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चाचा शिवपाल का पलटवार, अखिलेश के चहेते 14 उम्मीदवारों के टिकट काटे
शादाब रिजवी/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 04 Oct 2016 05:28 AM IST
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यूपी में विधानसभा चुनाव के लिए पूर्व में घोषित 14 प्रत्याशियों को समाजवादी पार्टी ने एक झटके में बदलकर सियासी भूचाल ला दिया। इस कार्रवाई को शिवपाल यादव का सीएम पर पलटवार माना जा रहा है। साथ ही इसे चुनाव के बाद सीएम पद के लिए अपनी फिल्डिंग बिछाने के तौर पर भी देखा जा रहा है।
दरअसल, शनिवार को सीएम ने एक बार फिर शिवपाल से समाज कल्याण समेत दो विभाग वापस ले लिए थे, उसके 36 घंटे बाद ही प्रदेश अध्यक्ष ने सीएम और रामगोपाल के करीबी 14 प्रत्याशियों के टिकटों पर कैंची चला दी। साथ ही अपने व मुलायम के सात और करीबियों को टिकट थमा दिया। हालांकि प्रोफेसर रामगोपाल का कहना है कि टिकट बंटवारे को लेकर कोई मतभेद नहीं। सभी संतुष्ट हैं।
पार्टी के भीतर हुए इस फैसले से साफ है कि यूपी से सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में सियासी विवाद ठंडा जरूर पड़ा है लेकिन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सियासी जानकारों का मानना है कि चाचा (शिवपाल)और भतीजे (अखिलेश) में वर्चस्व बनाने को लेकर छिड़ा विवाद और गहरा सकता है। बताते हैं कि गायत्री प्रसाद प्रजापति को उनका पुराना विभाग खनन नहीं दिए जाने से सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह नाराज हैं। सबसे बड़े बजट वाला पीडब्लूडी डिपार्टमेंट वापस नहीं मिलने से शिवपाल सीएम से खफा है। इसी के साथ शनिवार को शिवपाल से दो विभाग सीएम ने और वापस ले लिए।
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सारी खींचतान चुनाव बाद सूबे की सबसे बड़ी कुर्सी (सीएम पद) हासिल करने के लिए हो रही है। पिछले दिनों हुए विवाद में अखिलेश यादव ने यही मांगा था कि टिकट वितरण में उनकी भी सुनी जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि सारा झगड़ा उनकी सीएम की कुर्सी को लेकर है। अब वह विवाद दिखने लगा है। 2012 में भी शिवपाल खुद सीएम बनना चाहते थे, लेकिन बाद में मुलायम सिंह के समझाने पर वह भारी मन से अखिलेश को सीएम बनवाने को राजी हो गए। अब माना जा रहा है कि चुनाव बाद सरकार बनने की स्थिति में सीएम बनने के लिए अगर विधायकों का समर्थन हासिल की नौबत आ जाती है तब ज्यादातर विधायक समर्थन में खड़े हो, दोनों में इसको लेकर फिल्डिंग़ बिछाने की होड़ हैै। शिवपाल यह कह भी चुके हैं कि सीएम कौन होगा, इसका फैसला विधायक करेंगे।
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दरअसल, शनिवार को सीएम ने एक बार फिर शिवपाल से समाज कल्याण समेत दो विभाग वापस ले लिए थे, उसके 36 घंटे बाद ही प्रदेश अध्यक्ष ने सीएम और रामगोपाल के करीबी 14 प्रत्याशियों के टिकटों पर कैंची चला दी। साथ ही अपने व मुलायम के सात और करीबियों को टिकट थमा दिया। हालांकि प्रोफेसर रामगोपाल का कहना है कि टिकट बंटवारे को लेकर कोई मतभेद नहीं। सभी संतुष्ट हैं।
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पार्टी के भीतर हुए इस फैसले से साफ है कि यूपी से सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में सियासी विवाद ठंडा जरूर पड़ा है लेकिन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सियासी जानकारों का मानना है कि चाचा (शिवपाल)और भतीजे (अखिलेश) में वर्चस्व बनाने को लेकर छिड़ा विवाद और गहरा सकता है। बताते हैं कि गायत्री प्रसाद प्रजापति को उनका पुराना विभाग खनन नहीं दिए जाने से सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह नाराज हैं। सबसे बड़े बजट वाला पीडब्लूडी डिपार्टमेंट वापस नहीं मिलने से शिवपाल सीएम से खफा है। इसी के साथ शनिवार को शिवपाल से दो विभाग सीएम ने और वापस ले लिए।
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सारी खींचतान चुनाव बाद सूबे की सबसे बड़ी कुर्सी (सीएम पद) हासिल करने के लिए हो रही है। पिछले दिनों हुए विवाद में अखिलेश यादव ने यही मांगा था कि टिकट वितरण में उनकी भी सुनी जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि सारा झगड़ा उनकी सीएम की कुर्सी को लेकर है। अब वह विवाद दिखने लगा है। 2012 में भी शिवपाल खुद सीएम बनना चाहते थे, लेकिन बाद में मुलायम सिंह के समझाने पर वह भारी मन से अखिलेश को सीएम बनवाने को राजी हो गए। अब माना जा रहा है कि चुनाव बाद सरकार बनने की स्थिति में सीएम बनने के लिए अगर विधायकों का समर्थन हासिल की नौबत आ जाती है तब ज्यादातर विधायक समर्थन में खड़े हो, दोनों में इसको लेकर फिल्डिंग़ बिछाने की होड़ हैै। शिवपाल यह कह भी चुके हैं कि सीएम कौन होगा, इसका फैसला विधायक करेंगे।
चाचा भतीजे के बीच विवाद का पुराना रिश्ता...
शिवपाल यादव व अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
चाचा भतीजे के बीच विवाद का पुराना रिश्ता...
1- शिवपाल ने आरोप लगाया था कि अखिलेश सरकार के अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। नेता मनमानी कर रहे हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो वो इस्तीफा दे देंगे।
2. अखिलेश को हटाकर शिवपाल को प्रदेशाध्यक्ष बना दिया था। अखिलेश ने शिवपाल के सारे विभाग छीन लिए थे। मुलायम के हस्तक्षेप पर कुछ विभाग लौट दिए थे, लेकिन प्रमुख पीडब्लूडी नहीं दिया था।
3- अखिलेश के करीबी सात युवा नेताओं को शिवपाल ने पार्टी से बाहर कर दिया था, अखिलेश ने तीन दिन पहले उनको वापस लेने की अपील भी की।
4- दीपक सिंघल को मुख्य सचिव बनाए जाने में शिवपाल की पैरवी मानी गई। अखिलेश उनको बनाना नहीं चाहते थे।
5- कौमी एकता दल के सपा विलय को लेकर और मुख्तार अंसारी की एंट्री से अखिलेश नाराज थे। विलय कराने के शिवपाल पक्ष में थे। नाराज अखिलेश ने मध्यस्थता करने वाले मंत्री बलराम यादव को निष्कासित किया था। विलय रद्द होने के बाद बलराम यादव को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।
6- अमर सिंह को भी पार्टी में दोबारा वापस लाने को लेकर आजम और रामगोपाल के खुले विरोध के चलते अखिलेश असमंजस में थे। शिवपाल पूरी तरह से अमर सिंह के साथ खड़े थे।
7- अखिलेश के करीबी युवा नेताओं सुनील साजन और आनन्द सिंह भदौरिया को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर का रास्ता दिखाया था। नाराज अखिलेश ने सैफई महोत्सव के उद्घाटन प्रोग्राम में नहीं गए। निष्कासन रद्द होने पर ही अखिलेश माने थे। अब एक फिर से उनको सपा से शिवपाल ने निकाल दिया है।
1- शिवपाल ने आरोप लगाया था कि अखिलेश सरकार के अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। नेता मनमानी कर रहे हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो वो इस्तीफा दे देंगे।
2. अखिलेश को हटाकर शिवपाल को प्रदेशाध्यक्ष बना दिया था। अखिलेश ने शिवपाल के सारे विभाग छीन लिए थे। मुलायम के हस्तक्षेप पर कुछ विभाग लौट दिए थे, लेकिन प्रमुख पीडब्लूडी नहीं दिया था।
3- अखिलेश के करीबी सात युवा नेताओं को शिवपाल ने पार्टी से बाहर कर दिया था, अखिलेश ने तीन दिन पहले उनको वापस लेने की अपील भी की।
4- दीपक सिंघल को मुख्य सचिव बनाए जाने में शिवपाल की पैरवी मानी गई। अखिलेश उनको बनाना नहीं चाहते थे।
5- कौमी एकता दल के सपा विलय को लेकर और मुख्तार अंसारी की एंट्री से अखिलेश नाराज थे। विलय कराने के शिवपाल पक्ष में थे। नाराज अखिलेश ने मध्यस्थता करने वाले मंत्री बलराम यादव को निष्कासित किया था। विलय रद्द होने के बाद बलराम यादव को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।
6- अमर सिंह को भी पार्टी में दोबारा वापस लाने को लेकर आजम और रामगोपाल के खुले विरोध के चलते अखिलेश असमंजस में थे। शिवपाल पूरी तरह से अमर सिंह के साथ खड़े थे।
7- अखिलेश के करीबी युवा नेताओं सुनील साजन और आनन्द सिंह भदौरिया को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर का रास्ता दिखाया था। नाराज अखिलेश ने सैफई महोत्सव के उद्घाटन प्रोग्राम में नहीं गए। निष्कासन रद्द होने पर ही अखिलेश माने थे। अब एक फिर से उनको सपा से शिवपाल ने निकाल दिया है।