{"_id":"58000bbb4f1c1b4a2c28e665","slug":"who-advice-india-to-ban-on-sweet-drinks","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार को डब्ल्यूएचओ की नसीहत, मीठे पेय पर लगाएं राजकोषीय प्रतिबंध","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सरकार को डब्ल्यूएचओ की नसीहत, मीठे पेय पर लगाएं राजकोषीय प्रतिबंध
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 14 Oct 2016 04:03 AM IST
विज्ञापन
who
- फोटो : dailymail
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने देश में मोटापा, डायबिटीज जैसी बीमारियों को रोकने के लिए भारत सरकार से चीनी से बने खाद्य व मीठे पेय पदार्थों पर राजकोषीय प्रतिबंध जैसे कर आदि लगाने को कहा है जिससे इन पदार्थों की खपत को कम किया जा सके।
वैश्विक स्वास्थ्य इकाई डब्ल्यूएचओ ने अपनी हालिया जारी रिपोर्ट में भारत को राजकोषीय नीति बनाने को कहा है जिसमें सब्जी और फलों के दामों पर टैक्स में छूट और हानिकारक खाद्य पदार्थों पर टैक्स लगाने की बात कही है। खानपान एवं गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए राजकोषीय नीति नाम की इस रिपोर्ट के अनुसार ऐसे कई मामले देखे गए हैं जिसमें मीठे पेय पदार्थों पर कर ढांचे को तर्कसंगत बनाए जाने से उनके उपभोग में कमी देखी गई है खासकर जब उनकी खुदरा बिक्री की कीमत को 20 प्रतिशत या उससे अधिक तक बढ़ा दिया जाए।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ताजे फलों और सब्जियों पर सब्सिडी उपलब्ध बढ़ाकर उनके दाम 10-30 प्रतिशत तक कम करने से ऐसे स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों की खपत को बढ़ाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वैश्विक स्वास्थ्य इकाई डब्ल्यूएचओ ने अपनी हालिया जारी रिपोर्ट में भारत को राजकोषीय नीति बनाने को कहा है जिसमें सब्जी और फलों के दामों पर टैक्स में छूट और हानिकारक खाद्य पदार्थों पर टैक्स लगाने की बात कही है। खानपान एवं गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए राजकोषीय नीति नाम की इस रिपोर्ट के अनुसार ऐसे कई मामले देखे गए हैं जिसमें मीठे पेय पदार्थों पर कर ढांचे को तर्कसंगत बनाए जाने से उनके उपभोग में कमी देखी गई है खासकर जब उनकी खुदरा बिक्री की कीमत को 20 प्रतिशत या उससे अधिक तक बढ़ा दिया जाए।
विज्ञापन
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ताजे फलों और सब्जियों पर सब्सिडी उपलब्ध बढ़ाकर उनके दाम 10-30 प्रतिशत तक कम करने से ऐसे स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों की खपत को बढ़ाया जा सकता है।
विज्ञापन