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Hindi News ›   India News ›   What is Birth and Death Registration Bill and what are its provisions, why did Owaisi call it backdoor NRC

Registration of Births and Deaths Bill: जन्म-मृत्यु पंजीकरण विधेयक क्या है, ओवैसी ने इसे बैकडोर NRC क्यों कहा?

Wed, 02 Aug 2023 08:05 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 02 Aug 2023 08:05 PM IST
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सार
Registration of Births and Deaths Amendment Bill 2023: एक अगस्त को लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2023 पारित हो गया। नया कानून बनने से कई मामलों में जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग अनिवार्य होगा। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने चिंता जताई है कि लोगों को इस दस्तावेज के बिना कल्याणकारी योजनाओं और शिक्षा से वंचित करना असंवैधानिक हो सकता है। 
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What is Birth and Death Registration Bill and what are its provisions, why did Owaisi call it backdoor NRC
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक लोकसभा से पारित हो गया दिया। हालांकि, विधेयक पर कई विपक्षी सांसदों ने विरोध दर्ज कराया है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल को बैक-डोर एनआरसी करार दिया। 


विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के लिए एक व्यापक डेटाबेस बनाना बताया गया है। कानून बनने से पहले इसके प्रावधानों को लेकर कई विपक्षी नेता सवाल खड़े कर रहे हैं। लिहाजा जानना जरूरी है कि आखिर लोकसभा में पास हुआ जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक क्या है? इसमें क्या प्रावधान किए गए हैं? इसको लेकर विपक्षी दलों की आपत्ति क्या है? विधेयक पर सरकार का क्या कहना है? 

संसद भवन
संसद भवन - फोटो : पीटीआई
लोकसभा में पास हुआ जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक क्या है? 
एक अगस्त को संसद के निचले सदन लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2023 पारित हो गया। वर्तमान में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के जरिए जन्म और मृत्यु के पंजीकरण किया जाता है। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है। इसका मतलब है कि संसद और राज्य विधानसभाएं दोनों इस विषय पर कानून बनाने के लिए सक्षम हैं। 2019 तक, जन्म के पंजीकरण का राष्ट्रीय स्तर 93 फीसदी था और मृत्यु पंजीकरण 92 फीसदी था। विधि आयोग (2018) ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में विवाह पंजीकरण को शामिल करने की सिफारिश की थी।  

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2023 पांच दशक से भी ज्यादा पुराने अधिनियम में संशोधन करना चाहता है। इसे 26 जुलाई को संसद के निचले सदन लोकसभा में पेश किया गया था।  

जन्म मृत्यु पंजीकरण कार्यालय के बाहर खड़े आवेदक
जन्म मृत्यु पंजीकरण कार्यालय के बाहर खड़े आवेदक - फोटो : अमर उजाला
जन्म और मृत्यु का पंजीकरण तो अभी भी हो रहा है, नए बिल में अलग क्या है?
नया कानून बनने से कई मामलों में जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग अनिवार्य होगा। इससे ऐसे सभी मामलों में किसी व्यक्ति की उम्र और जन्म स्थान निर्धारित करने के लिए इसे एकमात्र मान्य प्रमाण के रूप में माना जाएगा। जन्म प्रमाण पत्र न होने का मतलब यह होगा कि कोई व्यक्ति वोट नहीं दे सकता, या स्कूल में प्रवेश, शादी या सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकता। 

कानून लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र एक ऐसा जरूरी दस्तावेज होगा जिसके जरिए सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। नए कानून से देश में जन्म तिथि और जन्म स्थान को साबित करने के लिए तमाम दस्तावेजों को दिखाने से बचा जा सकेगा। किसी भी बच्चे के जन्म के पंजीकरण के लिए अभिभावकों का आधार अनिवार्य होगा। आज के जमाने में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र को ऑनलाइन तरीके से ले सकते हैं जबकि पहले इसकी हार्ड कॉपी ही मिल पाती थी। 

असदुद्दीन ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : अमर उजाला
इसको लेकर विपक्षी दलों की आपत्ति क्या है?
विपक्षी नेताओं ने चिंता जताई कि लोगों को कल्याणकारी अधिकारों और शिक्षा से वंचित करना असंवैधानिक हो सकता है। साथ ही कहा गया है कि आधार लिंक को अनिवार्य बनाना सुप्रीम कोर्ट के 2017 के फैसले के विपरीत हो सकता है जिसने निजता को मौलिक अधिकार करार दिया था। 

एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल को बैक-डोर एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स) बताते हुए सरकार पर दखलंदाजी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, 'यह बिल निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। यह पिछले दरवाजे से एनआरसी है और यह असंवैधानिक है।'

वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गोपनीयता का हवाला देते हुए इसका विरोध किया था। उन्होंने निजता के अधिकार का उल्लंघन और शक्तियों के पृथक्करण के अधिकार का उल्लंघन समेत कई मुद्दों पर आपत्ति जताई थी। बहुजन समाज पार्टी की सांसद संगीता आजाद और शिवसेना के राहुल शेवाले ने विधेयक का समर्थन किया।

लोकसभा में बिल पेश करते केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय
लोकसभा में बिल पेश करते केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय - फोटो : अमर उजाला
इस पर सरकार का क्या कहना है?
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, 'इस बिल में कोई संदेह नहीं है। हम जनता के लिए अपनी सेवाओं में और देरी नहीं चाहते हैं। एक डिजिटल डेटाबेस तैयार करने के लिए, हम इसे लेकर आए हैं। हमने जनता की राय के लिए मसौदा भी रखा है और हमने सुझावों को शामिल किया है। 

मंत्री ने यह भी कहा कि कानून में 1969 के बाद से संशोधन नहीं किया गया है और तकनीकी प्रगति के साथ कानून को नागरिकों के लिए और अधिक अनुकूल बनाने की आवश्यकता है।

नगर निगम में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लगी लोगों की भीड़
नगर निगम में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लगी लोगों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
विधेयक में और क्या-क्या प्रावधान हैं?
जन्म और मृत्यु का डेटाबेस: अधिनियम में भारत के रजिस्ट्रार-जनरल की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है जो जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के लिए सामान्य निर्देश जारी कर सकता है। विधेयक में कहा गया है कि रजिस्ट्रार जनरल पंजीकृत जन्म और मृत्यु का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाए रखेगा। मुख्य रजिस्ट्रार (राज्यों द्वारा नियुक्त) और रजिस्ट्रार (स्थानीय क्षेत्राधिकार के लिए राज्यों द्वारा नियुक्त) पंजीकृत जन्म और मृत्यु के डेटा को राष्ट्रीय डेटाबेस में साझा करने के लिए बाध्य होंगे। मुख्य रजिस्ट्रार राज्य स्तर पर एक समान डेटाबेस बनाए रखेगा।

इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र: अधिनियम में प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति जन्म और मृत्यु के रजिस्टर में किसी भी जानकारी के लिए रजिस्ट्रार द्वारा खोज करवा सकता है और किसी भी जन्म या मृत्यु से संबंधित रजिस्टर से जानकारी का सार हासिल कर सकता है। विधेयक में पुराने कानून में संशोधन करके सार के बजाय जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र (इलेक्ट्रॉनिक या अन्य) प्राप्त करने का प्रावधान किया गया है।

माता-पिता और सूचना देने वालों का आधार विवरण: अधिनियम के अनुसार कुछ व्यक्तियों को जन्म और मृत्यु की रिपोर्ट रजिस्ट्रार को देनी होगी। उदाहरण के लिए, जिस अस्पताल में बच्चा पैदा हुआ है, उसके प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को जन्म की रिपोर्ट देनी होगी। विधेयक में कहा गया है कि, जन्म के मामलों में निर्दिष्ट व्यक्तियों को माता-पिता और सूचना देने वाले का आधार नंबर भी प्रदान करना होगा। 

कनेक्टिंग डेटाबेस: बिल में कहा गया है कि राष्ट्रीय डेटाबेस को अन्य डेटाबेस तैयार करने या बनाए रखने वाले अन्य अधिकारियों को उपलब्ध कराया जा सकता है। ऐसे डेटाबेस में जनसंख्या रजिस्टर, मतदाता सूची, राशन कार्ड और अधिसूचित कोई अन्य राष्ट्रीय डेटाबेस शामिल हैं। राष्ट्रीय डेटाबेस के उपयोग को केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए। इसी प्रकार, राज्य डेटाबेस को राज्य सरकार की मंजूरी के साथ अन्य राज्य डेटाबेस से जुड़े अधिकारियों को उपलब्ध कराया जा सकता है।

जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग: विधेयक में कानून के लागू होने के बाद या उसके बाद पैदा हुए व्यक्तियों के जन्म की तारीख और स्थान को साबित करने के लिए जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के उपयोग की आवश्यकता है। जानकारी का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जाएगा जैसे- किसी शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश, मतदाता सूची तैयार करना, सरकारी पद पर नियुक्ति और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कोई अन्य उद्देश्य।

अपील प्रक्रिया: रजिस्ट्रार या जिला रजिस्ट्रार की किसी कार्रवाई या आदेश से असहमत कोई भी व्यक्ति क्रमशः जिला रजिस्ट्रार या मुख्य रजिस्ट्रार के पास अपील कर सकता है। ऐसी अपील ऐसी कार्रवाई या आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर की जानी चाहिए। जिला रजिस्ट्रार या मुख्य रजिस्ट्रार को अपील की तारीख से 90 दिनों के भीतर अपना निर्णय देना होगा।
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