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Waqf Bill: कर्नाटक के कांग्रेस MP बोले- वक्फ बिल असांविधानिक; DMK नेता ने श्रीलंका के कच्चातिवु मुद्दे पर घेरा
Thu, 03 Apr 2025 03:32 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 03 Apr 2025 03:32 PM IST
सार
वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका है। राज्यसभा में इस पर चर्चा हो रही है। राज्यसभा में चर्चा के दौरान कर्नाटक से निर्वाचित कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने कहा कि ये विधेयक असांविधानिक है। इसके अलावा तमिलनाडु से निर्वाचित डीएमके सांसद टीआर बालू ने कहा, कच्चातिवु द्वीप को श्रीलंका को सौंपना 'असांविधानिक' फैसला है। सरकार को इसे वापस लेने के लिए कदम उठाने चाहिए।
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कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन और डीएमके नेता टीआर बालू (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
कर्नाटक के कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने संसद में पेश किए गए वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 को असांविधानिक बताया है। उन्होंने कहा कि वक्फ (संशोधन) बिल मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है। भाजपा समाज में सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है। विधेयक को असांविधानिक बताते हुए नासिर हुसैन ने कहा, सत्तारूढ़ पार्टी देश की जनता को गुमराह करने के लिए इस विधेयक का इस्तेमाल कर रही है। राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में शामिल विपक्षी सदस्यों की किसी भी सिफारिश को विधेयक में शामिल नहीं किया गया है। राज्यसभा के अलावा लोकसभा में भी सरकार पर असांविधानिक फैसले लेने के आरोप लगे। तमिलनाडु से निर्वाचित वरिष्ठ DMK नेता टीआर बालू ने श्रीलंका से जुड़े कच्चातिवु द्वीप के मुद्दे पर सरकार को घेरा।
कांग्रेस सांसद ने किन तर्कों के आधार पर वक्फ बिल को असांविधानिक बताया
वक्फ विधेयक के मुद्दे पर सैयद नासिर हुसैन ने कहा कि सरकार ऐसे कानून बनाकर मुसलमानों को दूसरे जर्जे का नागरिक बनाने की ताक में है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में कानून पारित होने के बाद अब सरकार राज्यसभा में भी जबरन इस कानून को थोपने के प्रयास कर रही है।
ये भी पढ़ें- Waqf Bill: 'वक्फ बिल जबरन पारित कराया गया', सोनिया गांधी ने विधेयक को लेकर की गई जल्दबाजी के लिए सरकार को घेरा
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लोकसभा में पुरजोर विरोध के बावजूद सरकार के पास बहुमत
बता दें कि बुधवार को विपक्ष ने लोकसभा में भी चर्चा के दौरान वक्फ विधेयक का पुरजोर विरोध किया था। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए विधेयक की प्रति को प्रतीकात्मक रूप से फाड़ने की बात कही थी। देर रात 1.56 बजे विधेयक पर मतविभाजन हुआ। विधेयक के समर्थन में 288 वोट पड़े, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया और विधेयक पारित हो गया।
ये भी पढ़ें- Waqf Bill in Rajya Sabha: राज्यसभा में सरकार की असल परीक्षा, जानें कैसे NDA-विपक्ष के लिए एक-एक वोट होगा जरूरी
वक्फ विधेयक लोकसभा में कैसे पारित हुआ
बता दें कि लोकसभा में 11 घंटे तक चली चर्चा के बाद रात 1.56 बजे वक्फ संशोधन बिल पारित हुआ। विपक्ष के सभी संशोधन अस्वीकृत हो गए। इसके समर्थन में 288 वोट पड़े, जबकि बिल के विरोध में 232 वोट पड़े। विधेयक पर लंबी चर्चा के अंत में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा का जवाब दिया। रिजिजू ने सांसदों से सर्वसम्मति से इस विधेयक को पारित कराने की अपील करते हुए कहा कि वक्फ से जुड़े सुधारों की मांग लंबे समय से हो रही है, अब सरकार अल्पसंख्यकों के हितों का ध्यान रखते हुए ये कानून बना रही है।
लोकसभा में भी लगे असांविधानिक फैसले के आरोप
