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OPS in CAPF: क्या सरकार केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में लागू करेगी पुरानी पेंशन, अगले 72 घंटे क्यों हैं बेहद अहम?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 04 Mar 2023 06:32 PM IST
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सार
OPS in CAPF: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अभी तक इस दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को लागू करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। संसद सत्र के दौरान भी वित्त मंत्रालय से यह सवाल पूछा गया था कि यह फैसला कब लागू होगा। उसके जवाब में कहा गया है कि यह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है...
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Will centre follow delhi high court decision to implement OPS in CAPF
OPS in CAPF - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 'पुरानी पेंशन' लागू करने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया था, केंद्र सरकार को होली तक उसका पालन करना है। वह अवधि 72 घंटे बाद खत्म हो रही है। यानी होली पर यह मालूम हो जाएगा कि केंद्र सरकार, इन बलों में पुरानी पेंशन लागू करने को लेकर क्या रूख अपनाती है। क्या केंद्र सरकार, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी या 10 लाख से अधिक की संख्या वाले केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को होली पर 'ओपीएस' बहाली का तोहफा दिया जाएगा। कन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियरस वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन एवं पूर्व एडीजी 'सीआरपीएफ' एचआर सिंह कह चुके हैं, अगर केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में जाती है तो 'पैरामिलिट्री परिवार', पीएम आवास का घेराव करेंगे।

हाई कोर्ट ने एनपीएस को क्या था स्ट्राइक डाउन

दिल्ली हाई कोर्ट ने 11 जनवरी को दिए अपने एक एतिहासिक फैसले में 'सीएपीएफ' को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' माना है। इन बलों में लागू 'एनपीएस' को स्ट्राइक डाउन करने की बात कही गई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा था, चाहे कोई आज इन बलों में भर्ती हुआ हो, पहले कभी भर्ती हुआ हो या आने वाले समय में भर्ती होगा, सभी जवान और अधिकारी, पुरानी पेंशन स्कीम के दायरे में आएंगे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अभी तक इस फैसले को लागू करने बाबत कोई निर्णय नहीं लिया है। संसद सत्र के दौरान भी वित्त मंत्रालय से यह सवाल पूछा गया था कि यह फैसला कब लागू होगा। उसके जवाब में कहा गया है कि यह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। विपक्षी दलों के कई सांसदों ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस फैसले का पालन करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया था।

एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने बताया, दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सुनाए गए एतिहासिक पैरामिलिट्री पुरानी पेंशन बहाली के आदेश पर केंद्र सरकार ने संशय की स्थिति बना रखी है। आखिर इन जवानों को पेंशन से वंचित क्यों रखा जा रहा है। देश में आतंकवाद, माओवादी घटनाएं, कानून व्यवस्था, प्राकृतिक आपदा, वीआईपी सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव, ऐसे सभी कार्यों में सीएपीएफ ने अपना लोहा मनवाया है। इन बलों में दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला लागू करने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय मौन है। इस वजह से लाखों पैरामिलिट्री परिवारों में बैचेनी व रोष व्याप्त है। एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह राणा ने कहा, 40 साल की राष्ट्र सेवा के बाद जब सीएपीएफ के जवान बाजार भरोसे नई पेंशन नीति के तहत घर आएगा, तो उनका बुढ़ापा कैसे कटेगा। पैरामिलिट्री परिवार अब प्रधानमंत्री मोदी की तरफ आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि होली पर पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा कर प्रधानमंत्री मोदी, अपने सरहदी चौंकीदारों को रंगों से सराबोर करेंगे।

अभी तक कोई दिशा निर्देश नहीं

हाल ही में 14 फरवरी को अलग-अलग राज्यों से आए सैंकड़ों पूर्व अर्धसैनिकों ने ओपीएस, ओआरओपी, ओजीएएस व अन्य भलाई संबंधित मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर शांति पूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन किया था। सीएपीएफ में अब ऐसे आवेदन आ रहे हैं, जिनमें इस फैसले को लागू करने की मांग हो रही है। आवेदकों से कहा जा रहा है कि अभी दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए केंद्र सरकार/गृह मंत्रालय से कोई भी दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। जब भी वहां से कोई गाइडलाइंस आएगी, तभी उनका आवेदन, अदालत के आदेश के मुताबिक डील होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अभी तक इस फैसले को लागू करने बाबत कोई निर्णय नहीं लिया है। एसोसिएशन के मुताबिक, केंद्र सरकार इस फैसले को लागू करने के मूड में नहीं दिख रही। दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी हो रही है। अगर केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट जाती है, तो एसोसिएशन द्वारा बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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