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धर्म की नगरी में जीत के लिए तरसी बीजेपी, इस बार मिलेगी सफलता ?

Wed, 08 Feb 2017 01:21 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 08 Feb 2017 01:21 PM IST
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up assembly poll Religion city of Mathura  BJP will waiting for win this time success
धर्म की नगरी मथुरा में जीत के लिए तरसी बीजेपी को मिलेगी इस बार सफलता

धर्म और आस्था की भूमि मथुरा में कभी एक छत्र राज्य करने वाली भाजपा अब जीत के लिए तरस गई है। पिछले डेढ़ से दो दशक के दौरान जिले की एक विधानसभा सीट पर भाजपा को कामयाबी नहीं मिल सकी है। हालांकि उम्मीदों के सहारे एक बार फिर चुनावी मैदान में बाजी मारने की कसरत की जा रही हैं।

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राम लहर के सहारे राजनीति में फर्श से अर्श पर आई भाजपा ने भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला स्थली मथुरा की राजनीतिक जमीन को कांग्रेस से कब्जा लिया था। लेकिन मथुरा में भाजपा की ये राजनीतिक पकड़ ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। स्थिति इस कदर खराब हो गई है कि पांच विधानसभा क्षेत्र वाले इस जनपद में पिछले 15 से 20 सालों में भाजपा खाता तक नहीं खोल पा रही है।
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भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण मथुरा शहरी सीट पर भी स्वामी राम स्वरूप शर्मा के 1996 में निर्वाचित होने के बाद जीत नसीब नहीं हुई है। यहां कांग्रेस विधायक प्रदीप माथुर के हाथों भाजपा लगातार मात खा रही है। यहां 2012 में भाजपा से डा. देवेंद्र शर्मा जीत के निकट पहुंचकर भी बाजी हार गए। 
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गोकुल विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को अंतिम जीत 1993 में मिली थी। इसके बाद तो इस क्षेत्र में भाजपा मुख्य मुकाबले का ही हिस्सा नहीं बन सकी है। छाता विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा को अंतिम जीत 1991 में किशोरी श्याम के रूप में मिली थी।

इसके बाद भाजपा यहां तीसरे स्थान पर पहुंचकर मुख्य मुकाबले से ही बाहर हो गई, जो स्थिति पिछले चुनावों तक बरकरार रही।

गोवर्धन विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 15 साल पहले जीत नसीब हुई थी। 2002 के चुनाव में श्माम सिंह अहेरिया भाजपा से निर्वाचित हुए थे, इसके बाद ये मौका फिर नहीं मिला। मांट विधानसभा क्षेत्र के परिणाम पर नजर डालें तो पिछले आठ बार से तो श्याम सुंदर शर्मा ही निर्वाचित हो रहे हैं।

राजनीति के बदलते परिदृश्य को देखते हुए भाजपा को उम्मीद है कि इस बार हार का ये क्रम खत्म होगा और जनपद में फिर कमल खिलेगा।

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