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राज्यपाल बोले: आजम इस लायक नहीं कि उन पर टिप्पणी करूं

Sat, 10 Sep 2016 05:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली/ नई दिल्ली/एजेंसी
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली/ नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sat, 10 Sep 2016 05:15 AM IST
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UP Governor said, Azam khan is not that much important
- फोटो : amarujala

डॉ. भीमराव अंबेडकर पर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खां की आपत्तिजनक टिप्पणी से खफा प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि आजम इस लायक नहीं कि उन पर कोई टिप्पणी करूं। शुक्रवार को यहां दो कार्यक्रमों के सिलसिले में आए राज्यपाल से पत्रकारों ने आजम के आपत्तिजनक बयान को लेकर सवाल किया तो बोले- आजम खां अखिलेश सरकार में मंत्री होने के बावजूद जो वक्तव्य करते रहते हैं उस पर मैं किसी भी तरह की टीका-टिप्पणी को अनुचित मानता हूं क्योंकि राज्यपाल पद की एक गरिमा होती है इसलिए उनके बारे में कुछ कहना नहीं चाहता। वह इस लायक नहीं हैं।

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रामनाईक ने सियासत में व्यक्तिगत टीका टिप्पणी को भी गलत बताया। कहा कि विधानसभा चुनाव निकट हैं इसलिए राजनीति में संयम बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है। किसी भी तरह की व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। आरोप-प्रत्यारोप भी दायरे में होने चाहिए।
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प्रदेश में कानून व्यवस्था के सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि हालात किसी से छुपे नहीं हैं। खराब कानून व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जेलों में चल रही हड़ताल पर उन्होंने प्रदेश के कारागार मंत्री से बात की है। उनसे कहा है कि ऐसे मामलों में जरूरत पड़े तो कड़ा निर्णय लिया जाए लेकिन हड़ताल खत्म कराई जाए ताकि जेलों में व्यवस्था बरकरार रहे।

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अखिलेश सरकार के खिलाफ नाईक ने प्रणब और मोदी को लिखी चिट्ठी

UP Governor said, Azam khan is not that much important
राज्यपाल राम नाईक व अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala

राज्यपाल राम नाईक और यूपी सरकार के बीच फिर टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। राज्यपाल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख कर कहा है कि अखिलेश सरकार गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सीएजी ऑडिट की इजाजत नहीं दे रही है।

नाईक ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के ऑडिट के लिए राष्ट्रपति और पीएम को अलग-अलग चिट्ठी लिखी है। इनमें कहा गया है कि अखिलेश सरकार सीएजी से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) का फरफॉमरमेंस ऑडिट कराने से इनकार कर रही है।

नाईक इससे पहले भी राज्य में कानून-व्यवस्था और लोकायुक्त की नियुक्ति के मसले पर सरकार से टकरा चुके हैं। राज्यपाल चिट्ठी लिख कर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से राज्य मशीनरी को ओर से सार्वजनिक संपत्ति के अतिक्रमण का ब्योरा भी मांग चुके हैं। उन्होंने इन जमीनों की मौजूदा बाजार कीमत की जानकारी मांगी थी।

आय और खर्च का ऑडिट कराने की मांग की थी

UP Governor said, Azam khan is not that much important
राम नाईक - फोटो : amar ujala

सूत्रों ने बताया 26 अगस्त को राज्यपाल ने राष्ट्रपति को यह सूचना दी कि वह जीडीए के ऑडिट के मसले पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मई से जुलाई के बीच तीन बार चिट्ठी लिख चुके हैं। अन्य चीजों के अलावा उन्होंने प्राधिकरण का सीएजी से परफॉरमेंस, आय और खर्च का ऑडिट कराने की मांग की थी।

लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। यादव से इस मसले पर बात करने के अलावा नाईक ने 25 जुलाई को भेजी अपनी दस पेज की चिट्ठी में उन संवैधानिक नियमों का हवाला दिया है, जिनके मुताबिक भारत के समेकित निधि से फंड हासिल करने वाली संस्थाओं का सीएजी ऑडिट कराना जरूरी है। 

सीएजी ऑडिट न कराने का तर्क

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राज्यपाल राम नाईक

राज्यपाल का तर्क है कि गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी को राज्य के समेकित निधि से फंड मिलता है, जिसमें अतिरिक्त दो फीसदी स्टांप ड्यूटी भी शामिल है। प्राधिकरण राज्य सरकार के निर्देश पर इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, इलाके के विकास, सड़कों पर खर्च करता है। लिहाजा यह ऑडिट के दायरे में आता है। 

लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि दो फीसदी स्टांप ड्यूटी राज्य के समेकित कोष के दायरे में नहीं आता है। लिहाजा जब तक राज्यपाल की अनुमति न मिले तब तक अकाउटेंट जनरल को किसी संस्था या प्राधिकरण के ऑडिट का अधिकार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक नाईक ने राज्य सरकार के इस तर्क को दरकिनार करते हुए कहा है कि सीएजी एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन और विकास अधिनियम, 1973 के तहत आने वाले विकास प्राधिकरणों की आय और खर्चों की जांच से रोके।

नाइक ने तत्कालीन गवर्नर के 11 जून 1985 के उस आदेश का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि जो विकास प्राधिकरण राज्य के समेकित निधि से एक करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड हासिल करते हैं, उनकी आमदनी और खर्चे का ब्योरे का अधिकार सीएजी (यूपी के अकाउंटेंट जनरल) को है। 

मोदी से खुद मिलना चाहते हैं नाईक

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नाईक ने 8 सितंबर को पीएम मोदी की लिखी चिट्ठी में कहा है कि वह उनसे खुद मिल कर पूरे मामले कोे समझाना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि चूंकि इस मामले का संवैधानिक निहितार्थ हैं इसलिए निजी तौर पर मिलकर बात करना जरूरी है।

सूत्रों का कहना है कि अकाउंटेंट जनरल विनीता मिश्रा ने मई में ही गवर्नर को सूचित कर दिया था कि जीडीए और यूपी एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने फरफॉरमेंस ऑडिट कराने से इनकार कर दिया है। दोनों की ओर से कहा गया था कि ऑडिट करने के सीएजी के संवैधानिक अधिकार पर वे कानूनी राय ले रहे हैं। 

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