{"_id":"58d855894f1c1bee5e1a1327","slug":"why-not-change-notes-by-march-31-rbi-refused-to-answer","type":"story","status":"publish","title_hn":"31 मार्च तक नोट बदलने की इजाजत क्यों नहीं, RBI का जवाब देने से इनकार","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
31 मार्च तक नोट बदलने की इजाजत क्यों नहीं, RBI का जवाब देने से इनकार
amarujala.com, presented by- संदीप भ्ाट्ट
Updated Mon, 27 Mar 2017 08:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रिजर्व बैंक ने इस बात का जवाब देने से इनकार कर दिया है कि भारतीयों को 31 मार्च तक 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बदलने की इजाजत क्यों नहीं दी गई। आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी का ऐलान करते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मार्च तक नोट बदली का समय दिए जाने की बात कही थी।
सूचना के अधिकार के तहत आरबीआई से यह जानकारी मांगी गई थी। इस पर केंद्रीय बैंक ने कहा कि पारदर्शिता कानून के तहत यह सवाल ‘सूचना’ की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आता। दरअसल, पीएम द्वारा आश्वासन दिए जाने के बावजूद बाद में यह फैसला किया गया कि 31 मार्च तक केवल प्रवासी भारतीयों के पुराने नोट बदले जाएंगे। ऐसा माना जाता है कि प्रवासी भारतीयों में सत्तारूढ़ भाजपा का जनाधार ज्यादा है।
पुराने नोट जमा करने की समयसीमा के बारे में सुप्रीम कोर्ट इस समय सुनवाई कर रहा है। कथित तौर पर अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने वहां कहा है कि प्रधानमंत्री के शब्दों का कानूनन पालन होगा। रिजर्व बैंक ने नोट बदलने की सुविधा 31 मार्च तक केवल प्रवासी भारतीयों तक सीमित करने के फैसले से संबंधित फाइल की नोटिंग के बारे में भी कुछ बताने से मना कर दिया। उसने कहा कि यह देश के आर्थिक हित के खिलाफ होगा।
विज्ञापन
आरटीआई आवेदन में 31 मार्च तक भारतीयों के लिए पुराने नोट बदलने की अनुमति नहीं देने के कारण के बारे में जानकारी मांगी गई थी। केंद्रीय जन सूचना अधिकारी सुमन रे ने कहा कि जो सूचना मांगी गई है, वह आरटीआई कानून की धारा 2 (एफ) के तहत नहीं आती। पूर्व सूचना अधिकारी शैलेष गांधी ने कहा कि आरटीआई कानून की धारा 8 (2) के तहत अगर जानकारी व्यापक रूप से जनहित में है तो उसके खुलासे से छूट होने पर भी उसे सार्वजनिक करने की अनुमति है।
विज्ञापन
सूचना के अधिकार के तहत आरबीआई से यह जानकारी मांगी गई थी। इस पर केंद्रीय बैंक ने कहा कि पारदर्शिता कानून के तहत यह सवाल ‘सूचना’ की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आता। दरअसल, पीएम द्वारा आश्वासन दिए जाने के बावजूद बाद में यह फैसला किया गया कि 31 मार्च तक केवल प्रवासी भारतीयों के पुराने नोट बदले जाएंगे। ऐसा माना जाता है कि प्रवासी भारतीयों में सत्तारूढ़ भाजपा का जनाधार ज्यादा है।
विज्ञापन
पुराने नोट जमा करने की समयसीमा के बारे में सुप्रीम कोर्ट इस समय सुनवाई कर रहा है। कथित तौर पर अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने वहां कहा है कि प्रधानमंत्री के शब्दों का कानूनन पालन होगा। रिजर्व बैंक ने नोट बदलने की सुविधा 31 मार्च तक केवल प्रवासी भारतीयों तक सीमित करने के फैसले से संबंधित फाइल की नोटिंग के बारे में भी कुछ बताने से मना कर दिया। उसने कहा कि यह देश के आर्थिक हित के खिलाफ होगा।
विज्ञापन
आरटीआई आवेदन में 31 मार्च तक भारतीयों के लिए पुराने नोट बदलने की अनुमति नहीं देने के कारण के बारे में जानकारी मांगी गई थी। केंद्रीय जन सूचना अधिकारी सुमन रे ने कहा कि जो सूचना मांगी गई है, वह आरटीआई कानून की धारा 2 (एफ) के तहत नहीं आती। पूर्व सूचना अधिकारी शैलेष गांधी ने कहा कि आरटीआई कानून की धारा 8 (2) के तहत अगर जानकारी व्यापक रूप से जनहित में है तो उसके खुलासे से छूट होने पर भी उसे सार्वजनिक करने की अनुमति है।