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जब भारत ने 30 मिनट में पाकिस्तान को तोड़कर बनाया अलग राष्ट्र, कराया सबसे बड़ा आत्मसमर्पण

Mon, 14 Aug 2017 11:14 AM IST
amarujala.com- Written by: हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by: हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Mon, 14 Aug 2017 11:14 AM IST
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When India broke Pakistan in 30 minutes, created a separate nation,big surrender
बांग्लादेश युद्ध - फोटो : bbc

साल 1971 की गर्मियों में पूर्वी पाकिस्तान से रोज-रोज बढ़ती शरणार्थियों की संख्या के कारण प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी काफी परेशान चल रही थीं। एक दिन उन्होंने सेनाध्यक्ष जनरल एफएमजे मानकेशा को अपने पास बुलाया और पूछा की, 'सैम भारत की पूर्वी सीमा पर हालात लगातार बिगड़ रहे हैं क्या तुम्हारी सेना वहां हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है। (हस्तक्षेप से इंदिरा का आशय पूर्वी पाकिस्तान पर सैन्य कार्रवाई से था) बेलौस जवाब देने वाले मानेकशा ने तुरंत कहा, नहीं... अभी नहीं।

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इंदिरा ने युद्ध के लिए जोर दिया तो सैम ने सीधा सवाल पूछ लिया, 'मैम क्या आप जंग हारना चाहती हैं।' इंदिरा को इस जवाब की उम्‍मीद नहीं थी। लेकिन सैम ने समझाया कि अभी हमारी सेना जंग के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है आप हमें तैयारी के लिए छह महीने का समय दीजिए... जीत मैं आपको दूंगा। सैम ने जितनी विश्वसनीयता से अपनी बात को रखा इंदिरा उससे पूरी तरह मुतमुइन हो गईं। 
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असल में ये सारा मामला जुड़ा था वर्तमान बांग्लादेश और उस समय के पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना के सामूहिक दमन से, जिसने देश के पूर्वी हिस्से में इंसाानी जुल्मों सितम की इंतहा पार कर दी थी। मार्च के महीने से लेफ्टिनेंट जनरल टीका खान के नेतृत्व में शुरू हुआ पाकिस्तानी सेना का यह रक्तरंजित अभियान पाकिस्तान के विभाजन पर जाकर ही शांत हुआ।
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पाक सेना के खिलाफ उस समय शेख मुजीबुर्रहमान की मुक्ति वाहिनी ने विरोध का बिगुल फूंक रखा था। इसके चलते बांग्लादेश की सड़कों पर रोज कत्लेआम हो रहा था। इस खूनी संघर्ष के कारण बांग्लादेश से हजारों की संख्या में रोज पलायन कर भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में प्रवेश कर रहे थे।

छह महीनों में ही भारत में 10 लाख बांग्लादेशी प्रवेश कर चुके थे। इसके अलावा भारत की पूर्वी सीमा पर भी अस्थिरता बनी हुई थी, इसी को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी परेशान चल रही थीं। काफी सोच विचार कर उन्होंने युद्ध का फैसला किया। जिसको लेकर उन्होंने तत्कालीन सेनाध्यक्ष मानेकशा से विचार विमर्श किया था।

मात्र 13 दिनों में पाकिस्तान ने घुटने टेक दिया

When India broke Pakistan in 30 minutes, created a separate nation,big surrender
बांग्लादेश युद्ध

भारत अपनी तैयारियां पुख्ता कर ही रहा था कि अचानक 3 दिसंबर 1971 की रात पाकिस्तान के हवाई जहाजों ने भारतीय सीमा में गोलाबारी शुरू कर दी। जंग के लिए तैयार बैठी भारतीय सेना को तो मानों जैसे मौका मिल गया, इसके बाद जो हुआ वो इतिहास बन कर रह गया। जनरल मानेकशा के नेतृत्व में भारत ने पलटवार किया तो मात्र 13 दिनों में पाकिस्तान ने घुटने टेक दिया।

भारत की सेना 16 दिसंबर की सुबह ढाका में प्रवेश कर गई। उस युद्ध का हीरो यूं तो जनरल मानेकशा के अलावा लेफ्टिनेंट जनरल जेएस अरोडा को माना जाता है लेकिन असल हीरो थे पूर्वी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब। जिन्होंने मात्र 3 हजार सैनिकों के साथ अपने अदम्य साहस और बेजोड़ रणनीति से लेफ्टिनेंट जनरल एके नियाजी के नेतृत्व वाली पाकिस्‍तानी सैनिकों को घुटने पर मजबूर कर दिया।

जिस समय जनरल जैकब ढाका में घुसे उस समय भी उनके सामने नियाजी के तीस हजार सैनिक थे, लेकिन वो जैकब के चंगुल में ऐसे फंसे की 30 मिनट में ही घुटने टेकने को मजबूर हो गए। इसके बाद ‌पूर्वी पाकिस्तान में मौजूद कुल 90 हजार सैनिकों के साथ जनरल नियाजी ने भीगी आंखों के साथ आत्मसमर्पण के कागजातों पर दस्तखत किए।

इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा आत्मसर्पण माना गया। इस घटना के साथ ही दुनिया के नक्‍शे पर एक नए मुल्क बांग्लादेश का उदय हुआ और इसकी बागडोर संभाली मुक्ति सेना के महान योद्धा शेख मुजीबुर्रहमान ने। इतिहास में इस घटना को भारत की बढ़ती ताकत 
और उसकी महानता के तौर पर दर्ज किया गया। 

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