{"_id":"5d3e8f8b8ebc3e6cc60b3d9e","slug":"will-think-about-hearing-of-petitions-who-challenging-government-law-says-sc","type":"story","status":"publish","title_hn":"मराठा आरक्षण: कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई की मांग पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
मराठा आरक्षण: कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई की मांग पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट
Mon, 29 Jul 2019 11:47 AM IST
शिल्पा ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिल्पा ठाकुर
Updated Mon, 29 Jul 2019 11:47 AM IST
विज्ञापन
supreme court
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बात पर कोर्ट ने सोमवार को सहमति जताई है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ ने एक वकील के इस कथन पर गौर किया कि जिन याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होना था, वे न्यायालय की कार्यसूची में नहीं है।
विज्ञापन
पीठ ने मामले पर तत्काल सुनवाई के अनुरोध पर कहा, "आप मेमो दीजिए। हम इस पर गौर करेंगे।" शीर्ष अदालत में मराठा आरक्षण को सही ठहराने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ जे लक्ष्मण राव पाटिल और वकील संजीत शुक्ला की याचिका लंबित है। इन याचिकाओं में बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें आरक्षण की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा गया।
विज्ञापन
उच्च न्यायालय ने अपने 27 जून के फैसले में कहा था कि कुल आरक्षणों पर उच्चतम न्यायालय की ओर से लगाई गई 50 फीसदी की सीमा को अपवाद की परिस्थितियों में पार किया जा सकता है।
विज्ञापन
"यूथ फॉर इक्वेलिटी" के प्रतिनिधि शुक्ला ने अपनी याचिका में कहा कि सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) कानून, 2018 शीर्ष अदालत द्वारा इंदिरा साहनी मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले में आरक्षण पर लगाई गई 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन है। इस फैसले को "मंडल आदेश" भी कहा जाता है।
इस कानून का मकसद सरकारी नौकरियों एवं शिक्षा में मराठा समुदाय को आरक्षण देना था।