फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Voluntary retirement rights automatically apply if application is not cancelled within notice period, says SC

VRS: 'स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति अधिकार, नोटिस अवधि में आवेदन रद्द नहीं तो स्वतः लागू', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

Wed, 08 Apr 2026 04:06 AM IST
Pavan अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Wed, 08 Apr 2026 04:06 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, यदि कोई कर्मचारी 20 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद 3 महीने का नोटिस देता है तो वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का हकदार है। यदि नियोक्ता नोटिस अवधि में उसके आवेदन को अस्वीकार नहीं करता सेवानिवृत्ति स्वतः लागू हो जाती है। नोटिस अवधि पूरी होने के बाद की गई अस्वीकृति अमान्य मानी जाएगी।

विज्ञापन
Voluntary retirement rights automatically apply if application is not cancelled within notice period, says SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सिर्फ नौकरी छोड़ना नहीं है, बल्कि यह कर्मचारी का एक अलग अधिकार है, जो नौकरी के लिए जरूरी साल पूरे होने पर मिलता है। जस्टिस जेके माहेश्वरी व जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने एक बैंक की अपील पर अपना फैसला सुनाया। इस अपील में बैंक ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 2019 के दो अलग-अलग आदेशों को चुनौती दी थी।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - West Bengal Polls: 'TMC पर भ्रष्टाचार, भाजपा पर ध्रुवीकरण का आरोप', खरगे ने कांग्रेस को बताया 'तीसरा विकल्प'
विज्ञापन


पीठ ने कहा, यदि कोई कर्मचारी 20 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद 3 महीने का नोटिस देता है तो वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का हकदार है। यदि नियोक्ता नोटिस अवधि में उसके आवेदन को अस्वीकार नहीं करता सेवानिवृत्ति स्वतः लागू हो जाती है। नोटिस अवधि पूरी होने के बाद की गई अस्वीकृति अमान्य मानी जाएगी। पीठ ने गौर किया कि कर्मचारी की नियुक्ति सितंबर 1983 में हुई थी और अप्रैल 2007 में उसे प्रमोट करके मैनेजर बना दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


जुलाई 2010 में, रायपुर शाखा प्रबंधक के रूप में काम करते हुए बैंक को दो खातों में कुछ संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली। इसी दौरान, कर्मचारी ने 4 अक्तूबर 2010 को महाप्रबंधक को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का नोटिस भेजा और इसके जवाब में, क्षेत्रीय कार्यालय ने पेंशन नियमों के तहत एक नया आवेदन मांगा। बाद में, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए नोटिस में तय अवधि समाप्त होने पर कर्मचारी ने 16 मई, 2011 से बैंक में काम करना बंद कर दिया।

यह भी पढ़ें - Bengal Polls: चुनाव आयोग प्रमुख से आज मिलेंगे टीएमसी नेता, SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर पूछेंगे सवाल

पीठ ने गौर किया कि बैंक ने कर्मचारी के रोजगार समाप्त करने के लगभग आठ महीने बाद, 5 मार्च 2012 को उस पर संदिग्ध लेन-देन के आरोप में अभियोग दायर किया था। इसके बाद कर्मचारी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की अस्वीकृति और शुरू की गई जांच और बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने बैंक को उस कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ देने का निर्देश दिया था। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद के सभी परिणामी लाभों का हकदार होगा। पीठ ने बैंक को निर्देश दिया कि वह लागू ब्याज सहित सभी बकाया राशि का तीन महीने के भीतर भुगतान करे।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed