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यूपी चुनाव: क्यों जरूरी था कांग्रेस के लिए गठबंधन, एक वजह ये भी

Tue, 24 Jan 2017 02:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो/शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ Updated Tue, 24 Jan 2017 02:53 PM IST
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UP polls:  why it was necessary to Alliance of Congress, See these  reasons
- फोटो : getty images
27 साल से यूपी की सत्ता से दूर कांग्रेस के लिए समाजवादी पार्टी से गठबंधन बेहद जरूरी था। इसके लिए वजह स्पष्ट हैं। सपा के साथ गठबंधन से कांग्रेस को संजीवनी मिल गई है। गठबंधन में कांग्रेस को 105 सीटें मिली हैं। इनमें पहले व दूसरे चरण के चुनाव में कुल 41 सीटें मिली हैं। यदि गठबंधन न होता तो कांग्रेस की सबसे ज्यादा फजीहत होती। वह अकेले दम पर 403 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं थी।
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कांग्रेस शुरू से ही गठबंधन की आस लगाए बैठी थी। पार्टी को यह अंदाजा था कि यदि उसे अपने दम पर चुनाव लड़ना पड़ा तो और फजीहत होगी। पार्टी की तैयारियों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में उसके पास ढंग के उम्मीदवार तक नहीं थे। इस कारण कांग्रेस यह शुरू से चाहती थी कि उसका गठबंधन हो जाए।
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वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने रालोद के साथ समझौता कर चुनाव लड़ा था। इस कारण पार्टी को 11.65 फीसदी मत मिले थे। इससे कांग्रेस को 29 सीटें मिलीं। जबकि 31 प्रत्याशी दूसरे स्थान पर आए। इसके बाद अधिकतर प्रत्याशी तीसरे, चौथे व पांचवें स्थान पर आने के लिए ही संघर्ष करते रहे। 2014 का लोकसभा चुनाव देखा जाए तो उसमें कांग्रेस को मात्र 7.5 फीसदी वोट मिले थे। पार्टी को केवल दो सीटें ही मिली थीं।
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इसके पहले के भी चुनाव देखे जाएं तो उसमें कांग्रेस को सात फीसदी से 15 फीसदी के बीच वोट मिलते आए हैं। ऐसे में कांग्रेस को यह लग रहा था कि सात से 10 फीसदी वोट के भरोसे उसकी सीटें दहाई का अंक भी पार नहीं कर पाएंगी। इस कारण कांग्रेस ने इस बार सूबे के सत्ताधारी दल सपा का दामन थामा है।

बिहार फॉर्मूले को चाहते हैं यूपी में दोहराना

UP polls:  why it was necessary to Alliance of Congress, See these  reasons
कांग्रेस इस गठबंधन के सहारे बिहार फॉर्मूले को एक बार फिर दोहराना चाहती है। 2015 के चुनाव में महागठबंधन में शामिल होकर कांग्रेस ने 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसमें पार्टी की झोली में 27 सीटें आईं, जबकि 2010 में उसके पास मात्र चार सीटें थीं। इसी तरह का परिणाम यूपी में भी दोहराकर कांग्रेस अपनी स्थिति में सुधार करना चाह रही है।

पूर्व सांसदों पर भी लगाया दांव
कांग्रेस इस बार सपा से मिलकर सरकार बनाने का ख्वाब देख रही है। यही वजह है कि गठबंधन के बाद कांग्रेस यह चाहती है कि उसके खाते में ज्यादा से ज्यादा सीटें आएं। इसके लिए उसने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के फॉर्मूले को अपनाते हुए पूर्व सांसदों को भी विधानसभा चुनाव में उतारना शुरू कर दिया है।

पहले व दूसरे चरण के चुनाव के लिए जो प्रत्याशियों की सूची जारी की गई है, उसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को टिकट दिया गया है। वे शाहजहांपुर की तिलहर सीट से चुनाव लड़ेंगे। इसी प्रकार मुरादनगर से पूर्व सांसद सुरेन्द्र गोयल को भी टिकट मिला है। आगे के भी चरणों में कांग्रेस अपने दिग्गजों को विधानसभा चुनाव लड़ाएगी।
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