हैदराबाद कांड: क्या होता है पुलिस एनकाउंटर, जानें कैसे होती है इसकी जांच
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हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ हैवानियत करने वाले चारों आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। तेलंगाना पुलिस के अनुसार आरोपियों को राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्ट करने के लिए ले जाया गया था। इस दौरान आरोपियों ने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने उनपर गोलियां चला दीं। इस मुठभेड़ में चारों आरोपियों की मौके पर ही मौत हो गई।
तेलंगाना पुलिस द्वारा किए गए इस एनकाउंटर की पूरे देश में चर्चा हो रही है। कई लोगों ने जहां इसपर प्रसन्नता व्यक्त की है वहीं कई लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं।
कम लोगों को पता होता है कि पुलिस द्वारा किए गए किसी भी मुठभेड़ या एनकाउंटर के बाद एक तय प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है। इस संबंध में साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने एक गाइड लाइन भी जारी की थी।
कब किया जाता है एनकाउंटर?
अधिकतर एनकाउंटर दो मौकों पर किए जाते हैं। पहला, जब आरोपी या अपराधी के पास घातक शस्त्र हों और वह पुलिस पर हमला कर रहा हो। वहीं दूसरे मामले में आरोपी या अपराधी पुलिस के गिरफ्त से भागने की कोशिश करे। इस दौरान पुलिस के पास गोली चलाने के सिवाय कोई भी उपाय न बचा हो तब पुलिस एनकाउंटर कर सकती है।
पुलिस द्वारा चेतावनी देना जरूरी
किसी भी अपराधी के खिलाफ घातक हथियारों जैसे बंदूक-बम का प्रयोग करने से पहले पुलिस या सुरक्षाबलों के द्वारा चेतावनी देना जरूरी होता है। इस दौरान पुलिस अपराधी या आरोपी को डराने के लिए हवाई फायर का प्रयोग भी कर सकती है। इसके बाद भी अगर वह नहीं रुकता है तब पुलिस उसके ऊपर फायर कर सकती है। शुरूआत में पुलिस को कमर के नीचे गोली चलाना जरूरी होता है। लेकिन, अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर निकल जाए तो कमर के ऊपर भी गोली मारी जा सकती है।
एनकाउंटर की जांच जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में पुलिस एनकाउंटरों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया था। पुलिस मुठभेड़ के सभी मामलों की जांच सीबीआई या सीआईडी जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।जांच खत्म होने तक इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को प्रमोशन या वीरता पुरस्कार नहीं मिलता।
अदालत के निर्देशों के मुताबिक पुलिस मुठभेड़ के सभी मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) दखल नहीं देगा, जब तक इस बात की पूरी आशंका हो कि एनकाउंटर फर्जी था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देश
- एनकाउंटर के बाद मामले की एफआईआर दर्ज की जाएगी जो इलाके से संबंधित कोर्ट भेजी जाएगी।
- जांच राज्य की सीआईडी, दूसरे पुलिस स्टेशन या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाएगी जो पूरी तरह वैज्ञानिक, अच्छी तरह दस्तावेज आधारित और निर्णायक जांच रिपोर्ट तैयार करेगी।
- यह जांच पुलिस अधीक्षक रैंक का अधिकारी करेगा।
- एनकाउंटर से पहले किस तरह पुलिस टीम को जानकारी मिली, ये पुलिस डायरी में दर्ज करना होगा या किसी डिजिटल फार्म में होगा। अगर किसी हाई अथॉरिटी से सूचना मिली हो तो वो भी दर्ज होना चाहिए।
- एनकाउंटर में घायल लोगों को जल्द मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- एनकाउंटर के बाद इसकी मजिस्ट्रेट स्तर की जांच कराई जाए। यह रिपोर्ट इलाके के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को भेजी जाएगी।
- एनकाउंटर में इस्तेमाल हथियारों को पुलिस टीम सील करेगी और जांच के लिए फोरेंसिक और बैलेस्टिक लैब भेजेगी।
- मारे गए लोगों के पोस्टमार्टम के लिए दो डॉक्टरों की टीम होगी और हो सके तो एक जिला अस्पताल का प्रमुख डॉक्टर हो।
- जब तक जांच पूरी नहीं होती, एनकाउंटर में शामिल पुलिस टीम को बारी से पहले प्रमोशन नहीं मिलेगी।