{"_id":"696b9cb46d9d3a530f06e386","slug":"varanasi-in-past-11-years-inr-55000-crore-spent-new-identity-for-kashi-indian-economy-significant-contribution-2026-01-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi: 11 साल में 55 हजार करोड़ से काशी को मिली नई पहचान, देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Varanasi: 11 साल में 55 हजार करोड़ से काशी को मिली नई पहचान, देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान
Sat, 17 Jan 2026 08:07 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी / नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी / नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 17 Jan 2026 08:07 PM IST
विज्ञापन
काशी विश्वनाथ (फाइल)
- फोटो : एएनआई
सुबह की पहली ट्रेन जब वाराणसी जंक्शन पर रुकती है, तो प्लेटफॉर्म पर उतरते यात्रियों की आंखों में एक अलग-सी चमक होती है। कोई पहली बार आया है, कोई वर्षों बाद। लेकिन एक बात सब महसूस करते हैं- यह वही काशी है, फिर भी पहले जैसी नहीं।
विज्ञापन
करीब 11 साल पहले की बात याद करें, तब काशी की गलियां तंग थीं। दर्शन कठिन थे और श्रद्धालुओं की संख्या सीमित। एक दिन में 20–25 हजार लोग आ जाएं, तो शहर पर दबाव साफ दिखने लगता था। आज वही काशी रोज औसतन सवा लाख से डेढ़ लाख श्रद्धालुओं को संभाल रही है। सावन, शिवरात्रि या बड़े पर्वों पर यह संख्या छह से 10 लाख तक पहुंच जाती है। पिछले एक साल में ही 11 करोड़ से अधिक लोग बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए यहां आए।
विज्ञापन
इस बदलाव की नींव आंकड़ों में छुपी है, लेकिन इसकी असली कहानी लोगों की ज़िंदगी में दिखती है। बीते 11 वर्षों में काशी के लिए 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत हुईं। इनमें से करीब 36 हजार करोड़ की परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं। सड़कें चौड़ी हुईं। घाट संवरें। कनेक्टिविटी सुधरी और दर्शन की व्यवस्था बदली।
विज्ञापन
जब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बना, तो कई लोगों को सिर्फ पत्थर और इमारतें दिखीं। लेकिन स्थानीय दुकानदार, नाविक और पुरोहितों के लिए इसका मतलब था- सम्मानजनक रोजगार और स्थिर आमदनी। आज फूल-प्रसाद बेचने वाले से लेकर होटल कर्मचारी तक, हजारों परिवारों की आजीविका सीधे-सीधे इस बदलाव से जुड़ी है।
काशी का देश की अर्थव्यवस्था में योगदान
आंकड़े बताते हैं कि काशी ने हाल के वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है। यह सिर्फ पर्यटन का पैसा नहीं है, बल्कि उससे जुड़े रोजगार, सेवाएं और स्थानीय व्यापार की पूरी श्रृंखला है। एक नाविक बताते हैं कि पहले दिन भर की मेहनत के बाद भी आमदनी अनिश्चित रहती थी, आज घाटों की रौनक ने काम को स्थिर बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर काशी को अपनी आत्मा कहते हैं। शायद इसी जुड़ाव का असर है कि यहां विकास का मतलब सिर्फ नई इमारतें नहीं, बल्कि श्रद्धा, सुविधा और सम्मान का संतुलन है।
काशी ने अपनी आत्मा नहीं खोई
11 साल में काशी बदली है, यह बात नकारना मुश्किल है, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि इस बदलाव के बीच काशी ने अपनी आत्मा नहीं खोई। सुबह की आरती, शाम की गंगा आरती और गलियों की वही सुगंध आज भी मौजूद है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब इस अविनाशी शहर ने दुनिया के सामने खुद को नए आत्मविश्वास के साथ पेश किया है।