महाराष्ट्र: हाई कोर्ट का भाजपा विधायक से सवाल, स्पीकर के चुनाव में सीएम का राज्यपाल को सलाह देना गलत क्यों?
महाराष्ट्र विधानसभा में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए विधायक नियमों के नियम 6 और 7 में पिछले साल दिसंबर में किए गए संशोधनों को जनहित याचिका द्वारा चुनौती दी गई है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भाजपा विधायक गिरीश महाजन और एक अन्य याचिकाकर्ता से पूछा कि वे बताएं कि क्या संवैधानिक रूप से यह गलत है कि राज्य के नियमों में मुख्यमंत्री को महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के संबंध में राज्यपाल को सलाह देने का प्रावधान है। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता महाजन और जनक व्यास, जिन्होंने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि इस तरह की प्रक्रिया ने संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन कैसे किया। पीठ ने याचिकाकर्ताओं से यह भी पूछा कि अदालत को विधायी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए।
मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी सलाह देने में क्या गलत है?
अदालत ने कहा, क्या संविधान मुख्यमंत्री को कैबिनेट की सहायता के बिना राज्यपाल को सलाह देने से रोकता है? मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी सलाह देने में क्या गलत है? आखिरकार, मुख्यमंत्री की सिफारिशों पर कैबिनेट भी गठित की जाती है। जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात आती है तो हम निश्चित रूप से नागरिकों के अधिकारों के संरक्षक होंगे। लेकिन हमें विधायी मामलों में हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए जब तक कि कोई गंभीर उल्लंघन न हो? यह एक अच्छा संदेश नहीं देता है। स्पीकर के चयन का तरीका क्या होना चाहिए, क्या यह अदालत को तय करना चाहिए?
महाजन और व्यास द्वारा अधिवक्ता महेश जेठमलानी और अभिनव चंद्रचूड़ के माध्यम से दायर जनहित याचिका, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए विधायक नियमों के नियम 6 और 7 में पिछले साल दिसंबर में किए गए संशोधनों को चुनौती देती है। जनहित याचिकाओं में दावा किया गया है कि ये संशोधन ऐसे चुनावों पर राज्यपाल को सलाह देने के लिए अकेले मुख्यमंत्री को शक्ति देते हैं। चंद्रचूड़ ने अदालत को सूचित किया कि देश के कई राज्य कैबिनेट और मुख्यमंत्री को इन पदों के लिए राज्यपाल को सलाह देने का प्रावधान करते हैं।
जनहित याचिकाओं में कहा गया है कि महाराष्ट्र द्वारा लाए गए संशोधन मनमाने और असंवैधानिक है। चंद्रचूड़ ने कहा कि मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के बिना एक व्यक्ति स्वयं कार्य नहीं कर सकता है। एक व्यक्ति के पास एकमात्र अधिकार नहीं हो सकता है। राज्य के वकील महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने दोनों जनहित याचिकाओं का विरोध किया और कहा कि वे विचारणीय नहीं हैं। कुंभकोनी ने तर्क दिया कि यदि विधायक महाजन व्यक्तिगत रूप से संशोधनों से व्यथित हैं, तो उन्हें एक रिट याचिका दायर करनी चाहिए थी न कि एक जनहित याचिका।
एमवीए नेताओं ने की राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात
महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के नेताओं ने शुक्रवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की और उनसे 9 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के कार्यक्रम को मंजूरी देने का आग्रह किया। राज्य विधानसभा का बजट सत्र 3 मार्च से शुरू हुआ और 25 मार्च तक जारी रहेगा।
एमवीए नेताओं के प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री अजीत पवार, पीडब्ल्यूडी मंत्री अशोक चव्हाण, उद्योग मंत्री सुभाष देसाई, शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, परिवहन मंत्री अनिल परब, गृह राज्य मंत्री सतेज पाटिल, राज्य कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले और राज्य राकांपा अध्यक्ष और जल संसाधन मंत्री जयंत पाटिल शामिल थे। इन्होंने यहां राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए भुजबल ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को नौ मार्च को स्पीकर के चुनाव के कार्यक्रम के बारे में सूचित किया।