आलू खरीद पर केंद्र को अब तक नहीं मिला यूपी का प्रस्ताव
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एक तरफ जहां यूपी के किसान आलू की वाजिब कीमत न मिलने को लेकर परेशान हैं। तो दूसरी ओर केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय को अब तक यूपी सरकार की ओर से आलू खरीद का प्रस्ताव नहीं मिला है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय सूत्रों के अनुसार बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत केंद्र सरकार राज्यों को राशि प्रदान करती है। ताकि किसानों का हित सुरक्षित रह सके। मगर राज्य सरकार ने इस योजना के तहत अब तक यूपी में आलू खरीद का प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि बीते अप्रैल माह में यूपी के आलू उत्पादक किसानों को उचित कीमत न मिलने की शिकायत पर केंद्र ने खुद पहल कर राज्य सरकार से मूल्य हस्तक्षेप योजना के तहत वाजिब दाम पर किसानों से आलू की खरीद करने का निर्देश दिया था।
उसके बाद योजना के तहत राज्य सरकार ने करीब 1 लाख मीट्रिक टन आलू की खरीद वाजिब दाम पर की थी। मगर वर्तमान संकट के दौरान प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र के पास अब मूल्य हस्तक्षेप योजना के तहत प्रस्ताव नहीं आया है। बताया जा रहा है कि मूल्य हस्तक्षेप योजना के तहत यूपी के किसानों से हुई आलू के खरीद पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 70.88 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
किसानों को राहत देने के लिए मोदी सरकार ने इस योजना की शुरूआत की है। ताकि कृषि उत्पादों के दाम नीचे जाने पर किसानों की भरपाई के लिए सरकार वाजिब मूल्य पर उनके उत्पाद खरीद सके। मार्च में यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने पर सूबे में आलू किसानों को भयंकर संकट का सामना करना पड़ा था। तब केंद्र ने मूल्य हस्तक्षेप योजना के जरिए आलू की खरीद करने का प्रदेश को निर्देश दिया था।
कई किसान दे चुके हैं अपनी जान
आलू की वाजिब कीमत न मिलने पर यूपी के विभिन्न इलाकों में किसानों के मौत के मामले सामने आए हैं। प्रति किलोग्राम आलू उत्पादन पर किसान को करीब सवा रुपये की लागत आती है लेकिन अब उसे कोई मुफ्त भी नहीं ले रहा है। आलम यह है कि कई किसानों के पास रबी की फसल बोने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।
आलू उत्पादक किसानों की मुश्किल यह है कि बीते मार्च में आलू की जोरदार फसल हुई थी। तब दाम बेहद नीचे आ गए थे। उस वक्त उंची कीमत की उम्मीद में किसानों ने अपना आलू कोल्ड स्टोरेज में रख दिया। मगर बरसात में भी आलू के दाम नहीं चढ़े। इसके बाद पंजाब से आलू की नई फसल आ गई और यूपी का नया आलू भी आ गया और पुराने आलू की पूछ बंद हो गई। बाजार में नया आलू आने से पुराने आलू का कोई खरीदार नहीं रह गया है। इसलिए किसानों को अपना आलू मुफ्त में बाहर फेंकना पड़ रहा है।
मूल्य हस्तक्षेप योजना के तहत इस वर्ष 1387.16 करोड़ खर्च चुका है केंद्र
केंद्र सरकार का कृषि मंत्रालय किसानों को राहत प्रदान करने की मंशा से वर्ष 2017-18 के बीच मूल्य हस्तक्षेप योजना के तहत विभिन्न राज्यों को 1387.16 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान कर चुका है।
केंद्र की सहायता के जरिए अलग-अलग राज्यों में विभिन्न कृषि उत्पादों की करीब 927700 मिट्रिक टन खरीद हुई है। तो दलहन और तिलहन किसानों के लिए कृषि मंत्रालय ने पीएसएस योजना के तहत 1209129 मिट्रिक टन की खरीद करते हुए करीब 5747 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।