{"_id":"5addddf04f1c1bb56a8b5a4a","slug":"union-home-ministry-has-removed-afspa-from-meghalaya","type":"story","status":"publish","title_hn":"केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, AFSPA मेघालय से पूरी तरह हटा, अरुणाचल में आंशिक रूप से रहेगा लागू","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, AFSPA मेघालय से पूरी तरह हटा, अरुणाचल में आंशिक रूप से रहेगा लागू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 23 Apr 2018 11:07 PM IST
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सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम यानी अफस्पा मेघालय से पूरी तरह हटा दिया गया है। वहीं अरुणाचल प्रदेश में असम से लगती सीमा के आठ पुलिस स्टेशनों और म्यांमार से लगती सीमा के तीन जिलों तक इसे सीमित कर दिया गया है।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अफस्पा के तहत सुरक्षा बलों को बिना पूर्व चेतावनी के अभियान चलाने और किसी की गिरफ्तारी का अधिकार होता है।
अधिकारियों ने बताया कि मेघालय की सुरक्षा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार को देखते हुए वहां 31 मार्च से अफस्पा पूरी तरह से हटाया जा चुका है। पिछले साल 2017 में वहां उग्रवाद की सबसे कम घटनाएं हुई हैं। चार साल से हिंसा में गिरावट जारी है। ऐसा दो दशकों में पहली बार देखने को मिला है। वर्ष 2000 की तुलना में 2018 में 85 प्रतिशत कम हमले हुए।
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गृह मंत्रालय के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में इस विवादित कानून को असम से लगती सीमा के 16 पुलिस स्टेशनों से घटाकर आठ में सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा तीन जिलों तिरप, चांगलांग और लांगदिंग जिलों में यह कठोर कानून लागू है।
ज्ञात हो कि कई संगठन पूर्वोत्तर और जम्मू एवं कश्मीर से यह एक्ट हटाने की मांग करते रहे हैं क्योंकि इससे सुरक्षा बलों को नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई का सशक्त अधिकार मिल जाता है। नगालैंड में कई दशकों से जबकि असम में 1990 के दशक से यह कानून लागू है। अधिकारियों के मुताबिक, त्रिपुरा और मिजोरम से उग्रवाद का सफाया हो चुका है। असम, मेघालय, नगालैंड और मणिपुर की हालत में सुधार हुआ है।
समझौते के बावजूद नगालैंड में लागू है कानून
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नगा विद्रोही संगठन एनएससीएन-आईएम के महासचिव थुंगलेंग मुइवा और सरकार के वार्ताकार आरएन रवि के बीच 3 अगस्त 2015 को एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बावजूद नगालैंड से अफस्पा को नहीं हटाया जा सका है।
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गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अफस्पा के तहत सुरक्षा बलों को बिना पूर्व चेतावनी के अभियान चलाने और किसी की गिरफ्तारी का अधिकार होता है।
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अधिकारियों ने बताया कि मेघालय की सुरक्षा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार को देखते हुए वहां 31 मार्च से अफस्पा पूरी तरह से हटाया जा चुका है। पिछले साल 2017 में वहां उग्रवाद की सबसे कम घटनाएं हुई हैं। चार साल से हिंसा में गिरावट जारी है। ऐसा दो दशकों में पहली बार देखने को मिला है। वर्ष 2000 की तुलना में 2018 में 85 प्रतिशत कम हमले हुए।
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गृह मंत्रालय के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में इस विवादित कानून को असम से लगती सीमा के 16 पुलिस स्टेशनों से घटाकर आठ में सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा तीन जिलों तिरप, चांगलांग और लांगदिंग जिलों में यह कठोर कानून लागू है।
ज्ञात हो कि कई संगठन पूर्वोत्तर और जम्मू एवं कश्मीर से यह एक्ट हटाने की मांग करते रहे हैं क्योंकि इससे सुरक्षा बलों को नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई का सशक्त अधिकार मिल जाता है। नगालैंड में कई दशकों से जबकि असम में 1990 के दशक से यह कानून लागू है। अधिकारियों के मुताबिक, त्रिपुरा और मिजोरम से उग्रवाद का सफाया हो चुका है। असम, मेघालय, नगालैंड और मणिपुर की हालत में सुधार हुआ है।
समझौते के बावजूद नगालैंड में लागू है कानून
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नगा विद्रोही संगठन एनएससीएन-आईएम के महासचिव थुंगलेंग मुइवा और सरकार के वार्ताकार आरएन रवि के बीच 3 अगस्त 2015 को एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बावजूद नगालैंड से अफस्पा को नहीं हटाया जा सका है।