फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   UP Election 2017: BJP leaders fearing internal sabotage

यूपी में भाजपा नेताओं को सता रहा भितरघातियों का भय

Sat, 28 Jan 2017 10:03 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 28 Jan 2017 10:03 PM IST
विज्ञापन
UP Election 2017: BJP leaders fearing internal sabotage

इलाहाबाद में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं। इनमें से भाजपा ने सात बाहरी उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं। राजमणि कोल पहले भाजपा में थे, बाद में समाजवादी पार्टी में चले गए थे। अब भाजपा में लौट आए हैं। कोरांव से चुनाव लड़ रहे हैं।  केवल दो पुराने भाजपा नेताओं को ही प्रत्याशी बनाया गया है। इसी तरह से 27 जनवरी को ही बनारस में भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के विरोध में भाजपा नेताओं ने ही नारे लगाए। यहां तक भाजपा मुख्यालय में भी पहली बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ नारे लगे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के ही नेता राज्य में 403 विधानसभा सीट में से 50 से अधिक बाहरी उम्मीदवारों को लेकर सख्त नाराज हैं।

विज्ञापन


इलाहाबाद में आरएसएस से जुड़े एक प्रमुख सूत्र को यह काफी अखर रहा है। इसी तरह से बनारस में श्यामदेव राय चौधरी को टिकट न मिलना लोगों को रास नहीं आ रहा है। जौनपुर में भी यही स्थिति है। सैदपुर से प्रत्याशी बनाए गए विद्यासागर सोनकर भी बहुत खुश नहीं हैं। वह मछलीशहर विधानसभा सीट से चुनाव लडऩा चाहते थे। केन्द्र सरकार के चार मंत्रियों और पूर्वांचल के भाजपा से जुड़े एक बड़े सांसद को भी टिकट वितरण हजम नहीं हो रहा है। वहीं वरुण गांधी न तो स्टार प्रचारक हैं और न ही पार्टी उनका बहुत इस्तेमाल करना चाहती है। सब मिलाकर भाजपा में भितरघात बढ़ने की आशंका जोर पकडऩे लगी है। यूपी में पार्टी के एक प्रवक्ता ने भी दबी जुबान से माना कि कार्यकर्ताओं में थोड़ा नाराजगी है, लेकिन वह समय के साथ ठीक हो जाएगी।
विज्ञापन


दल बदलू को मिला सम्मान
पार्टी नेताओं का कहना है कि श्याम देव राय चौधरी को टिकट नहीं मिला जबकि वह लगातार विधायक रहे हैं। वहीं बसपा से भाजपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य और उनके  बेटे को टिकट मिल गया। भाजपा ने अपनी पहली ही सूची में 25 बाहर से प्रत्याशियों को टिकट दिया था। रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस से आई और उन्हें टिकट मिल गया। इसी तरह से लखनऊ  उत्तर, रनियां, बिल्हौर में दूसरे दल से आए प्रत्याशी मैदान में हैं। सहारनपुर क्षेत्र भी अछूता नहीं है। रापुर मनिहारन से स्व. रामस्वरुप निगम के बेटे देवेन्द्र निगम को प्रत्याशी बनाना पार्टी के ही लोगों को खल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्या हैं दल बदलुओं को टिकट देने के फायदे

UP Election 2017: BJP leaders fearing internal sabotage
यूपी भाजपा के एक बड़े नेता का कहना है कि हर जाति, हर वर्ग में संतुलन बिठाकर टिकट वितरण हुआ है। इसमें पारर्दिर्शता बरती गई है और यूपी में चुनाव के जातिगत समीकरणों का पूरा ध्यान रख गया है। सूत्र का कहना है कि अनुसूचित जाति, जन जाति, अन्य पिछड़े, अति पिछड़े और अगड़ी जातियों का सामंजस्य बनाकर निचले स्तर से आए नामों को तरजीह दी गई है। इसका चुनाव बाद अच्छा नतीजा आएगा।
 
दूसरे दल में नहीं है इतना घमासान
मौजूदा समय में टिकट वितरण को लेकर भाजपा में सबसे अधिक घमासान है। इलाहाद से आने वाले संघ के एक प्रचारक ने भी माना कि कांग्रेस पार्टी में टिकट वितरण को लेकर कोई घमासान नहीं है, क्योंकि यूपी में कांग्रेस की नैय्या डूब चुकी है। समाजवादी पार्टी में घमासान खत्म हो चुका है और अखिलेश यादव के चेहरे के आगे पार्टी का हर चेहरा बेमानी भरा हो गया है। सूत्र का कहना है कि बसपा में नेताओं की भगदड़ मची और सबसे अधिक नेता भाजपा में आ गया है। वहां पहले भी नेताओं में कोई सिर फुटौव्वल नहीं थी। इसलिए इसका भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed