फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   US State Department disappointed with the decision of the India.

धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के सदस्यों को भारतीय वीजा नहीं दिए जाने पर अमेरिका निराश

Tue, 08 Mar 2016 10:48 AM IST
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन Updated Tue, 08 Mar 2016 10:48 AM IST
सार

  • विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन कर्बी ने कहा कि दुनिया भर में धार्मिक आजादी के उल्लंघन पर नजर रखने में ये आयोग अहम भूमिका निभाता है।
  • अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग एक स्वतंत्र संस्था है जिसे कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है।
  • इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति और कांग्रेस मिलकर करते हैं।

विज्ञापन
US State Department disappointed with the decision of the India.

विस्तार

अमेरिकी विदेश विभाग ने धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के सदस्यों को भारतीय वीजा नहीं दिए जाने के मामले पर चिंता जताते हुए निराशा जाहिर की है।
विज्ञापन


विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन कर्बी ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि दुनिया भर में धार्मिक आजादी के उल्लंघन पर नजर रखने में ये आयोग अहम भूमिका निभाता है।

कर्बी ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर किसी तरह का बयान देने से इनकार किया लेकिन उन्होंने बार-बार ये बात दोहराई कि अमेरिका भारत के इस फैसले से निराश है।
विज्ञापन


उनका कहना था, "हम ये मानते हैं कि कोई भी समाज और मजबूत होता है जब लोगों को उनकी मर्जी से प्रार्थना करने या न करने की आजादी हो और ये भारत और दुनिया के हर देश पर लागू होता है।"
विज्ञापन
विज्ञापन


अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग एक स्वतंत्र संस्था है जिसे कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है और इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति और कांग्रेस मिलकर करते हैं।

प्रवक्ता का कहना था कि विदेश विभाग आयोग के काम का पूरी तरह से समर्थन करता है। उनका कहना था कि इस मामले पर और धार्मिक आजादी से जुड़े मामले पर भारतीय अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत हो रही है।

विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन कर्बी ने उठाए सवाल

US State Department disappointed with the decision of the India.
विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन कर्बी का कहना था, "ये कोई ऐसा विषय नहीं है जिस पर हमारी बातचीत नहीं होती है और न ही ये ऐसा विषय है जिस पर बात करने से हम डरते हों या परहेज करते हों।"

इसके पहले अमेरिका में भारतीय दूतावास ने बयान जारी करते हुए कहा था कि अमेरिकी आयोग के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं है कि वो भारतीय लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर टिप्पणी करे।

गौरतलब है कि 2015 में इस अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में धार्मिक और सांप्रदायिक हिंसा में पिछले तीन सालों में बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक एक बहुलतावादी, गैर सांप्रादायिक और लोकतांत्रिक देश होते हुए भी अल्पसंख्यक समुदाय की रक्षा करने में भारत संघर्ष करता रहा है और उनके खिलाफ अपराध होने पर सजा दिलवाने में उसे सफलता नहीं मिल पाती है।

इसी आयोग ने 2008 में मोदी के अमेरिका दौरे पर रोकने का दिया था सुझाव

US State Department disappointed with the decision of the India.
ये वही आयोग है जिसने प्रधानमंत्री मोदी पर गुजरात दंगों पर काबू नहीं करने के आरोप में अमेरिका आने पर रोक लगाने का सुझाव दिया था। साल 2008 में जब मोदी एक सम्मेलन को संबोधित करने आ रहे थे तो आयोग ने उन्हें वीजा नहीं दिए जाने की सिफारिश की थी।

बीबीसी के साथ एक खास बातचीत में 2013 में आयोग की प्रमुख कैटरीना लैंटोस ने ये भी कहा था कि वो उम्मीद करती हैं भारतीय जनता मोदी को चुनने से पहले गुजरात की उनकी पृष्ठभूमि को भी याद करेगी।

आम चुनाव से कुछ महीनों पहले जब मोदी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार की तौर पर उभर रहे थे तो विदेश विभाग ने ये बयान दिया था कि मोदी किसी आम भारतीय की तरह वीजा के लिए आवेदन दे सकते हैं और उस पर गौर किया जाएगा।

इस पर प्रधानमंत्री मोदी का बयान रहा है कि उन्होंने अमेरिकी वीजा के लिए आवेदन ही नहीं दाखिल किया था इसलिए उस पर रोक लगाने का सवाल ही नहीं उठता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed