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Bihar Politics: रालोसपा को पुनर्जीवित कर भाजपा से हाथ मिला सकते हैं कुशवाहा, राजद से नजदीकी ने बढ़ाई दूरी
Mon, 23 Jan 2023 06:58 AM IST
Jeet Kumar
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 23 Jan 2023 06:58 AM IST
सार
बिहार भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कुशवाहा से बातचीत बेहद सकारात्मक है। कई फार्मूले पर बातचीत हुई है। गृह मंत्री अमित शाह की 22 फरवरी की बिहार यात्रा से पूर्व सबकुछ तय हो जाएगा। बहरहाल इतना साफ हो चुका है कि कुशवाहा का नीतीश से पूरी तरह से मोहभंग हो चुका है।
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सीएम नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा
- फोटो : social media
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विस्तार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मोहभंग के बाद उपेंद्र कुशवाहा अपनी पुरानी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) को पुनर्जीवित कर सकते हैं। उनकी योजना पुरानी पार्टी को जिंदा कर पहले की तरह राजग का हिस्सा बनने की है।
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नीतीश को सबक सिखाने के लिए राज्य में दलित, अति पिछड़ा-अगड़ा गठजोड़ को मजबूत करने में जुटी भाजपा को भी कुशवाहा की यह रणनीति अपने लिए ज्यादा मुफीद लग रही है। एम्स में नियमित जांच के लिए भर्ती हुए कुशवाहा से बिहार भाजपा नेताओं की मुलाकात ने बिहार की राजनीति में सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। बिहार भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कुशवाहा से बातचीत बेहद सकारात्मक है। कई फार्मूले पर बातचीत हुई है। गृह मंत्री अमित शाह की 22 फरवरी की बिहार यात्रा से पूर्व सबकुछ तय हो जाएगा। बहरहाल इतना साफ हो चुका है कि कुशवाहा का नीतीश से पूरी तरह से मोहभंग हो चुका है।
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आरएलएसपी-जदयू विलय में फंसा है पेच
वर्ष 2021 में कुशवाहा ने आरएलएसपी का जदयू में विलय किया था। हालांकि उनके इस फैसले को उन्हीं की पार्टी के अरुण कुशवाहा ने चुनाव आयोग में चुनौती दी थी। आयोग में अब तक विलय का मामला लंबित ही है। ऐसे में तकनीकी तौर पर इस विलय को पूर्ण मंजूरी नहीं मिली है।
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राजद से नजदीकी ने बढ़ाई दूरी
बिहार के सीएम से कुशवाहा की दूरी की वजह नीतीश की राजद से बढ़ी नजदीकियां हैं। बीते विधानसभा चुनाव में औसत प्रदर्शन के बाद नीतीश ने कुशवाहा को साधा था। नीतीश ने कुशवाहा को आश्वस्त किया था कि भविष्य में उन्हीं को पार्टी संभालनी है। हालांकि बाद में ऐसा नहीं हुआ। कुशवाहा की जगह नीतीश ने पार्टी में दूसरे लोगों को आगे बढ़ाया। भाजपा से नाता तोड़ने के बाद जब राजद-जदयू विलय की चर्चा हुई तो कुशवाहा ने इसका कड़ा विरोध किया।
मजबूत गठबंधन बनाने की रणनीति...
बिहार में भाजपा अति पिछड़ा, दलित और अगड़ा वर्ग का मजबूत गठजोड़ बनाकर नीतीश को सबक सिखाना चाहती है। जदयू के भाजपा से नाता तोड़ने के बाद विधानसभा उपचुनाव के तीन नतीजे से साबित हुआ है कि अति पिछड़ा वर्ग में भाजपा की पकड़ मजबूत बनी हुई है। चिराग पासवान को साधने का भी पार्टी को लाभ हुआ है। अब पार्टी कुशवाहा के सहारे कोयरी वोट बैंक को भी साधना चाहती है। बीते विधानसभा चुनाव में आरएलएसपी खाता नहीं खोल पाई थी लेकिन 35 सीटों पर उसे पांच हजार से अधिक वोट मिले थे।
जदयू के मुझसे बड़े नेता भाजपा के संपर्क में, मैं उस पार्टी में नहीं जा रहा : कुशवाहा
पटना। जदयू की राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को भाजपा में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे दावे आधारहीन हैं। भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात का मतलब यह नहीं है कि मैं भाजपा में जा रहा हूं। हमारी पार्टी का जितना बड़ा नेता है, वह उतना ही भाजपा नेताओं के संपर्क में है।
उन्होंने कहा कि उनके भाजपा में जाने की बातें आधारहीन हैं। मैं अस्पताल में भाजपा नेताओं से मिला था, इसके राजनीतीकरण की जरूरत नहीं है। नीतीश के उनके कई बार पार्टी छोड़ने संबंधी बयान पर कुशवाहा ने कहा कि हमारी पार्टी ने कई भाजपा से हाथ मिलाया और साथ छोड़ा। मैं जदयू में हूं और मेरी एकमात्र चिंता यह है कि पार्टी कमजोर हो रही है। मैं इसे मजबूत बनाने का काम कर रहा हूं।