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बंगाल सरकार पर रोहिंग्या शरणार्थियों को बसाने का आरोप, केंद्र सरकार जांच करवाए सच है या झूठ

Thu, 10 May 2018 05:26 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, कोलकाता
ब्यूरो, अमर उजाला, कोलकाता Updated Thu, 10 May 2018 05:26 AM IST
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West Bengal government accused of settling Rohingya refugees

केंद्रीय मंत्री और दार्जिलिंग के भाजपा सांसद एसएस आहलुवालिया ने राज्य सरकार पर रोहिंग्या शरणार्थियों को पर्वतीय क्षेत्र में बसाने का आरोप लगाया है। 

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उन्होंने कहा है कि इससे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ने का अंदेशा है। पीएम मोदी को बीते तीन मई को भेजे एक पत्र में आहलुवालिया ने दावा किया है कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के डेलो, लाना, मेल्ली व रंग्पो इलाके में 320 रोहिंग्या परिवारों को बसाया गया है।
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भाजपा सांसद ने कहा है कि दार्जिलिंग व कालिम्पोंग जिले और डुआर्स इलाका तीन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटा है। यह तीनों सीमाएं काफी हद तक खुली हैं और इस संवेदनशील इलाके में रोहिंग्या शरणार्थियों को बसाने से राष्ट्र की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इससे पहले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के भगोडे़ नेता विमल गुरुंग ने भी प्रधानमंत्री को एक पत्र भेज कर दार्जिलिंग व कालिम्पोंग पर्वतीय क्षेत्र में नए लोगों की संदिग्ध गतिविधियों का जिक्र किया था। 
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उधर, तृणमूल कांग्रेस सरकार के समर्थन वाले गोरखालैंड टेरीटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के प्रशासक बोर्ड के अध्यक्ष विनय तामंग ने आहलुवालिया और विमल गुरुंग के दावों को निराधार करार दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने खुफिया एजेंसियों से इस बात की जांच कर सकती है कि पर्वतीय क्षेत्र में रोहिंग्या लोग रह रहे हैं या नहीं।

रोहिंग्या कैंपों में दी जा रही स्वास्थ्य

West Bengal government accused of settling Rohingya refugees

वहीं केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है और उन्हें स्वास्थ्य, स्वच्छता, चिकित्सा और शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने शीर्ष अदालत को बताया कि 9 अप्रैल के आदेश के अनुसार एक टीम गठित की गई थी जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय के सदस्य और गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल थे। 

टीम ने हरियाणा के मेवात और दिल्ली के कालिंदी कुंज में 23 और 24 अप्रैल को शरणार्थी कैंपों का दौरा किया। मंत्रालय ने बताया कि टीम ने शिविरों में महिलाओं से मुलाकात की और सरकार द्वारा प्रदान की जा रही पानी, चिकित्सा और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण किया।

निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, रोहिंग्याओं को उचित रूप से सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। रोहिंग्या शरणार्थी कैंपों और आसपास के क्षेत्रों के अन्य झुग्गी बस्तियों (भारतीय निवासियों) के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

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