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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: VHP ने जांच अधिकारी को लिखा पत्र, केजरीवाल-प्रियंका के बयान दर्ज करने की क्यों की मांग?

Sun, 05 Jul 2026 02:32 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 05 Jul 2026 02:32 PM IST
सार

Ram Temple Donation Probe: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले में विश्व हिंदू परिषद ने बड़ा कदम उठाया है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने जांच अधिकारी को पत्र लिखकर अरविंद केजरीवाल, प्रियंका गांधी वाड्रा, संजय सिंह और रामगोपाल यादव समेत कई नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग की है। आखिर वीएचपी ने यह मांग क्यों उठाई और नेताओं से किन सवालों के जवाब मांगने की बात कही है? आइए, विस्तार से जानते हैं...

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VHP Seeks Statements of Kejriwal Priyanka Gandhi Other Opposition Leaders in Ram Temple Donation Probe
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने जांच एजेंसी से बड़ी मांग की है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने अयोध्या के डीएसपी और मामले के जांच अधिकारी अशुतोष तिवारी को पत्र लिखकर कहा है कि जिन नेताओं ने सार्वजनिक मंचों पर मंदिर के चढ़ावे में चोरी या घोटाले के आरोप लगाए हैं, उनके बयान भी जांच के दौरान दर्ज किए जाएं। वीएचपी का कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए आरोप लगाने वालों से भी तथ्यों और सबूतों की जानकारी लेना जरूरी है।

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पत्र में कहा गया है कि राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा मामले से जुड़ी एफआईआर संख्या 0090/2026 की जांच चल रही है। इस दौरान कई राजनीतिक नेताओं ने टीवी चैनलों, सोशल मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों में गंभीर आरोप लगाए हैं। वीएचपी का कहना है कि इन नेताओं ने दान की रकम, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के गायब होने जैसे दावे किए हैं। इसलिए जांच एजेंसी को यह जानना चाहिए कि इन दावों का आधार क्या है और उनके पास कौन-कौन से सबूत मौजूद हैं।
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किन नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग की गई है?

आलोक कुमार ने अपने पत्र में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, राज्यसभा सदस्य संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव समेत अन्य नेताओं का जिक्र किया है। पत्र के अनुसार, इन सभी नेताओं ने अलग-अलग मंचों पर राम मंदिर के चढ़ावे और दान में कथित गड़बड़ी को लेकर सार्वजनिक बयान दिए हैं। वीएचपी का कहना है कि जब किसी मामले में इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं तो संबंधित लोगों के बयान दर्ज करना जांच का हिस्सा होना चाहिए।

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पत्र में किन आरोपों का जिक्र किया गया है?

पत्र में रामगोपाल यादव के उस बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने राम मंदिर में हजारों करोड़ रुपये के कथित घोटाले और सोना, चांदी तथा नकदी गायब होने का आरोप लगाया था। वहीं अरविंद केजरीवाल के उन बयानों का भी जिक्र किया गया है, जिनमें उन्होंने भगवान राम के आभूषण, चरण पादुकाएं, चांदी की ईंटें, नकदी और कीमती सामान चोरी होने का दावा किया था। इसके अलावा संजय सिंह के उस बयान का भी हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने दान पात्र से 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित चोरी और कई कर्मचारियों की संलिप्तता की बात कही थी। प्रियंका गांधी वाड्रा के उस बयान का भी उल्लेख है, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या इतनी बड़ी कथित हेराफेरी छोटे कर्मचारी अकेले कर सकते हैं।

जांच एजेंसी से वीएचपी ने क्या कार्रवाई करने को कहा है?

आलोक कुमार ने पत्र में कहा है कि जांच अधिकारी संबंधित नेताओं से यह पूछें कि उन्हें अपने आरोपों की जानकारी कहां से मिली, उनका तथ्यात्मक आधार क्या है और उनके पास कौन-कौन से दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। उनका कहना है कि यदि आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय सामग्री मिलती है तो इससे जांच आगे बढ़ेगी और सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिलेगी। वहीं यदि आरोप बिना किसी तथ्य या सबूत के लगाए गए हैं, तो यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

वीएचपी ने कानून को लेकर क्या कहा?

पत्र के अंत में वीएचपी ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति बिना पर्याप्त आधार के गंभीर आरोप लगाता है और उससे समाज में भ्रम, वैमनस्य या तनाव फैलने की आशंका पैदा होती है, तो जांच एजेंसी कानून के तहत उचित कार्रवाई पर विचार कर सकती है। आलोक कुमार ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बिना सबूत गंभीर आरोप लगाकर बच निकलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में जांच एजेंसी कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच करे और आरोप लगाने वाले सभी लोगों से आवश्यक पूछताछ कर सच्चाई सामने लाए।

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