Video: सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर IT मंत्री वैष्णव की मास्टर क्लास; व्हाइटबोर्ड पर खींचा देश की तरक्की का खाका
पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को भारत में सेमीकंडक्टर्स और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करने के तहत तीन सेमीकंडक्टर यूनिट्स लगाने को मंजूरी प्रदान की है।
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विस्तार
भारत लगातार विकास की ओर बढ़ रहा है। देश-विदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की सराहना होती रहती है। अब केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि कैसे उनका मंत्रालय प्रधानमंत्री के 'मेक-इन-इंडिया' दृष्टिकोण के अनुरूप भारत में एक सर्व-समावेशी सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए काम कर रहा है।
सौ दिन के अंदर होगा काम शुरू
बता दें, पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को भारत में सेमीकंडक्टर्स और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करने के तहत तीन सेमीकंडक्टर यूनिट्स लगाने को मंजूरी प्रदान की है। अगले 100 दिन के भीतर तीनों यूनिट्स का निर्माण शुरू हो जाएगा।
चार मिनट के वीडियो में मास्टरक्लास
चार मिनट के एक वीडियो में मंत्री ने व्हाइटबोर्ड पर चार्ट बनाकर देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के लिए केंद्र द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'प्रक्रिया में चार मुख्य घटक हैं, डिजाइन फैब्रिकेशन (एफएबी), असेंबली-टेस्टिंग-मार्किंग-पैकेजिंग (एटीएमपी) और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण या सर्किट।' उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर बनाने के लिए सबसे अहम और महंगे उपकरण ईडीए उपकरण हैं, जिसे तीन कंपनियों, कैडेंस, सिनोप्सिस और सीमेंस द्वारा बनाया जा रहा है।
#WATCH | Delhi | During his media interaction after the cabinet approval of 3 more semiconductor units, Union Minister Ashwini Vaishnaw explains the development of India’s semiconductor ecosystem on the whiteboard in his office. pic.twitter.com/D9RHfhAryE
— ANI (@ANI) March 1, 2024
10 से 15 करोड़ रुपये...
कौशल को बढ़ाने और अनुसंधान व विकास के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? यह पूछे जाने पर मंत्री ने बताया, 'सबसे कठिन और सबसे महंगे उपकरण, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन या ईडीए टूल कहा जाता है। इसकी आपूर्ति कैडेन्स, सिनोप्सिस और सीमेंस द्वारा की जाती है। ये बहुत महंगे हैं। यदि आप एक खरीदने जाते हैं, तो आपको सिर्फ एक लाइसेंस के लिए 10 करोड़ से 15 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। इसलिए, हमने इन तीन कंपनियों से बात की है और उनके ईडीए उपकरण लिए हैं और इन्हें देश के 104 विश्वविद्यालयों को दिया है।'
देश में स्टार्टअप्स को बढ़ने में मदद मिलेगी
उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय अब अपने छात्रों को क्लास रूम में इन नए लाइव टूल से परिचित करा सकेंगे और इससे देश में स्टार्टअप्स को बढ़ने में मदद मिलेगी। उसी में से नया टैलेंट निकलेगा और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।मंत्री ने कहा कि यह बहुत बड़ी पहल है। इसलिए इसकी नींव बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'हम दो साल में जो हासिल करने में सक्षम रहे हैं, कई देश पांच साल में ऐसा नहीं कर पाए हैं।'
रोजगार की संभावना
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सेमीकंडक्टर की ये यूनिट्स 20 हजार उन्नत प्रौद्योगिकी कार्यों में प्रत्यक्ष रोजगार और लगभग 60 हजार अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन करेंगी। ये यूनिट्स डाउनस्ट्रीम ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, दूरसंचार विनिर्माण, औद्योगिक विनिर्माण और अन्य सेमीकंडक्टर उपभोक्ता उद्योगों में रोजगार सृजन में तेजी लाएंगी।