पिछले विधानसभा चुनाव में बेअसर रही थी पीएम नरेंद्र मोदी की अपील, इस बार क्या होगा?
- वर्ष 2015 के चुनाव के पहले भी रामलीला मैदान में पीएम नरेंद्र मोदी ने दिया था अहम भाषण
- जनता से ऩक्सलियों को जंगल भेजने और बीजेपी को सत्ता देने की की थी अपील
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज की तारीख में बीजेपी के सबसे बड़े स्टार प्रचारक हैं। वह उनका हर चुनावी प्रचार में बखूबी इस्तेमाल भी करती है। इसीलिए आज रविवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलीला मैदान से दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार पर हमला बोला तो इसे भाजपा की तरफ से विधानसभा चुनाव का शंखनाद ही माना गया। लेकिन इसी के साथ यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले विधानसभा चुनाव 2015 से पहले भी इसी रामलीला मैदान से बीजेपी की चुनावी रैली का आगाज किया था।
उस रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविंद केजरीवाल को इशारों-इशारों में 'नक्सली' कहा था और जनता से अपील की थी कि जो शासन करने के योग्य हैं, उन्हें सत्ता सौंपी जाए और जो जंगल में रहने के योग्य हैं उन्हें जंगल में भेजा जाए। दिल्ली विधानसभा 2015 के चुनाव परिणाम तो फिलहाल यही बताते हैं कि जनता ने उस समय के बेहद लोकप्रिय प्रधानमंत्री की बात पर ध्यान नहीं दिया और आम आदमी पार्टी के नायक अरविंद केजरीवाल को ऐतिहासिक बहुमत देकर इतिहास रच दिया। भाजपा को उस चुनाव में अब तक की सबसे कम तीन सीटों पर समेट दिया।
दिल्ली विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से पीएम मोदी आज रविवार को एक बार फिर दिल्ली की जनता से मुखातिब हुए। आज उन्होंने अरविंद केजरीवाल सरकार पर जबरदस्त हमले किए और कन्हैया कुमार जैसे लोगों के पक्ष में खड़े होने का आरोप लगाया। उन्होंने पानी के मुद्दे पर दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा किया और उस पर झूठ बोलने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने दिल्ली सरकार पर दिल्ली में मेट्रो के विस्तार और कच्ची कालोनी के लोगों को पक्की करने की राह में अड़चनें पैदा करने का आरोप भी लगाया। इस बार भी जनता से उन्होंने बीजेपी को जीत दिलाने की अपील की है। अब देखना होगा कि जनता उनकी बात पर कितना ध्यान देती है।
क्या कहा था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अभूतपूर्व जीत हासिल कर सत्ता में आए थे। उनके नाम की धमक ऐसी थी कि माना जा रहा था कि दिल्ली का विधानसभा चुनाव एक तरफा होगा और बीजेपी इस चुनाव में अप्रत्याशित जीत दर्ज करेगी। विधानसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रुप देने के लिए आज की ही तरह दिसंबर 2014 के एक रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलीला मैदान से भाषण दिया और कहा कि कुछ लोग अराजक हैं, वे देश के संवेधानिक संस्थाओं में भरोसा नहीं करते हैं (क्योंकि अरविंद केजरीवाल लोकपाल के आंदोलन को प्रमुखता से चला रहे थे और संवैधानिक प्रमुखों को भी इसके दायरे में लाने की बात कर रहे थे)। ऐसे लोगों को जनता को जंगल में भेज देना चाहिए। वहीं जो लोग (बीजेपी की तरफ इशारा करते हुए) शासन करने योग्य हैं उनको सत्ता में बैठाइये जिससे वे आपके (दिल्ली वालों) विकास के लिए काम कर सकें।
भीड़ इकट्ठा नहीं कर पाई थी भाजपा
वर्ष 2014 की प्रधानमंत्री की रैली में लोगों के लिए यह अचरज वाली बात थी कि लोकसभा चुनाव में अभूतपूर्व जीत हासिल कर सत्ता में आए नरेंद्र मोदी के लिए सजा रामलीला का मैदान बिल्कुल खाली था। रैली के आयोजकों ने बाद में कम भीड़ के लिए एक दिन पहले हुई बारिश और उसके चलते बढ़ी ठंड को जिम्मेदार ठहराया था।
शायद उसी गलती से सीख लेते हुए इस बार दिल्ली भाजपा ने भीड़ इकट्ठी करने के लिए कमर कस ली थी। इस बार रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुनने के लिए लाखों लोगों की भीड़ जुटी। भीड़ नरेंद्र मोदी के भाषणों पर बार-बार ताली बजाकर और नारे लगाकर प्रतिक्रिया भी दे रही थी। रामलीला मैदान भरने के साथ-साथ भारी संख्या में लोग सड़कों पर भी खड़े रह गए थे क्योंकि उन्हें मैदान में जगह नहीं मिली।
कितना बदला है समीकरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल आज दोनों ही वर्ष 2014 की स्थिति में नहीं हैं। बीजेपी ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित जीत भले ही जीत दर्ज की हो, लेकिन मौजूदा समीकरण उसके खिलाफ बताए जा रहे हैं। हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में बीजेपी के पासे उलटे पड़े हैं।
झारखंड के चुनाव परिणाम भी सोमवार 23 दिसंबर को आने वाले हैं जहां पार्टी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं होने की भविष्यवाणी कुछ सर्वे अभी से करने लगे हैं। वहीं अरविंद केजरीवाल की लोकप्रिय योजनाओं ने भी एक वर्ग को उनसे जोड़ दिया है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के लिए दिल्ली के समर में चुनौती कड़ी मानी जा रही है।
वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए भी परिस्थितियां वर्ष 2014-15 वाली नहीं हैं। आज उनके ऊपर उनके अपने कहे की अपेक्षाओं पर खरे उतरने का बोझ है। जनता उनके कामों और वायदों पर कितना भरोसा करती है, उनका भविष्य बहुत कुछ उसी पर निर्भर करेगा। फिलहाल हमें इसके लिए चुनाव घोषित होने और उसका परिणाम आने तक का इंतजार करना पड़ेगा।
अरविंद केजरीवाल की राह की मुश्किलें लगातार मजबूत होती कांग्रेस ने भी बढ़ा दी हैं। अनेक विधानसभा चुनावों में वापसी करती दिखी कांग्रेस लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को पछाड़ने में कामयाब रही थी। देश के मौजूदा हालात में अगर अल्पसंख्यक मतदाता ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अगर कांग्रेस पर भरोसा बनाए रखा तो अरविंद केजरीवाल की राह कठिन हो सकती है।
पिछले चुनाव में क्या हुआ था
वहीं, दिल्ली की सत्ता पर लगातार तीन बार राज कर चुकीं शीला दीक्षित को भी केजरीवाल की लहर में हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस शून्य सीट पर सिमट गई।
आप ने क्या कहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण समाप्त होते ही आम आदमी पार्टी से स्वाभाविक रुप से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि जनता को कच्ची कालोनियों को पक्का करने का वायदा किया गया था। लेकिन अब तक एक भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है।उन्होंने कहा कि वे काम करते रहे हैं और आगे भी काम करते रहेंगे और लोगों को रजिस्ट्री उपलब्ध करवाएंगे। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि बीजेपी ने सौ रजिस्ट्री करने के दावे किये थे। लेकिन आज तक एक भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। इसी से साबित होता है कि बिना काम किए प्रधानमंत्री श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं।