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बंगाल में पहली बार खिला कमल, तमिलनाडु में विजय की आंधी; असम में BJP की हैट्रिक, केरलम में कांग्रेस की वापसी

Tue, 05 May 2026 01:53 AM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 05 May 2026 01:53 AM IST
सार

देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आ चुके हैं। पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा का कमल खिल चुका है। भाजपा ने टीएमसी को पटखनी देते हुए 206 सीटें हासिल की हैं। वहीं, तमिलनाडु में डीएमके को बड़ा सियासी झटका देते हुए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ा दल बनकर उभरी है। हालांकि, बिना गठबंधन के राज्य में विजय की सरकार नहीं बनेगी। 

उधर, असम में भाजपा ने सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में जीत की हैट्रिक लगाई है। असम में एनडीए को 102 सीटें मिली हैं। वहीं, देश में वाम दलों का आखिरी किला कहे जाने वाले केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इधर, पुदुचेरी में एक बार फिर से एनडीए सरकार की वापसी हुई है। सीएम एन रंगासामी के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सरकार बनने जा रही है। 

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West Bengal BJP makes History Tamil Nadu Vijay storm Assam Himanta Sarma Magic Keralam Congress Puducherry NDA
पांचों राज्यों के चुनाव नतीजे घोषित - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में चार मई की तारीख ने नया अध्याय जोड़ दिया। पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने जहां राज्य को भगवा रंग में रंगने का भाजपा-जनसंघ का सात दशक पुराना स्वप्न साकार कर दिया। वहीं तमिलनाडु में लोकप्रिय अभिनेताओं को सिर आंखों पर बिठाने की परंपरा फिर जीवित हो गई और तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय की पहली बार चुनाव में उतरी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम यहां सरकार बनाने जा रही है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एमके स्टालिन तक चुनाव हार गए। इस तरह, विपक्ष के दो बड़े चेहरों को इस चुनाव ने गहरा झटका दिया है।
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असम में भी इतिहास रचते हुए भाजपा और सहयोगी दलों ने लगातार तीसरी बार प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को दक्षिण ने फिर सहारा दिया और उसके नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक गठबंधन ने देश में वाम दलों की आखिरी सरकार को भी विदाई दे दी। पुदुचेरी में उम्मीदों के अनुरूप एनडीए की सरकार बनने जा रही है। तीन राज्यों में जीत मिलने की खुशी में पूरे देश में भाजपा कार्यकर्ताओं ने एकसाथ होली और दिवाली मनाई। कार्यकर्ता जगह-जगह भगवा गुलाल उड़ाते और आतिशबाजी करते दिखे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जीत को कार्यकर्ताओं का समर्पित किया।
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बंगाल में ढहा तृणमूल का किला, 15 साल का ममताराज खत्म
भाजपा की आंधी में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी का किला तिनके की तरह बिखर गया। भाजपा ने 206 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया। बंगाल में सरकार न बना पाने की संघ-भाजपा के नेतृत्व की टीस भी खत्म हो गई।
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जनसंघ के संस्थापकों में शुमार और भाजपा के प्रेरणा-पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी के गृहराज्य पश्चिम बंगाल में आखिर कमल खिल गया। 2011 के विधानसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने वाली भाजपा ने अनथक संघर्ष के जरिये तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। तृणमूल महज 80 सीटों पर सिमट गई, जो पिछले चुनाव में भाजपा की 77 सीटों से सिर्फ तीन अधिक है। भाजपा की ओर से सीएम पद के सबसे सशक्त उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के साथ भवानीपुर सीट पर कांटे के मुकाबले में ममता खुद हार गईं। उनके 20 मंत्री भी हार गए। शुभेंदु भवानीपुर के साथ नंदीग्राम से भी चुनाव जीत गए हैं।

भाजपा की जीत कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, पुरुलिया, झारग्राम व बांकुड़ा में तृणमूल का खाता तक नहीं खुला। उत्तर बंगाल और उसके करीब के जिले भाजपा का गढ़ माने जाते हैं, लेकिन इस बार पार्टी ने दक्षिण बंगाल में शानदार प्रदर्शन किया।

तृणमूल को मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद, दिनाजपुर, मालदा के अलावा उत्तर व दक्षिण 24 परगना जिलों ने सहारा दिया, जहां उसने अधिकांश सीटें जीतीं। जिस सिंगूर में आंदोलन कर ममता ने 15 साल पहले वाम मोर्चे को उखाड़ फेंका था, वह भी भाजपा से हार गईं।

असम में चला हिमंत का जादू, एनडीए को 102 सीटें
असम में भाजपा की जीत को लेकर किसी को कोई संशय नहीं था। सवाल सिर्फ यही था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा कितनी सीटों तक पहुंचाएंगे। राज्य में भाजपा ने पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया है। सहयोगियों को भी दस-दस सीटों पर विजय मिली।

