पूर्वाग्रह से प्रेरित है पीएम मोदी के खिलाफ अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट : भाजपा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ अमेरिकी विदेश विभाग की तरफ से जारी की गई ‘अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट-2018’ को पूर्वाग्रह से ग्रस्त करार दिया है।
भगवा पार्टी ने शनिवार को इस रिपोर्ट में अपने जिक्र को भी बेबुनियाद बताया।
पार्टी ने जोर देते हुए कहा कि उसके नेताओं ने अल्पसंख्यकों और समाज के कमजोर वर्गों के खिलाफ हिंसा का जोरदार विरोध किया है।
हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख व राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने शनिवार को कहा कि इस रिपोर्ट की मूल अवधारणा कि यहां अल्पसंख्यकों के साथ हर हिंसा के पीछे कोई षड्यंत्र है, सरासर झूठ है।
उल्टे अधिकतर मामले स्थानीय विवाद या अपराधी तत्वों की शरारत के कारण हुए हैं। उन्होंने कहा, जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेताओं ने अल्पसंख्यकों तथा समाज के कमजोर तबके के लोगों के विरुद्ध हुई हिंसा की कड़ी आलोचना की है।
बलूनी ने कहा, भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं की जड़ें बहुत ही गहरी हैं। वे पूरी तरह से स्वतंत्र हैं और ऐसे विवादों का फैसला करने तथा दोषियों को सजा देने में पूरी तरह सक्षम हैं। दुर्भाग्यवश इन तथ्यों को इस रिपोर्ट में बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत में विश्वास करती है।
क्या कहा गया है रिपोर्ट में
रिपोर्ट में धार्मिक आजादी के मुद्दे पर भारत को घेरा गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इस रिपोर्ट में भारत समेत कई देशों की धार्मिक स्वतंत्रता के आधार पर चर्चा की है।
21 जून को पेश रिपोर्ट में भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कट्टरपंथी हिंदू समूहों की तरफ से अल्पसंख्यक समुदायों खासतौर पर मुस्लिमों के खिलाफ लगातार पूरे साल हिंसक हमले किए गए, जिनमें से अधिकतर के पीछे पीड़ितों पर गाय का मांस बेचने या गोवंश काटने की अफवाह रही है।
इसके अलावा भीड़ की हिंसा, धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर हिंसा के साथ-साथ अनेक शैक्षणिक संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के सरकार के फैसले को भी अनुचित बताया गया है।