बीसीआई के आदेश को चुनौती पेश करेगा यूपी बार कौंसिल
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उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाने के मामले में यूपी बार कौंसिल, बार कौंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के आदेश को चुनौती देगा। इसके लिए उसने हाईकोर्ट के समक्ष दाखिल अनिल प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान मोहलत मांगी है। कोर्ट ने इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति यूसी श्रीवास्तव की पीठ कर रही है।
बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने 27 अप्रैल 2016 को अधिसूचना जारी कर कहा है कि दो तिहाई सदस्यों के प्रस्ताव से ही अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। सभी राज्यों की बार कौंसिल को इससे संबंधित नियम बनाने का भी निर्देश दिया था। जब तक नियम नहीं बनते तब तक बीसीआई के निर्देश को बाध्यकारी माना गया।
कोर्ट ने कहा कि बीसीआई के इस नियम के कारण अध्यक्ष के खिलाफ पारित अविश्वास प्रस्ताव विधि सम्मत नहीं है। नियमानुसार दो तिहाई सदस्यों द्वारा लाए गए प्रस्ताव को तीन चौथाई सदस्यों द्वारा पास किया जाना चाहिए, मगर ऐसा नहीं किया गया है।
बीसीआई का नियम मनमाना है
यूपी बार कौंसिल की ओर से सीनियर एडवोकेट टीपी सिंह, राकेश पांडेय और सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि बीसीआई का नियम मनमाना है। वह इसे अदालत में चुनौती देंगे। बार कौंसिल जब तक नियम नहीं बना लेती है अध्यक्ष को सामान्य नियम आम सभा में बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से हटा सकते हैं।
बीसीआई का नियम बार कौसिंल पर बाध्यकारी नहीं हो सकता है जबतक कि इस प्रस्ताव को स्वीकार कर नियम न बना लिया जाए। अध्यक्ष अनिल सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशि नंदन और अनूप त्रिवेदी ने बहस की। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव को अवैध बताते हुए इसे खारिज करने की मांग की। फिलहाल कोर्ट ने अध्यक्ष के खिलाफ पारित अविश्वास प्रस्ताव पर लगी रोक जारी रखी है।