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डोकलाम गतिरोध पर चीन की आक्रामक रणनीतियों को लेकर अमेरिका ने दी चेतावनी

Sat, 18 Aug 2018 09:02 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 18 Aug 2018 09:02 AM IST
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US warns about China coercive tactics on doklam standoff

अमेरिका ने एक बार फिर क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर पड़ोसी देशों को परेशान करने के लिए चीन की विस्तारवादी नीतियों और जबरदस्त रणनीति के बारे में चेतावनी दी है। इसमें डोकलाम का भी जिक्र किया गया है। बता दें कि अमेरिका का ये बयान ऐसे समय पर आया है, जब अगले हफ्ते चीन के रक्षा मंत्री भारत के दौरे पर आने वाले हैं।  

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गौरतलब है कि डोकलाम को लेकर भारत और चीन की सेनाएं कई बार आमने-सामने आ चुकी हैं। अमेरिकी संसद में पेश किए अपने हालिया रिपोर्ट में पेंटागन ने कहा है कि चीन अपने पड़ोसियों के साथ पूर्ण सशस्त्र संघर्षों को उत्तेजित करके अपनी क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में नहीं डालना चाहता, क्योंकि चीन के आर्थिक विकास का आधार ही पड़ोसी देशों से व्यापार है। लेकिन अपनी बढ़ती आर्थिक, राजनयिक और सैन्य ताकतों के आधार पर चीन अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए 'जबरदस्त उपायो' को नियोजित करने के लिए तेजी से तैयार है। 
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पेंटागन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दक्षिण और पूर्वी चीनी समुद्रों में अपने विस्तारित क्षेत्रीय और समुद्री संप्रभुता के दावों को लेकर चीन का सशस्त्र संघर्ष स्पष्ट नजर आ रहा है। पिछले साल सिक्किम-भूटान-तिब्बत की सीमा पर भी डोकलाम को लेकर भारत और चीन की सेनाएं 73 दिनों तक एक-दूसरे के आमने सामने रही थीं। चीनी सेना पीछे हटने का नाम ही नहीं ले रही थी। हालांकि बाद में काफी बातचीत के बाद वो पीछे हटे थे। 
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पेंटागन ने 130 पन्नों की अपनी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि चीन अपनी मिलिट्री के नवीनीकरण को लेकर कैसे आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट में चीन की लंबी दूरी की मिसाइल, परमाणु बमवर्षक और पनडुब्बियों से लेकर सूचना, साइबर, अंतरिक्ष, काउंटर-स्पेस और युद्ध अभियान क्षमताओं के बारे में भी बताया गया है। 

पेंटागन की इस रिपोर्ट ने निश्चित तौर पर भारत की परेशानी एक बार फिर बढ़ा दी है। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की हरकतों और हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नेवी की तैनाती के बावजूद भारत चीन के विदेशमंत्री का स्वागत करने वाला है, जो 21 से 24 अगस्त तक भारत के दौरे पर रहेंगे।  

उधर, भारत और अमेरिका के बीच भी सितंबर में 'टू प्लस टू' डायलॉग होने वाला है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अपने अमेरिकी समकक्ष जिम मैटिस और माइक पॉम्पियो के साथ दिल्ली में 6 सितंबर को संयुक्त वार्ता करेंगी। अमेरिका निश्चित तौर पर इस मामले में भारत को अपने पक्ष में रखना चाहता है और हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की उग्र नीतियों के विरोध में अमेरिका जापान और ऑस्ट्रेलिया और भारत के साथ मिलकर एक चतुर्भुज बनाना चाहता है। 


यहां तक कि अमेरिका ने भारत को अपने पक्ष में रखने के लिए अपने धुर-विरोधी रूस से भी हथियार खरीदने की छूट दे दी है। हालांकि भारत ने इस मामले में अभी तक अपना कोई पक्ष नहीं रखा है।

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