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रेमेडिसविर के निर्माण को लेकर अमेरिकी कंपनी गिलियड कर रही भारतीय फार्मा कंपनियों से बात

Thu, 07 May 2020 02:19 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 07 May 2020 02:19 PM IST
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US pharma company gilead science in talks with indian companies to manufacture its antiviral drug remdesivir
भारतीय कंपनी बनाएगी रेमेडिसविर दवा (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

अमेरिका की दवा कंपनी गिलियड साइंसिज ने बुधवार को घोषणा की कि वह भारत सहित दुनिया की प्रमुख रासायनिक और दवा निर्माण कंपनियों के साथ अपने पेटेंट एंटीवायरल ड्रग रेमेडिसविर के निर्माण को लेकर बातचीत कर रहा है। यह घोषणा ऐसे समय पर की गई है जब हाल ही में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन प्राधिकरण ने कोविड-19 रोगियों के आपातकालीन उपयोग के लिए इस दवा को मंजूरी दी है।

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कंपनी कम से कम 2022 तक यूरोप, एशिया और विकासशील दुनिया के लिए रेमेडिसविर का उत्पादन करने के लिए स्वैच्छिक लाइसेंस के तहत उनकी क्षमता को लेकर चर्चा कर रही है। स्वैच्छिक लाइसेंस उसे कहते हैं जिसमें एक जेनरिक दवा निर्माता को पेटेंट धारक द्वारा दवा बनाने की अनुमति दी जाती है। बता दें कि भारत दुनिया के शीर्ष जेनरिक हब में से एक है।
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गिलियड साइंसिज ने एक बयान में कहा, 'कंपनी भारत और पाकिस्तान में कई जेनेरिक दवा निर्माताओं के साथ दीर्घकालिक स्वैच्छिक लाइसेंस को लेकर बातचीत कर रही है ताकि विकासशील देशों के लिए रेमेडिसविर  का निर्माण किया जा सके। दवा के उत्पादन को सुविधाजनक बनाने के लिए गिलियड प्रौद्योगिकी हस्तांतरण करेगा। कंपनी मेडिसिंस पेटेंट पूल के साथ चर्चा कर रही है, जिसके साथ गिलियड ने कई सालों तक साझेदारी की ताकि विकासशील देशों के लिए दवा का लाइसेंस दिया जा सके।'
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार महामारी के दौरान स्थानीय निर्माता कुछ शर्तों के तहत पेटेंट दवा का उत्पादन शुरू कर सकते हैं। आईसीएमआर के महामारी विज्ञान और संचारी रोग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रमन गंगाखेड़कर ने कहा, 'पेटेंट धारक को रॉयल्टी राशि का भुगतान करने के बाद ऐसी दवाओं का निर्माण किया जा सकता है। यदि आवश्यक हो तो महामारी के दौरान दवा निर्माण के लिए कुछ प्रावधान किए जा सकते हैं।'


भारत कोविड-19 के इलाज के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सॉलिडैरिटी ट्रायल का हिस्सा है और परीक्षण के लिए दवा की एक हजार खुराक मिली है। वहीं हैदराबाद स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईआईसीटी) ने रेमेडिसविर के लिए प्रमुख प्रारंभिक सामग्री (केएसएम) को संश्लेषित किया है। यह सक्रिय दवा घटक विकसित करने की दिशा में पहला कदम है।

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