देश में वापस भेज दिया जाता है। लेकिन, इस विधेयक के तहत खास अल्पसंख्यकों को न तो जेल भेजा जाएगा और न ही उनके देश वापस।

इस विधेयक पर हो रहे विवाद को लेकर प्रदीप सिंह कहते हैं, ''इस विधेयक में विवाद का कारण है कि इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के मुस्लिमों को बाहर रखा गया है। विपक्ष का कहना है कि ये सांप्रदायिक बिल है लेकिन सरकार का कहना है कि मुस्लिम समुदाय को बाहर इसलिए रखा गया है क्योंकि तीनों देशों में जो ग़ैर-मुस्लिम धार्मिक उत्पीड़न के अपना देश छोड़कर यहां आ रहे हैं। उनके लिए कोई दूसरा देश नहीं है। इसलिए उन्हें यहां नागरिकता देने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए।''

लेकिन, प्रदीप सिंह कहते हैं कि इस बिल को पास कराना सरकार के लिए अनुच्छेद 370 से भी मुश्किल होगा। अनुच्छेद 370 में सभी खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे थे लेकिन इसमें ऐसा नहीं होगा। हालांकि, राज्यसभा में भी गणित धीरे-धीरे बदल रहा है।

ये प्रमुख विधेयक भी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाएंगे:

  • निजी डेटा सुरक्षा विधेयक
  • कॉर्पोरेट दर में कटौती संबंधी विधेयक
  • ई-सिगरेट प्रतिबंध अध्यादेश पर विधेयक
  • किशोर न्याय (देखभाल और सुरक्षा) संशोधन विधेयक
  • वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण एवं कल्याण विधेयक
  • राष्ट्रीय पुलिस विश्वविद्यालय विधेयक
  • केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक

सरकार पिछले सत्र में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने और तीन तलाक़ विधेयक पास करवा चुकी है। ऐसे में, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि विपक्ष के भारी विरोध के बीच वह नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर क्या रणनीति अपनाएगी।

इस पर वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं, ''प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि विपक्ष ने कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। अब विवाद ये होता है कि किन नियमों के तहत कौन-सी चर्चा हो। इस पर देखना है कि विपक्ष और सरकार में किस तरह का तालमेल बनता है। उम्मीद करनी चाहिए कि विपक्ष गतिरोध और वॉकआउट का रास्ता अपनाने की बजाय सरकार के विरोध के बाकी संसदीय तरीकों का इस्तेमाल करेगा। सरकार भी उनके मुद्दों पर बहस कराएगी।''



संसद के पिछले सत्र में हंगामा तो खूब हुआ था मगर बावजूद इसके 30 से ज्यादा विधेयक पास हुए थे। अब शीत सत्र के शुरुआती दिनों में ही यह साफ हो जाएगा कि ये कामकाज के लिहाज से कितना सफल होने वाला है।

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