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पांचवीं और आठवीं की परीक्षा हो या नहीं, राज्य ही तय करेंगे  

Tue, 25 Oct 2016 10:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली Updated Tue, 25 Oct 2016 10:14 PM IST
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whether to conduct the exam of class V and VIII or not, state will decide
मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर
आठवीं कक्षा तक किसी छात्र को फेल नहीं करने की नीति यानी ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ लागू करने का फैसला अब शायद राज्यों पर छोड़ा जा सकता है। केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (कैब) की मंगलवार को हुई 64वीं बैठक में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के मौजूदा प्रावधान में संशोधन करने का फैसला किया गया। पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा कराई जाए या नहीं, इस पर फैसले का अधिकार राज्यों को सौंपने के लिए मामले को अब कैबिनेट में भेजा जाएगा। हालांकि चौथी कक्षा तक कोई भी छात्र फेल न हो, इसके लिए यह नीति अनिवार्य बनी रहेगी। 
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मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता में हुई कैब की बैठक में ज्यादातर राज्यों की शिकायत थी कि नो डिटेंशन पॉलिसी के कारण छात्रों में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। इन राज्यों ने यह सुझाव भी दिया कि पांचवीं और आठवीं कक्षा की परीक्षाएं होनी चाहिए। बैठक के बाद जावड़ेकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘सहमति बनी कि केंद्र सरकार एक उपयुक्त संशोधन पेश कर सकती है जिसके तहत राज्यों को नो डिटेंशन पॉलिसी की समीक्षा करने की छूट रहेगी।’ 
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बैठक में कई राज्यों ने नो डिटेंशन पॉलिसी के प्रावधान का यह कहते हुए विरोध किया कि इस वजह से छात्रों की शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। इससे पहले कैब की उपसमिति ने भी सिफारिश की थी कि इस नीति की समीक्षा होनी चाहिए। मंत्रालय अब इस नीति की समीक्षा के लिए मामले को कैबिनेट के सामने ला सकता है। बैठक में जावड़ेकर, अन्य केंद्रीय मंत्रियों राजीव प्रताप रूडी, विजय गोयल, महेंद्र नाथ पांडेय और उपेंद्र कुशवाहा सहित 21 राज्यों के शिक्षा मंत्रियों तथा अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। 
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जावड़ेकर ने कहा कि इस बैठक में एक और अहम फैसला किया गया कि शिक्षा का स्तर सुधारा जाएगा और इसे आरटीई का हिस्सा बनाया जाएगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि किसी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे के ज्ञान का स्तर क्या होना चाहिए। बैठक में तय किया गया कि जो राज्य पांचवीं और आठवीं कक्षा में बोर्ड लागू करना चाहते हैं, उन्हें यह अधिकार दिया जाए। लेकिन नो डिटेंशन पॉलिसी लागू करने वाले राज्यों को भी यह छूट मिलती रहे।  इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत देशभर में बच्चियों को स्कूली शिक्षा से जोड़ने के लिए कैब में तेलंगाना के शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में उप समिति गठित की गई है।  


सीबीएसई दसवीं बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता पर विचार शीघ्र 
सीबीएसई के स्कूलों में दसवीं बोर्ड की परीक्षा को अनिवार्य बनाने पर मानव संसाधन मंत्रालय जल्द विचार कर सकता है। जावड़ेकर ने बताया कि फिलहाल कई राज्यों के बोर्ड दसवीं की परीक्षा आयोजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘चूंकि सीबीएसई मानव संसाधन मंत्रालय के अधीन है इसलिए इसमें दसवीं की परीक्षा से संबंधित मामले पर जल्द ही अलग से निर्णय लेंगे। इसमें राज्यों से सहमति की कोई जरूरत नहीं होगी। सीबीएसई स्कूलों में दसवीं बोर्ड परीक्षा जब अनिवार्य करनी होगी तो मंत्रालय उससे पहले एक साल की समय सीमा सबको देगा, ताकि वे अपनी तैयारी कर सकें।’
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