अर्धसैनिक बलों में 'वीआरएस' की राह हुई आसान, अब 18 साल की नौकरी के बाद होगा सेवा सत्यापन
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इससे पहले 'वीक्यूएस' 25 साल में होता था। इसके अलावा किसी कर्मी के रिटायर होने की तिथि से पांच साल पहले भी यह प्रक्रिया अमल में लाई जाती थी।
बता दें कि सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, असम राइफल्स और एनएसजी में दस लाख से ज्यादा जवान और अधिकारी कार्यरत हैं। अभी तक 'वीक्यूएस' सेवा सत्यापन 25 साल की नौकरी पूरी होने के बाद होता था। अगर किसी कर्मी को बीस साल की सेवा के बाद ही वीआरएस चाहिए होता, तो उस केस में तय समय से पहले उसकी प्रशासनिक समीक्षा की जाती थी।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को जारी पत्र में कहा गया है कि अब वेरिफिकेशन ऑफ क्वालिफाइंग सर्विस प्रक्रिया 18 साल की नौकरी के बाद की जाएगी। यह प्रक्रिया पूरी कर उसे विभागीय साइट पर अपलोड करना होगा। इसका फायदा यह रहेगा कि वीआरएस लेने वाले कर्मियों को विभागीय औपचारिकताएं पूरी होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 18 साल की नौकरी के बाद सभी कर्मियों की प्रशासनिक समीक्षा कर ली जाएगी। इसके बाद तय नियमानुसार जिस किसी कर्मी का वीआरएस के लिए आवेदन आएगा, उसका तुरंत निपटारा किया जा सकेगा।
प्रशासनिक समीक्षा में सेवाकाल से जुड़ी कई बातें शामिल रहती हैं। जैसे, कोई कर्मचारी वीआरएस के लिए नॉन क्वालिफाइंग तो नहीं है। उसके खिलाफ शिकायत या पेंडिंग जांच, छुट्टियों से जुड़ा कोई विवाद और सर्विस ब्रेक आदि तथ्य देखे जाते हैं। जिस कर्मी का कोई विवाद नहीं होगा, उसका सेवा सत्यापन प्रमाण पत्र अपलोड कर दिया जाएगा।
इसके बाद जब कभी वह कर्मी वीआरएस के लिए आवेदन करेगा, उसका सेवा सत्यापन रिकॉर्ड जांच कर उसकी फाइल क्लीयर कर दी जाएगी। विभिन्न सुरक्षा बलों में अभी लाखों कर्मी ऐसे हैं, जो पेंशन योजना के तहत आते हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मियों के लिए पेंशन योजना को खत्म कर दिया है।