राज्यसभा में वक्फ विधेयक के अलावा सरकार पर लोकसभा में भी गंभीर आरोप लगे। डीएमके सांसद टीआर बालू ने कहा कि कच्चातिवु द्वीप को श्रीलंका को सौंपना 'असांविधानिक' है। उन्होंने इस फैसले को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाने को भी कहा। लोकसभा में शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए बालू ने कहा, तमिलनाडु विधानसभा में सीएम एमके स्टालिन की तरफ से पेश प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया है। इसमें केंद्र से कच्चातिवु द्वीप को वापस लेने का आग्रह किया गया है। बता दें कि कच्चतिवु को भारत ने 1974 और 1976 में समझौतों के माध्यम से श्रीलंका को सौंप दिया था।
श्रीलंका को सौंपने पर ऐतराज क्यों
बालू ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा, भारतीय भूमि क्षेत्र को तब तक नहीं सौंपा जाना चाहिए जब तक संसद इसे मंजूरी न दे और इसकी पुष्टि न करे। उन्होंने कहा, कच्चातिवु को 1976 में सौंप दिया गया था... उन्होंने राज्य सरकार या संसद से परामर्श नहीं किया है। संसद की मंजूरी के बिना ऐसा करना असांविधानिक है। इसे जल्दी से जल्दी वापस लेना होगा। बालू ने कहा कि कच्चातिवु तमिलनाडु के मछुआरों के लिए 'एकमात्र आजीविका क्षेत्र' है। इसलिए इसे श्रीलंका को सौंपना असांविधानिक है।
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कांग्रेस सांसद ने किन तर्कों के आधार पर वक्फ बिल को असांविधानिक बताया
वक्फ विधेयक के मुद्दे पर सैयद नासिर हुसैन ने कहा कि सरकार ऐसे कानून बनाकर मुसलमानों को दूसरे जर्जे का नागरिक बनाने की ताक में है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में कानून पारित होने के बाद अब सरकार राज्यसभा में भी जबरन इस कानून को थोपने के प्रयास कर रही है।
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लोकसभा में पुरजोर विरोध के बावजूद सरकार के पास बहुमत
बता दें कि बुधवार को विपक्ष ने लोकसभा में भी चर्चा के दौरान वक्फ विधेयक का पुरजोर विरोध किया था। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए विधेयक की प्रति को प्रतीकात्मक रूप से फाड़ने की बात कही थी। देर रात 1.56 बजे विधेयक पर मतविभाजन हुआ। विधेयक के समर्थन में 288 वोट पड़े, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया और विधेयक पारित हो गया।
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वक्फ विधेयक लोकसभा में कैसे पारित हुआ
बता दें कि लोकसभा में 11 घंटे तक चली चर्चा के बाद रात 1.56 बजे वक्फ संशोधन बिल पारित हुआ। विपक्ष के सभी संशोधन अस्वीकृत हो गए। इसके समर्थन में 288 वोट पड़े, जबकि बिल के विरोध में 232 वोट पड़े। विधेयक पर लंबी चर्चा के अंत में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा का जवाब दिया। रिजिजू ने सांसदों से सर्वसम्मति से इस विधेयक को पारित कराने की अपील करते हुए कहा कि वक्फ से जुड़े सुधारों की मांग लंबे समय से हो रही है, अब सरकार अल्पसंख्यकों के हितों का ध्यान रखते हुए ये कानून बना रही है।
लोकसभा में भी लगे असांविधानिक फैसले के आरोप
राज्यसभा में वक्फ विधेयक के अलावा सरकार पर लोकसभा में भी गंभीर आरोप लगे। डीएमके सांसद टीआर बालू ने कहा कि कच्चातिवु द्वीप को श्रीलंका को सौंपना 'असांविधानिक' है। उन्होंने इस फैसले को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाने को भी कहा। लोकसभा में शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए बालू ने कहा, तमिलनाडु विधानसभा में सीएम एमके स्टालिन की तरफ से पेश प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया है। इसमें केंद्र से कच्चातिवु द्वीप को वापस लेने का आग्रह किया गया है। बता दें कि कच्चतिवु को भारत ने 1974 और 1976 में समझौतों के माध्यम से श्रीलंका को सौंप दिया था।
श्रीलंका को सौंपने पर ऐतराज क्यों
बालू ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा, भारतीय भूमि क्षेत्र को तब तक नहीं सौंपा जाना चाहिए जब तक संसद इसे मंजूरी न दे और इसकी पुष्टि न करे। उन्होंने कहा, कच्चातिवु को 1976 में सौंप दिया गया था... उन्होंने राज्य सरकार या संसद से परामर्श नहीं किया है। संसद की मंजूरी के बिना ऐसा करना असांविधानिक है। इसे जल्दी से जल्दी वापस लेना होगा। बालू ने कहा कि कच्चातिवु तमिलनाडु के मछुआरों के लिए 'एकमात्र आजीविका क्षेत्र' है। इसलिए इसे श्रीलंका को सौंपना असांविधानिक है।
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