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यहां राशन के लिए जरूरी है इंटरनेट, नेटवर्क के लिए चढ़ना पड़ेगा पेड़ पर
amarujala.com- Presented by: अकरम
Updated Fri, 03 Mar 2017 09:51 AM IST
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पेड़ पर चढ़ते लोग
- फोटो : times of india
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सरकार आम लोगों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। लेकिन, इन कोशिशों को तब झटका लगता है जब राजस्थान के उदयपुर से करीब 125 किलोमीटर दूर कोटरा में यह परेशानी का सबब बन जाए।
कोटरा में लोगों को राशन के लेने के लिए न सिर्फ लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है बल्कि पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन से फिंगरप्रिंट्स और बॉयोमीट्रिक्स सत्यापित कराने के लिए उनको पेड़ पर चढ़ना पढ़ता है। सत्यापन के बाद लोगों को राशन का सामान लेने के लिए कई मील चलकर राशन की दुकान पर जाना पड़ता है। सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को डिजिटिलाइज करने के इस कदम ने यहां रहने वालों के लिए बजाए आसानियों के और मुश्किल बढ़ा दी हैं। खासकर कोटरा में राशन के लिए काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, एक स्थानीय निवासी ने बताया कि हमारे घर से कई मील की दूरी पर सिर्फ एक राशन की दुकान है लेकिन पहाड़ी की चोटी पर राशन डीलर कैंप और दूर है। कभी-कभी तो इंटरनेट नेटवर्क के लिए हमें 4 से 5 घंटे तक इंतिजार करना पड़ता है तब कहीं जाकर मशीन काम करती है। इससे बेहतर सिस्टम तो पहले वाला ही था।
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एक स्कूल टीचर ने बतया,'कई घरों में यहां बिजली के कनेक्शन नहीं हैं। सड़क और उचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। सरकार कितनी बेवकूफ है पीओएस सिस्टम लागू करने से पहले बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना चाहिए था।'
सरकारी अधिकारी ने दावा किया कि दुर्गम क्षेत्र और आबादी के दूर-दूर बसे होने की वजह से काफी परेशानियां आती हैं। विकास की स्थिति यहां बेहतर न होने के कारण भी सेवाएं देने में मुश्किलें आती हैं। यहां कोटरा के दर्जनों गांवों में उचित संचार और इंटरनेट की सुविधा का अभाव है।
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कोटरा में लोगों को राशन के लेने के लिए न सिर्फ लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है बल्कि पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन से फिंगरप्रिंट्स और बॉयोमीट्रिक्स सत्यापित कराने के लिए उनको पेड़ पर चढ़ना पढ़ता है। सत्यापन के बाद लोगों को राशन का सामान लेने के लिए कई मील चलकर राशन की दुकान पर जाना पड़ता है। सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को डिजिटिलाइज करने के इस कदम ने यहां रहने वालों के लिए बजाए आसानियों के और मुश्किल बढ़ा दी हैं। खासकर कोटरा में राशन के लिए काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, एक स्थानीय निवासी ने बताया कि हमारे घर से कई मील की दूरी पर सिर्फ एक राशन की दुकान है लेकिन पहाड़ी की चोटी पर राशन डीलर कैंप और दूर है। कभी-कभी तो इंटरनेट नेटवर्क के लिए हमें 4 से 5 घंटे तक इंतिजार करना पड़ता है तब कहीं जाकर मशीन काम करती है। इससे बेहतर सिस्टम तो पहले वाला ही था।
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एक स्कूल टीचर ने बतया,'कई घरों में यहां बिजली के कनेक्शन नहीं हैं। सड़क और उचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। सरकार कितनी बेवकूफ है पीओएस सिस्टम लागू करने से पहले बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना चाहिए था।'
सरकारी अधिकारी ने दावा किया कि दुर्गम क्षेत्र और आबादी के दूर-दूर बसे होने की वजह से काफी परेशानियां आती हैं। विकास की स्थिति यहां बेहतर न होने के कारण भी सेवाएं देने में मुश्किलें आती हैं। यहां कोटरा के दर्जनों गांवों में उचित संचार और इंटरनेट की सुविधा का अभाव है।