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20 साल पुराने आईटी कानून में बदलाव लाने पर विचार कर रही है सरकार : रवि शंकर प्रसाद

Thu, 27 Feb 2020 05:35 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 27 Feb 2020 05:35 AM IST
सार

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नए कानून में उच्चतम न्यायालय के निजता और संरक्षण पर दिए गए निर्णय जैसे मुद्दों को शामिल किया जाएगा। इसको लेकर एक टीम बनाई जाएगी जो विशेषज्ञों और उद्योगों से राय लेगा।

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Union Minister Ravi Shankar Prasad said, Government in thinking to bring changes in IT law
केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद (फाइल फोटो)

विस्तार

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि सरकार 20 साल पुराने आईटी कानून में बदलाव पर विचार कर रही है ताकि प्रौद्योगिकी परिवेश में हुई प्रगति के साथ इसका तालमेल बिठाए रखा जा सके। इसका एक उद्येश्य साइबर अपराध जैसे मसलों को देखते हुए एक मजबूत व्यवस्था बनाना है।

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प्रसाद ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कानून में बदलाव को लेकर एक विचार जारी है। इस कानून के 20 साल हो चुके हैं और आईटी परिवेश काफी विकसित हुआ है। नई प्रौद्योगिकी सामने आई हैं और ग्राहकों को लेकर पूरा माहौल तेजी से बदला है। इसके साथ चुनौतियां भी बढ़ी हैं।’
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उन्होंने कहा कि नए कानून में उच्चतम न्यायालय के निजता और संरक्षण पर दिए गए निर्णय जैसे मुद्दों को शामिल किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसको लेकर एक टीम बनाई जाएगी जो विशेषज्ञों और उद्योगों से राय लेगा। प्रसाद ने कहा कि प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। 
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उन्होंने कहा, ‘सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों की संख्या है जिसे हमें संभालना है... डिजिटल भुगतान, सेवाओं की डिजिटल डिलिवरी, जीएसटी, यूपीआई के मामले में प्रौद्योगिकी केंद्र में है। अब इससे दुरुपयोग का प्रश्न उठने लगा है। जब आईटी कानून आया, उस समय इन मंचों की विशालता को लेकर विचार नहीं किया गया।’


प्रसाद ने कहा कि साइबर मुद्दों से निपटने को लेकर भी मौजूदा कानून में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और वह नये प्रस्तावों में साइबल मसलों पर एक पूरा अध्याय शामिल करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि सेवाएं तथा वित्त सुविधाएं अब डिजिटल तरीके से दी जा रही हैं।

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