जीत की हैट्रिक लगाने वाली भाजपा ने 126 सदस्यीय विधानसभा में अपने दम पर 82 सीटें जीती हैं, जबकि सहयोगी असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को 10-10 सीटें मिली हैं। इस तरह एनडीए ने 102 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन करते हुए सिर्फ 19 सीटों पर सिमट गई।

मुख्यमंत्री हिमंत के कट्टर विरोधी कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई को जोरहाट सीट पर भाजपा विधायक हितेंद्रनाथ गोस्वामी से 23,181 वोटों से करारी हार मिली। वहीं, बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ को सिर्फ दो सीटें मिलीं। रायजोर दल को दो और तृणमूल कांग्रेस को एक सीट पर जीत मिली है। हिमंत ने जलुकबारी में कांग्रेस के बिदिशा नियोग को 89,434 वोटों से हराया।

तमिलनाडु में द्रविड़ द्वैत खत्म, थलापति की विजय; मगर बिना गठबंधन सरकार नहीं
पश्चिम बंगाल के बाद सबसे बड़ी खबर तमिलनाडु से आई, जहां सुपरस्टार विजय चंद्रशेखर ने दो ध्रुवीय द्रविड़ियन राजनीति को जोरदार पटखनी दी है। मात्र दो साल पुरानी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) को उन्होंने सत्ता की दहलीज पर पहुंचा दिया।

234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके ने 107 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की। वह बहुमत से सिर्फ 11 सीटें दूर है। टीम लीडर यानी थलापति के रूप में प्रसिद्ध विजय की इस जीत ने राज्य में फिर से अभिनेताओं को सत्ता सौंपने की परंपरा जीवित कर दी। टीवीके के शानदार प्रदर्शन के बीच मुख्यमंत्री एमके स्टालिन चुनाव हार गए। स्टालिन को कोलाथुर में टीवीके उम्मीदवार वीएस बाबू ने 8,795 वोटों के अंतर से हराया। हालांकि स्टालिन के बेटे और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि जीत गए। सरकार के 15 मंत्री भी हार गए। अन्नाद्रमुक प्रमुख के पलानीस्वामी ने एडप्पाडी से 98,110 के अंतर से बड़ी जीत हासिल की। टीवीके के बाद द्रमुक दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और उसने 60, जबकि अन्नाद्रमुक ने 47 सीटें जीती हैं।

केरलम में वाम दलों का आखिरी किला भी ढहा; सीएम विजयन जीते, पर 13 मंत्री हारे
देश में वामपंथी दलों का आखिरी किला ढह गया। केरलम में दो चुनाव में जीत हासिल करने वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) को करारी हार मिली है। सीएम पी विजयन ने रविवार रात ही सोशल मीडिया पर सीएम वाला अपना बायो हटा दिया था।

केरलम के मतदाताओं ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) पर भरोसा जताते हुए 140 सदस्यीय विधानसभा में उसे 99 सीटें सौंप दी। केरलम अब देश में कांग्रेस शासित चौथा राज्य हो जाएगा। माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे को 35 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा ने अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 3 सीटें जीती हैं। मुख्यमंत्री पी विजयन ने धर्मदम से कांग्रेसी वीपी अब्दुल रशीद को 19,247 वोटों से हराया। छठे दौर की गिनती तक विजयन पीछे चल रहे थे। विजयन के 21 में से 13 मंत्री चुनाव हार गए। कांग्रेस को अपने दम पर 63 सीटें मिली हैं, जबकि उसके गठबंधन में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, उसने 22 सीटें जीती हैं।

पुदुचेरी में उम्मीदों के अनुरूप एनडीए सरकार की वापसी, टीवीके ने भी खोला खाता
केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी को लेकर किसी को कोई अंदेशा नहीं था। मुख्यमंत्री एन रंगासामी की पार्टी एआईएनआर कांग्रेस के नेतृत्व में एनडीए की जीत तय मानी जा रही है और नतीजों ने इसे सही साबित किया।


तीस सदस्यीय विधानसभा में एआईएनआर कांग्रेस को 12, भाजपा को चार व अन्नाद्रमुक को एक सीट मिली है। पुडुचेरी में लगातार दूसरी बार एनडीए सरकार बनने जा रही है। मुख्यमंत्री रंगासामी ने मंगलम सीट पर द्रमुक के एसएस रंगन को हराया। विपक्षी द्रमुक गठबंधन में द्रमुक को 5 जबकि कांग्रेस को एक सीट मिली है। खास यह है, तमिलनाडु में शानदार जीत हासिल करने वाली टीवीके ने यहां भी खाता खोल लिया। उसे दो सीटें मिली हैं। निर्दलीय व अन्य ने 5 सीटें जीती हैं। अतीत में पुडुचेरी में अक्सर उस पार्टी की जीत होती रही है, जिसकी तमिलनाडु में सरकार हो, पर पिछले दो बार से यह ट्रेंड बदल गया।

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