कलाम की प्रतिमा पर विवाद, मुस्लिम संस्था ने बताया गैर इस्लामिक
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तमिलनाडु की मुस्लिम संस्था जमातुल उलेमा काउंसिल ने पू्र्व और दिवंगत राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की प्रतिमा बनाने का विरोध किया है। कलाम की प्रतिमा रामनाथपुरम में उसी जगह स्थापित किए जाने की तैयारियां चल रही हैं जहां उन्हें दफनाया गया था। संस्था का कहना है कि शरीयत के मुताबिक इस्लाम में मूर्तियों की पूजा नहीं की जा सकती है। संस्था प्रमुख ए वलीयुल्ला नूरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अच्छा यही होगा कि कलाम के भारत को मजबूत करने के विजन के साथ चला जाए।
उन्होंने कहा कि कलाम चाहते थे कि युवा कुछ बड़ा करने का सपना देखें और उन्हें हकीकत में बदलें। नूरी के मुताबिक कलाम की इच्छा को पूरा करना उन्हें सम्मान देने का सबसे अच्छा तरीका है।
कलाम के नाती एपीजेए सलीम ने इस बात को स्वीकार किया कि मुस्लिम संस्था की ओर से उन्हें प्रतिमा न बनाने की हिदायत मिली है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि संस्था इस मामले में कुछ नहीं कर सकती है।
पीएम मोदी करेंगे कलाम की प्रतिमा का अनावरण
कलाम की प्रतिमा के अनावरण की बात पता चलते ही मुस्लिम संस्था ने अपना विरोध जताया। बता दें कि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कलाम की प्रतिमा का अनावरण करेंगे।
करीब सात फुट के कांसे की प्रतिमा लगभग तैयार है। कलाम की यह दूसरी आधिकारिक प्रतिमा होगी। इससे पहले हैदराबाद में डीआरडीओ कॉम्पलेक्स में उनकी प्रतिमा लगाई जा चुकी है जहां वह बतौर वैज्ञानिक काम करते थे।
पूर्व राष्ट्रपति की एक और प्रतिमा