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मुसलमानों को इसलिए टिकट नहीं देती है बीजेपी ?

Wed, 25 Jan 2017 01:00 PM IST
समीरात्मज मिश्र / लखनऊ से बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
समीरात्मज मिश्र / लखनऊ से बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए Updated Wed, 25 Jan 2017 01:00 PM IST
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Why BJP do not take to Muslims?
उत्तर प्रदेश बीजेपी में टिकट बंटवारे को लेकर इस समय घमासान मचा हुआ है। आरोप हैं कि टिकट बंटवारे में दूसरी पार्टियों से आने वालों और बड़े नेताओं के रिश्तेदारों को जमकर टिकट बांटे गए हैं। यही नहीं, कथित तौर पर बाहुबलियों से लेकर रईस लोगों तक को टिकट दिए गए।
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यानी टिकट बँटवारे में जाति, क्षेत्र और समुदाय जैसे समीकरणों को लेकर भी खूब गुणा भाग किया गया लेकिन 371 सीटों पर बीजेपी को अल्पसंख्यक समुदाय से एक भी उम्मीदवार टिकट मिलने की योग्यता नहीं साबित कर पाया, ये थोड़ा हैरान करने वाला है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा की भारी जीत हुई। खास तौर पर यूपी से। यहां से भाजपा को 72 सीटें मिलीं। लेकिन सत्ताधारी पार्टी का एक भी सांसद मुलमान नहीं है। 
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Why BJP do not take to Muslims?
भाजपा में जो इक्का दुक्का मुसलमान चेहरे हैं उनमें मुख़्तार अब्बास नकवी झारखंड से राज्यसभा में पहुंचे हैं और राज्य मंत्री हैं। जबकि शाहनवाज हुसैन बिहार से 2014 का लोकसभा चुनाव लड़कर हार गए। बावजूद इसके ना तो लोकसभा चुनाव में और ना ही विधान सभा चुनाव के उम्मीदवारों में मुसलमान नजर आए। वैसे भी बीजेपी में मुस्लिम समुदाय का आकर्षण बहुत ज्यादा नहीं देखा जाता।

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इस समुदाय के लोगों का पार्टी को बिल्कुल समर्थन न हो और ऐसा भी नहीं है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को पार्टी में महत्वपूर्ण जगह न दी गई हो। पार्टी ने 371 सीटों पर उम्मीदवारों का एलान कर दिया है, क़रीब 20 सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ रही है और अब कुछ ही सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा बची है।

मुस्लिम समुदाय के लोगों को टिकट न देने की वजह पर बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल रशीद अंसारी कहते हैं कि बीजेपी दिखावे वाला काम नहीं करती है, बल्कि 'सबका साथ-सबका विकास' की मूल भावना के साथ काम करती है। 

Why BJP do not take to Muslims?
अंसारी कहते हैं, "यह सही है कि बीजेपी के साथ अभी भी मुस्लिम समुदाय के लोग ज्यादा संख्या में नहीं जुड़े हैं लेकिन टिकट न देने से उसका संबंध नहीं है। सिर्फ़ टिकट देना ही सब कुछ नहीं है बल्कि जो भी जीतकर आएं, वो सबके लिए काम करें, ऐसी हमारी पार्टी की नीति है।" अंसारी ये भी कहते हैं कि कई राज्यों में स्थानीय निकाय के चुनावों में मुस्लिम समुदाय के लोग बीजेपी के टिकट पर लड़े हैं और जीते भी हैं।

उनके मुताबिक कुछ मुसलमानों ने टिकट के लिए आवेदन दिया भी था लेकिन उन्हें शायद जीतने की स्थिति में नहीं पाया गया, इसलिए टिकट नहीं दिया जा सका। जानकारों का भी कहना है कि पार्टी उन्हीं को टिकट देती है जो जीतने की स्थिति में हों और बीजेपी को इस समुदाय से हो सकता है जीतने वाले उम्मीदवार न मिले हों।

लेकिन वरिष्ठ पत्रकार सुनीता ऐरन कहती हैं, बावजूद इसके एक राष्ट्रीय पार्टी को इतने बड़े समुदाय की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। वो कहती हैं, "एक-दो सीट हार भी जाते तो ऐसा कुछ नहीं बिगड़ जाता लेकिन इतने बड़े समुदाय से किसी को टिकट न देना, बीजेपी जैसी पार्टी के राष्ट्रीय स्वरूप पर सवाल उठाता है। 
 
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Why BJP do not take to Muslims?
दरअसल बीजेपी में अभी भी कट्टरवादी सोच वाले लोगों का दबदबा है और मुसलमान उनकी पसंद शायद नहीं हैं।" सुनीता ऐरन कहती हैं कि ख़ुद मोदी कह चुके हैं कि वो मुसलमानों के एक हाथ में क़ुरान और एक हाथ में कंप्यूटर देखना चाहते हैं, फिर भी उनकी पार्टी उन पर इतना भरोसा क्यों नहीं कर पा रही है

कि उन्हें भी जनप्रतिनिधि बना सके। बहरहाल, बीजेपी ने मंगलवार को भी 67 उम्मीदवारों की सूची जारी की जिसमें बीएसपी से आए स्वामी प्रसाद मौर्य को भी टिकट मिल गया। इससे पहले उनके बेटे को भी टिकट दिया जा चुका है।

टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी में कई जगह असंतोष की आवाजे सुनाई दे रही हैं। कई नेताओं ने पार्टी छोड़ने और कई ने तो पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनौती देने और चुनाव लड़ने की भी घोषणा कर रखी है।
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