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लद्दाख: भारतीय सेना का अभिन्न अंग है अमेरिका से खरीदी गईं ये हथियार प्रणालियां
Tue, 30 Jun 2020 01:25 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 30 Jun 2020 01:25 PM IST
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वायुसेना का लड़ाकू विमान (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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संयुक्त राज्य अमेरिका से खरीदी गई हथियार प्रणालियां भारतीय सेना के पॉश्चर का अभिन्न अंग हैं। यह पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना द्वारा किसी भी उकसावे से निपटने के लिए भारत की तैयारियों का एक अभिन्न अंग हैं। यहां पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव जारी है और दोनों ही पूरी तरह से तैयार हैं। इस बात की जानकारी सोमवार को इससे परिचित लोगों ने दी।
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नाम न बताने की शर्त पर एक जानकारी रखने वाले शख्स ने कहा, ‘भारतीय वायुसेना के सी-17 हैवी लिफ्टर्स, अपाचे हेलीकॉप्टर और सी-130 जे विशेष संचालन विमान, भारतीय नौसेना के पी-8 आई निगरानी विमान और भारतीय सेना के एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर- ये ऐसे हथियार और सिस्टम हैं जो भारतीय सेना की स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।’
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दूसरे शख्स ने कहा, ‘वायुसेना का सी-17 ग्लोब मास्टर ट्रांसपोर्ट विमान सैनिकों, टैंक और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल को लाने ले जाने के लिए इस्तेमाल होता है। वहीं सी-130 जे सुपर हरक्युलिस विमान ने सेना के फॉरवर्ड तैनाती को समर्थन करने के लिए दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) क्षेत्र में उड़ान भरी।’
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16,614 फीट पर उत्तर-पूर्वी लद्दाख में डीबीओ हवाई पट्टी दुनिया का सबसे ऊंचा रनवे है और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से आठ किमी दूर स्थित है। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने सेना की गश्त के तरीकों को बाधित करने के उद्देश्य से अपनी आगे की उपस्थिति के साथ डीबीओ के पास डेपसांग मैदानों वाले क्षेत्रों में सेना, हथियार और उपकरण जुटाए हैं।
नौसेना के पी-8आई समुद्री गश्त और टोही विमान का उपयोग लद्दाख क्षेत्र की निगरानी के लिए किया गया है। जबकि उनकी प्राथमिक भूमिका में पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतह रोधी युद्ध, खुफिया, निगरानी, महासागरों की टोह लेना शामिल है। पी-8आई ने 2017 दोकलम गतिरोध के दौरान इसी तरह के निगरानी मिशन को अंजाम दिया।
सुखोई-30 और अपग्रेड किए गए मिग-29 फाइटर जेट्स के अलावा, वायुसेना अपाचे एएच-64ई अटैक हेलीकॉप्टर और सीएच-47एफ चिनूक मल्टी मिशन हेलीकॉप्टर का उपयोग कर रहा है। इन दोनों को ही अमेरिका से आयात किया गया है। किसी भी चीनी उकसावे से निपटने के लिए फॉरवर्ड एयर बेस को अलर्ट पर रखने का आदेश दिया गया है।